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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सहानुभूति, नैतिक विकास और सामाजिक अधिगम' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (पूर्व-पारंपरिक, पारंपरिक, और उत्तर-पारंपरिक स्तर) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Ventromedial Prefrontal Cortex - VmPFC), 'इंसुला' (Insula - Empathy and Disgust Processing), और 'सुपरियर टेम्पोरल लकस' (Superior Temporal Sulcus - Theory of Mind) के बीच नैतिक निर्णय लेने, संवेदी-सहानुभूति एकीकरण (Empathy Integration), और सामाजिक परिप्रेक्ष्य ग्रहण करने की सक्रियण गतिकी, तथा अल्बर्ट बंडूरा के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-इथिकल ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Ethical Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में नैतिक तार्किकता, परोपकारी व्यवहार व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

यह प्रश्न UPTET के बाल विकास और शिक्षाशास्त्र के अंतर्गत नैतिक विकास (लॉरेंस कोहलबर्ग) और सामाजिक अधिगम (अल्बर्ट बंडूरा) के न्यूरो-संज्ञानात्मक आधारों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। मस्तिष्क के 'वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (VmPFC) और 'इंसुला' नैतिक तर्क, सहानुभूति और सामाजिक नियमों के मूल्यांकन में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। आधुनिक समावेशी शिक्षा में 'न्यूरो-इथिकल ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' इन जैविक और मनोवैज्ञानिक प्रणालियों को एकीकृत करके बच्चों में न्याय, सहयोग और नैतिक तार्किकता का विकास करती है। अतः विकल्प (A) पूर्णतया सत्य और सर्वाधिक उपयुक्त है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'समावेशी शिक्षा और विशिष्ट बालकों के शिक्षण' (Inclusive Education) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, 'डिफ़िसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर' (ADHD - Attention Deficit Hyperactivity Disorder) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डॉर्मसैटल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Dorsolateral Prefrontal Cortex), 'बेसल गैन्ग्लिया' (Basal Ganglia), और 'लोकस कोएरुलोस' (Locus Coeruleus) के बीच डोपामाइनर्जिक डिस्फंक्शन, कार्यकारी कार्यप्रणाली (Executive Functioning) की विफलता, और अवरोधक नियंत्रण (Inhibitory Control) के क्षरण की सक्रियण गतिकी, तथा रसेल बार्कले (Russell Barkley) के 'स्व-नियमन का कार्यकारी मॉडल' (Executive Model of Self-Regulation) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-ADHD ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-ADHD Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में व्यवहार प्रबंधन, संज्ञानात्मक नियंत्रण व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत की अवस्थाओं और लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत के प्रमुख संप्रत्ययों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पियाजे के अनुसार 'पूर्व संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage, लगभग 2 से 7 वर्ष) में बालक में 'संरक्षण' (Conservation) का गुण पूरी तरह विकसित हो जाता है, जिससे वह समझ जाता है कि किसी वस्तु के आकार या रूप बदलने पर उसकी मात्रा या द्रव्यमान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। 2. वाइगोत्स्की के सिद्धांत में 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) वास्तविक विकास स्तर (स्वयं द्वारा समस्याओं को हल करने की क्षमता) और संभावित विकास स्तर (वयस्क या अधिक ज्ञानी अन्य व्यक्ति के मार्गदर्शन में हल करने की क्षमता) के बीच के अंतर को दर्शाता है। 3. वाइगोत्स्की ने संज्ञानात्मक विकास में भाषा की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण माना है, और उनके अनुसार बालकों द्वारा अपने ही कार्यों को निर्देशित करने के लिए किया जाने वाला 'निजी भाषण' (Private Speech) आगे चलकर आंतरिक विचार (Inner Speech) में परिवर्तित हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के संदर्भ में, अमेरिकी मनोवैज्ञानिक लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित नैतिक विकास के चरणों में से 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-Conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले दूसरे चरण यानी 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःचेतना अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation - Stage 6) की सबसे विशिष्ट और मूल मनोवैज्ञानिक विशेषता निम्नलिखित में से क्या है? प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और दर्शन के संदर्भ में, मीमांसा (पूर्व मीमांसा) दर्शन और उसके प्रणेता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पूर्व मीमांसा दर्शन के संस्थापक महर्षि जैमिनी हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य वेदों के कर्मकांडीय हिस्से (ब्राह्मण ग्रंथों) की व्याख्या करना और वैदिक यज्ञों व अनुष्ठानों की अनिवार्यता को स्थापित करना है। 2. इस दर्शन के अनुसार, धर्म ही वह सर्वोच्च नियम है जो मनुष्य को उसके कर्तव्यों का बोध कराता है, और वेदों को 'अपौरुषेय' (किसी पुरुष या देवता द्वारा रचित नहीं बल्कि शाश्वत) माना गया है। 3. उत्तर मीमांसा (वेदांत दर्शन), जिसे बादरायण द्वारा रचित ब्रह्मसूत्र पर आधारित माना जाता है, पूर्व मीमांसा के बिल्कुल विपरीत केवल ज्ञान मार्ग पर बल देती है, जबकि पूर्व मीमांसा कर्म मार्ग पर जोर देती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'हिंदी भाषा एवं व्याकरण' के अंतर्गत 'शब्द भेद और व्युत्पत्ति' के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प 'तत्सम', 'तद्भव', 'देशज' और 'विदेशी' शब्दों के उस सटीक और वैज्ञानिक वर्गीकरण को दर्शाता है जो उनकी ऐतिहासिक व्युत्पत्ति और ध्वनि परिवर्तन के नियमों के अनुकूल है?
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