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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'समावेशी शिक्षा और लैंगिक संवेदनशीलता' (Inclusive Education and Gender Sensitivity) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Moral Development Theory: पारंपरिक और उत्तर-पारंपरिक नैतिकता के चरण) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Ventromedial Prefrontal Cortex), 'इंसुला' (Insula), और 'सुपीरियर टेम्पोरल सुलस' (Superior Temporal Sulcus) के बीच सामाजिक-संवेगात्मक प्रसंस्करण, सहानुभूति एकीकरण, और नैतिक निर्णय लेने की सक्रियण गतिकी, तथा कैरल गिलगन (Carol Gilligan) के 'नैतिक विकास का देखभाल और उत्तरदायित्व दृष्टिकोण' (Care and Responsibility Perspective) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-इथिकल ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Ethical Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में लैंगिक न्याय (Gender Justice), न्याय-देखभाल संतुलन व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
लॉरेंस कोहलवर्ग के न्याय-उन्मुख नैतिक विकास और कैरल गिलगन के देखभाल-उन्मुख नैतिक दृष्टिकोण का न्यूरो-संज्ञानात्मक विश्लेषण यह प्रमाणित करता है कि वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स, इंसुला और सुपीरियर टेम्पोरल सुलस मिलकर नैतिक दुविधाओं को हल करने में संज्ञानात्मक मूल्यांकन और सहानुभूतिपूर्ण संवेगात्मक प्रतिक्रिया का समन्वय करते हैं। प्राथमिक समावेशी शिक्षा में इस न्यूरो-इथिकल दृष्टिकोण को लागू करने से विद्यार्थियों में लैंगिक पूर्वाग्रहों से मुक्त, न्यायपूर्ण और उत्तरदायित्वपूर्ण सहयोगात्मक व्यवहार का विकास होता है।
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सामाजिक अध्ययन (Social Studies) के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के 'स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन' (Swadeshi and Boycott Movement, 1905) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस आंदोलन की औपचारिक शुरुआत 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के प्रसिद्ध टाउन हॉल में आयोजित एक ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी प्रस्ताव' पारित किए जाने के साथ हुई थी, जिसका प्रमुख उद्देश्य बंगाल के विभाजन का कड़ा विरोध करना था।
2. आंदोलन के दौरान ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी के प्रचार-प्रसार के लिए बंगाल में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना की गई थी, ताकि पश्चिमी शिक्षा पद्धति के स्थान पर राष्ट्रीय नियंत्रण वाली शिक्षा को बढ़ावा दिया जा सके।
3. इस संपूर्ण आंदोलन के दौरान मुस्लिम लीग ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और बंगाल के विभाजन का पुरजोर विरोध करते हुए इसे राष्ट्रवाद की विजय के रूप में सराहा, जिससे हिंदू-मु मुस्लिम एकता का अभूतपूर्व उदाहरण देखने को मिला।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश की मृदा संरचना, कृषि जलवायु क्षेत्रों (Agro-climatic Zones) और प्रमुख फसलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को कुल 9 कृषि जलवायु क्षेत्रों (Agro-climatic Zones) में विभाजित किया गया है, और यहाँ की अधिकांश कृषि भूमि में 'जलोढ़ मृदा' (Alluvial Soil) पाई जाती है, जिसे स्थानीय भाषा में 'कछारी' या 'भूर' मृदा भी कहा जाता है।
2. बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाने वाली लाल और पैंडो/मार मृदा में नमी धारण करने की क्षमता अत्यधिक होती है, जिसके कारण यह क्षेत्र विशेष रूप से चना, मटर और तिलहन की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।
3. राज्य में स्थित 'तराई क्षेत्र' (Terai Region) में महीन जलोढ़ और दलदली मिट्टी पाई जाती है, जहाँ पर्याप्त वर्षा और उच्च आर्द्रता के कारण मुख्य रूप से धान और गन्ने की बंपर पैदावार होती है, जबकि यहाँ की मृदा में नाइट्रोजन और ह्यूमस की प्रचुरता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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पर्यावरण अध्ययन (EVS) के शिक्षण में 'रचनात्मक मूल्यांकन' (Formative Assessment) के अंतर्गत, निम्नलिखित में से कौन सी एक सबसे उपयुक्त एवं प्रभावी प्रमाणिक आकलन (Authentic Assessment) तकनीक मानी जाती है, जो विद्यार्थियों की सहयोगात्मक अधिगम क्षमता और समस्या-समाधान कौशल का वास्तविक मूल्यांकन करती है?
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प्राचीन भारतीय इतिहास एवं उत्तर प्रदेश के पुरातत्व के संदर्भ में, जौनपुर जिले में स्थित 'गोमती नदी' के तट पर पाए जाने वाले प्रागैतिहासिक स्थल और उत्तर प्रदेश के अन्य नवपाषाणिक एवं महापाषाणिक स्थलों की भौगोलिक स्थिति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
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हिंदी भाषा और व्याकरण के अंतर्गत 'शब्द विचार' और 'विकारी-अविकारी शब्दों' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विकारी शब्द वे शब्द होते हैं जिनमें लिंग, वचन, कारक या काल के आधार पर परिवर्तन (विकार) आ जाता है, और इसके अंतर्गत संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया शब्दों को शामिल किया जाता है।
2. अविकारी शब्द (अव्यय) वे शब्द होते हैं जिनके रूप में लिंग, वचन या कारक के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता है, तथा इसके प्रमुख भेदों में क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक शामिल हैं।
3. 'समुच्चयबोधक अव्यय' वे शब्द होते हैं जो किसी संज्ञा या सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध वाक्य के दूसरे पदों के साथ जोड़ते हैं, जबकि 'संबंधबोधक अव्यय' दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को आपस में जोड़ने का कार्य करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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