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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सृजनात्मकता और शिक्षण विधियाँ' (Creativity and Teaching Methods) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, ई. पी. टॉरेंस (E.P. Torrance) तथा ग्राहम वालास (Graham Wallas) द्वारा प्रतिपादित 'सृजनात्मक चिंतन के चरण' (तैयारी, उद्भवन/प्रतियांक्षीकरण, प्रबुद्धता, और सत्यापन) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (Default Mode Network - DMN), 'एक्साथ्सिक कंट्रोल नेटवर्क' (Central Executive Network), और 'सिलिएरी कॉर्टेक्स' के बीच अपसारी चिंतन, अनजाने में होने वाले विचार संलयन (Unconscious Idea Association), और संज्ञानात्मक नियंत्रण की सक्रियण गतिकी, तथा जोइ गिलफोर्ड के 'अपसारी उत्पादन' (Divergent Production) सिद्धांत के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-क्रिएटिविटी ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Creativity Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में मस्तिष्क-मंथन (Brainstorming), मौलिकता (Originality) व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
व्याख्या: सही विकल्प (b) है। सृजनात्मकता केवल याद रखने की क्षमता नहीं है, बल्कि यह मस्तिष्क के 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (DMN) और 'केंद्रीय कार्यकारी नेटवर्क' (CEN) के बीच के गतिशील संतुलन पर निर्भर करती है। ग्राहम वालास के चरणों के अनुसार, उद्भवन (Incubation) के दौरान DMN नए और अप्रत्याशित संबंध बनाने में मदद करता है, जबकि सत्यापन (Verification) के दौरान CEN तार्किक रूप से विचारों को छांटता है और उनका मूल्यांकन करता है। आधुनिक समावेशी शिक्षा में 'न्यूरो-क्रिएटिविटी ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' इसी संतुलन को साधते हुए विद्यार्थियों में अपसारी चिंतन और मौलिकता का संवर्धन करती है।
Related Questions
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उत्तर प्रदेश की बोलियों, उपभाषाओं और हिंदी साहित्य के विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्रों में बोली जाने वाली 'ब्रजभाषा' का विकास शौरसेनी अपभ्रंश से हुआ है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में बोली जाने वाली 'अवधी' और 'भोजपुरी' में से अवधी का विकास अर्धमागधी अपभ्रंश से तथा भोजपुरी का विकास मागधी अपभ्रंश से माना जाता है।
2. 'खड़ी बोली' (कौरवी) का उद्गम भी शौरसेनी अपभ्रंश के उत्तरी रूप से हुआ है, और आधुनिक हिंदी गद्य के विकास में भारतेंदु युग से पूर्व खड़ी बोली में गद्य लेखन का सूत्रपात करने वाले रचनाकारों में लल्लू लाल और सदल मिश्र का नाम प्रमुख है।
3. उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बोली जाने वाली 'बुंदेली' और बघेलखंड क्षेत्र में बोली जाने वाली 'बघेली' दोनों ही बोलियाँ बिहारी उपभाषा वर्ग के अंतर्गत आती हैं, जिन्हें ग्रियर्सन के भाषाI सर्वे में पूर्वी हिंदी की शाखा माना गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास, विधानसभा गठन और प्रमुख विधायी पदों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश (तत्कालीन संयुक्त प्रान्त) में वर्ष 1937 में गठित पहली लोकप्रिय मंत्रिमंडल सरकार के प्रधानमंत्री (तत्कालीन मुख्यमंत्री पद का नाम) के रूप में 'गोविन्द वल्लभ पंत' ने कार्यभार संभाला था, जो बाद में राज्य के पहले मुख्यमंत्री भी बने।
2. स्वतंत्र भारत में उत्तर प्रदेश की विधानसभा की पहली महिला अध्यक्ष (Speaker) होने का गौरव 'श्रीमती सुचेता कृपलानी' को प्राप्त है, जिन्होंने राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में भी इतिहास रचा था।
3. उत्तर प्रदेश विधान परिषद (Legislative Council), जो कि राज्य का उच्च सदन है, के पहले सभापति (Chairman) के रूप में 'श्री सरन बहादुर सक्सेना' ने कार्य किया था, और यह देश के सबसे बड़े द्विसदनीय विधानमंडलों में से एक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'नैतिक विकास के सिद्धांत' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित 'नैतिक विकास के चरण' (Stages of Moral Development) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Ventromedial Prefrontal Cortex - vmPFC), 'इंसुला' (Insula), और 'सुपीरियर टेम्पोरल सल्कास' (Superior Temporal Sulcus) के बीच सामाजिक-संवेगात्मक निर्णय, परोपकारिता, और नैतिक दुविधा (Moral Dilemma) प्रसंस्करण की सक्रियण गतिकी, तथा कैरल गिलिगन (Carol Gilligan) के 'देखभाल की नैतिकता' (Ethics of Care) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, वैल्यू-बेस्ड मोरल कंस्ट्रक्टिविस्ट पेडागोजी (Value-Based Moral Constructive Pedagogy) और विद्यार्थियों में संवेगात्मक समानुभूति, न्यायपरक दृष्टिकोण व समग्र नैतिक तर्क शक्ति के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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बुद्ध के उपदेशों, उनके जीवनकाल की घटनाओं और उत्तर प्रदेश में स्थित बौद्ध स्थलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महात्मा बुद्ध ने अपने जीवन का सर्वाधिक वर्षावास (स्रावस्ती में) बिताया था, और यहीं पर अंगुलिमाल नामक प्रसिद्ध डाकू उनके संपर्क में आकर उनका अनुयायी बना था।
2. उत्तर प्रदेश के कुशीनगर (मल्लगणराज्य की राजधानी) में बुद्ध को महापरिनिर्वाण प्राप्त हुआ था, और यहीं हिरणवती नदी के तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया था।
3. वाराणसी के निकट सारनाथ (ऋषिपतनम / मृगदाव) में बुद्ध ने अपना पहला उपदेश 'धर्मचक्रप्रवर्तन' दिया था, जिसमें उनके पाँच संन्यासी शिष्य शामिल थे।
4. कौशाम्बी में स्थित 'घोषाराम विहार' वह प्रसिद्ध बौद्ध मठ था जहाँ बुद्ध ने कभी भी प्रवास नहीं किया था, क्योंकि वहाँ के व्यापारी उनके विचारों के विरुद्ध थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'अमूर्त चिंतन' की अवस्था कौन सी है?
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