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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के आकलन एवं सतत-व्यापक मूल्यांकन (CCE)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, रॉबर्ट गैग्ने (Robert Gagné) द्वारा प्रतिपादित 'अधिगम की शर्तें' (Conditions of Learning: मौखिक सूचना, बौद्धिक कौशल, संज्ञानात्मक रणनीतियाँ, मोटर कौशल, और दृष्टिकोण) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex), 'बेसल गैंग्लिया' (Basal Ganglia), और 'सेरिबेलम' (Cerebellum) के बीच पदानुक्रमित कौशल अधिग्रहण, मोटर और संज्ञानात्मक समेकन (Consolidation), और फीडबैक प्रसंस्करण की सक्रियण गतिकी, तथा जॉन हैटी (John Hattie) के 'दृश्यमान शिक्षण' (Visible Learning) और प्रभावी फीडबैक के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-असेसमेंट ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Assessment Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में नैदानिक परीक्षण (Diagnostic Testing), स्व-मूल्यांकन (Self-assessment) व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
रॉबर्ट गैग्ने (Robert Gagné) का 'अधिगम की शर्तें' (Conditions of Learning) सिद्धांत विभिन्न प्रकार के अधिगम (मौखिक सूचना से लेकर संज्ञानात्मक रणनीतियों तक) को रेखांकित करता है। न्यूरो-संज्ञानात्मक दृष्टिकोण से, विभिन्न प्रकार के कौशल जैसे बौद्धिक कौशल और संज्ञानात्मक रणनीतियाँ 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' द्वारा प्रबंधित होती हैं, जबकि मोटर कौशल 'बेसल गैंग्लिया' और 'सेरिबेलम' की सक्रियता पर निर्भर करते हैं। जॉन हैटी का 'दृश्यमान शिक्षण' (Visible Learning) और प्रभावी फीडबैक इन न्यूरल नेटवर्क्स को सुदृढ़ करते हुए छात्रों के आत्म-मूल्यांकन और संज्ञानात्मक समेकन को बढ़ावा देते हैं। अतः विकल्प (b) इस जटिल न्यूरो-शैक्षणिक परिप्रेक्ष्य को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'नैतिक विकास और संज्ञानात्मक अंतर्संबंधों' के संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित 'नैतिक विकास का सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता स्तर' (Post-conventional Morality Level) के विशिष्ट चरणों—'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' तथा 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत'—के न्यूरो-मनोवैज्ञानिक स्वरूप और मस्तिष्क के 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' तथा 'इंसुला' (Insula) की सहानुभूतिपूर्ण निर्णय लेने की प्रक्रिया, तथा कैरोल गिलिगन (Carol Gilligan) द्वारा प्रतिपादित 'देखभाल का नैतिकता दृष्टिकोण' (Ethics of Care) के अंतर्गत 'स्वयं केंद्रितता से सार्वभौमिक उत्तरदायित्व तक' के चरणों के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, नैतिक दुविधाओं (Moral Dilemmas) के समाधान और विद्यार्थियों में सामाजिक-संवेगात्मक न्यायसंगत व्यवहार के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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सामाजिक अध्ययन (Social Studies) शिक्षण के अंतर्गत इतिहास शिक्षण की 'आलोचनात्मक चिंतन' (Critical Thinking) पद्धति और 'स्रोतों पर आधारित उपागम' (Source-Based Approach) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन इस विधि के सबसे प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक शैक्षणिक उद्देश्य को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं जलवायु विभाजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को मुख्य रूप से तीन प्रमुख प्राकृतिक प्रदेशों में विभाजित किया गया है - भावर एवं तराई क्षेत्र, गंगा-यमुना का विशाल मैदान, और दक्षिण का पठारी क्षेत्र।
2. राज्य के दक्षिण का पठारी क्षेत्र प्रायद्वीपीय पठार का ही उत्तर-पूर्वी विस्तार है, जिसके अंतर्गत झाँसी, ललितपुर, महोबा, बांदा और सोनभद्र जैसे जिले आते हैं, और यहाँ की मुख्य नदियाँ बेतवा, केन तथा सोन हैं।
3. 'भावर' क्षेत्र महीन कणों वाली उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी का मैदान है, जहाँ नदियाँ सतह पर बहती हैं और कृषि के लिए यह क्षेत्र सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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प्राचीन भारतीय दर्शन और उपनिषद काल के संदर्भ में, उत्तर प्रदेश से जुड़े निम्नलिखित ऐतिहासिक एवं दार्शनिक केंद्रों पर विचार कीजिए:
1. कौशाम्बी (जो वत्स महाजनपद की राजधानी थी) में स्थित 'घोषइटाराम विहार' में महात्मा बुद्ध ने अपने जीवन के सर्वाधिक वर्षावास व्यतीत किए थे और यहीं पर दार्शनिक उद्दालक आरुणि का मुख्य आश्रम था।
2. 'वाराणसी' (काशी) उपनिषद काल में ब्रह्म विद्या और दार्शनिक बहसों का एक प्रमुख केंद्र था, जहाँ राजा अजातशत्रु के दरबार में गार्गी, याज्ञवल्क्य और उद्दालक आरुणि जैसे महान दार्शनिकों के बीच आत्म-विद्या पर संवाद हुए थे।
3. 'श्रावस्ती' (कोशला राज्य की राजधानी) में स्थित 'जेतवन' विहार को व्यापारी अनाथपिंडक ने सुदात्त की भूमि खरीदकर बौद्ध संघ को दान दिया था, जहाँ बुद्ध ने अपने अधिकांश उपदेश दिए और कई भिक्षुओं को उच्च शिक्षा प्रदान की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक, भौगोलिक और ऐतिहासिक संस्थाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश लोक सेवा अधिकरण (Uttar Pradesh Public Services Tribunal) की स्थापना राज्य के कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवादों के त्वरित निस्तारण के लिए लखनऊ में की गई है, जिसकी मुख्य पीठ के साथ-साथ एक अन्य पीठ गोरखपुर में भी स्थित है।
2. उत्तर प्रदेश में 'राज्य मानवाधिकार आयोग' का गठन मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के तहत किया गया था, और यह आयोग राज्य सरकार के अधीन कार्यरत लोक सेवकों द्वारा मानवाधिकारों के हनन के मामलों की सीधी जाँच करने का पूर्ण अधिकार रखता है।
3. उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक निकाय है जिसका गठन अनुच्छेद 243K के तहत किया गया है, और यह पंचायत तथा नगरीय निकायों के अतिरिक्त राज्य विधानसभा और विधान परिषद के चुनावों का भी सफल संचालन व अधीक्षण करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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