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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'भाषा विकास एवं वैचारिक संप्रभुता' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, नोम चॉम्स्की (Noam Chomsky) द्वारा प्रतिपादित 'भाषा अर्जन उपकरण' (Language Acquisition Device - LAD) और 'सार्वभौमिक व्याकरण' (Universal Grammar) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'ब्रोका क्षेत्र' (Broca's Area), 'वर्निक क्षेत्र' (Wernicke's Area), और 'आर्क्युएट फेसिकुलस' (Arcuate Fasciculus) के बीच सिंटेक्टिक मैपिंग, ध्वन्यात्मक प्रसंस्करण, और सिमेंटिक एकीकरण की सक्रियण गतिकी, तथा जीन पियाजे (Jean Piaget) और लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के भाषा और विचार के अंतर्संबंधों के सिद्धांतों के साथ उनके पारस्परिक तालमेल तथा आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-लिंग्विस्टिक ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Linguistic Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में स्व-नियमित अभिव्यक्ति, भाषाई क्षमता व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

नोम चॉम्स्की का 'भाषा अर्जन उपकरण' (LAD) और 'सार्वभौमिक व्याकरण' इस बात पर जोर देते हैं कि बच्चों में भाषा सीखने की जन्मजात क्षमता होती है। न्यूरोलॉजिकल स्तर पर, ब्रोका क्षेत्र (भाषा उत्पादन), वर्निक क्षेत्र (भाषा बोध), और आर्क्युएट फेसिकुलस (इन दोनों को जोड़ने वाला तंत्रिका मार्ग) मिलकर सिंटेक्टिक और सिमेंटिक प्रसंस्करण को संभव बनाते हैं। आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षाओं में 'न्यूरो-लिंग्विस्टिक ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' इन जैविक क्षमताओं को सामाजिक-सांस्कृतिक और संवेगात्मक रणनीतियों के साथ एकीकृत करके विद्यार्थियों के समग्र भाषाई और संज्ञानात्मक विकास को बढ़ावा देती है। अतः विकल्प (a) सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग द्वारा प्रतिपादित 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता स्तर' (Post-Conventional Morality: सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत और व्यक्तिगत अंतरात्मा) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'वेंट्रोज़ोमियल और वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (VMPFC - नैतिक निर्णय लेने, सहानुभूति और सामाजिक-संवेगात्मक एकीकरण), 'एंटीरियर इंसुला' (Anterior Insula - नैतिक दुविधाओं के दौरान न्याय और अनुचितता की भावना का प्रसंस्करण), तथा 'एपिग्डाला और टेम्पोरो-पैरिएटल जंक्शन' (Amygdala & TPJ - दूसरों के दृष्टिकोण और मानसिक अवस्थाओं (Theory of Mind) को समझने) के बीच तंत्रिका सिंक्रनाइजेशन (Neural Synchronization), नैतिक तार्किकता के दौरान कार्यकारी नियंत्रण, और न्यूरोनल सर्किटों की सक्रियण गतिकी, तथा कैरोल गिलिगन के 'देखभाल के नैतिकता सिद्धांत' (Ethics of Care) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-मॉरल ऑप्टिमाइज्ड वैल्यू पेडागोजी' (Neuro-Moral Optimized Value Pedagogy) और विद्यार्थियों में सार्वभौमिक न्याय बोध, सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? पर्यावरण अध्ययन (EVS) के अंतर्गत 'जैव भू-रासायनिक चक्र' (Biogeochemical Cycles) और उनके प्रकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'गैसीय चक्र' (Gaseous Cycles) के अंतर्गत वायुमंडल या जलमंडल मुख्य भंडार (Reservoir) होते हैं, जिसके प्रमुख उदाहरण नाइट्रोजन चक्र, कार्बन चक्र और ऑक्सीजन चक्र हैं, तथा ये चक्र वैश्विक स्तर पर संचालित होते हैं। 2. 'अवसादी चक्र' (Sedimentary Cycles) के अंतर्गत पृथ्वी की भूपर्पटी (Lithosphere) मुख्य भंडार होती है, और इसके प्रमुख उदाहरण फास्फोरस चक्र, गंधक (सल्फर) चक्र और कैल्शियम चक्र हैं, जो गैसीय चक्रों की तुलना में धीमी गति से चलते हैं। 3. पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय (Unidirectional) होता है, जो ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर पर जाने पर लगातार क्षय होता है, जबकि पोषक तत्वों (Nutrients) का पुनर्चक्रण होता रहता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Moral Development Theory) और इसके 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-Conventional Morality Level) के अंतर्गत आने वाले दोनों चरणों (चरण 5 और चरण 6) की प्रमुख विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस स्तर के पाँचवें चरण ('सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' - Social Contract and Individual Rights) में व्यक्ति यह मानता है कि नियम और कानून समाज के आपसी समझौते का परिणाम हैं, इसलिए यदि कोई कानून मानवाधिकारों या समाज के बहुसंख्यक कल्याण की रक्षा करने में असफल रहता है, तो उसमें विवेकपूर्ण तरीके से बदलाव किया जा सकता है। 2. छठे चरण ('सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत' - Universal Ethical Principles) में व्यक्ति किसी बाहरी सामाजिक दबाव या कानूनी दंड के भय से नहीं, बल्कि अपने स्वयं के चुने हुए उन अंतरात्मा के सार्वभौमिक सिद्धांतों (जैसे न्याय, मानवाधिकार, और मानव जीवन की गरिमा) के आधार पर नैतिक निर्णय लेता है, भले ही वे नियम मौजूदा कानूनों के विरुद्ध क्यों न हों। 3. कोहलवर्ग के अनुसार नैतिक विकास के इस सर्वोच्च उत्तर-रूढ़िगत स्तर पर अधिकांश किशोर और वयस्क अपने जीवन के व्यावहारिक अनुभवों के कारण स्वतः पहुँच जाते हैं, और इस अवस्था की मुख्य विशेषता यह होती है कि इसमें नैतिक तर्क पूरी तरह से पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और अधिकार बनाए रखने पर केंद्रित हो जाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भू-गर्भीय इतिहास के संदर्भ में, राज्य का कौन सा प्राचीनतम भू-भाग गोंडवाना लैंड (Gondwana Land) का हिस्सा न होकर प्रायद्वीपीय भारत के उत्तरward विस्थापन के दौरान विंध्यन क्रम की चट्टानों और जलोढ़ निक्षेपों से निर्मित एक विस्तृत मैदानी क्षेत्र है? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'हिंदी भाषा एवं व्याकरण' के अंतर्गत 'कारक और उनके विभक्ति चिह्नों' के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प 'अपादान कारक' (Apadan Karak) और 'करण कारक' (Karan Karak) के बीच के सूक्ष्म अंतर—विशेष रूप से जहाँ दोनों में 'से' विभक्ति चिह्न का प्रयोग होता है (जैसे अलगाव/दूर होना, डर, तुलना, और सीखने के संदर्भ में बनाम साधन या माध्यम के रूप में)—के व्याकरणिक विश्लेषण और उनके सबसे सटीक व मानकीकृत उदाहरणों के वैधानिक एवं तार्किक स्वरूप को प्रदर्शित करता है?
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