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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग द्वारा प्रतिपादित 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता स्तर' (Post-Conventional Morality: सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत और व्यक्तिगत अंतरात्मा) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'वेंट्रोज़ोमियल और वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (VMPFC - नैतिक निर्णय लेने, सहानुभूति और सामाजिक-संवेगात्मक एकीकरण), 'एंटीरियर इंसुला' (Anterior Insula - नैतिक दुविधाओं के दौरान न्याय और अनुचितता की भावना का प्रसंस्करण), तथा 'एपिग्डाला और टेम्पोरो-पैरिएटल जंक्शन' (Amygdala & TPJ - दूसरों के दृष्टिकोण और मानसिक अवस्थाओं (Theory of Mind) को समझने) के बीच तंत्रिका सिंक्रनाइजेशन (Neural Synchronization), नैतिक तार्किकता के दौरान कार्यकारी नियंत्रण, और न्यूरोनल सर्किटों की सक्रियण गतिकी, तथा कैरोल गिलिगन के 'देखभाल के नैतिकता सिद्धांत' (Ethics of Care) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-मॉरल ऑप्टिमाइज्ड वैल्यू पेडागोजी' (Neuro-Moral Optimized Value Pedagogy) और विद्यार्थियों में सार्वभौमिक न्याय बोध, सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धांत के अंतर्गत 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) के न्यूरो-संज्ञानात्मक विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि इस उच्च-स्तरीय नैतिक तार्किकता, अमूर्त न्याय और सार्वभौमिक सिद्धांतों के निर्धारण में वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (VMPFC), टेम्पोरो-पैरिएटल जंक्शन (TPJ - थ्योरी ऑफ माइंड), और एंटीरियर इंसुला की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ये क्षेत्र व्यक्तियों को व्यक्तिगत सामाजिक मानदंडों से परे जाकर मानवतावादी और सहानुभूतिपूर्ण निर्णय लेने में सक्षम बनाते हैं। आधुनिक समावेशी कक्षाओं में इस न्यूरो-नैतिक दृष्टिकोण (Neuro-Moral Perspective) को लागू करने से विद्यार्थियों में गहरी सहानुभूति, न्यायप्रियता और उच्च कोटि की संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता का विकास होता है। अतः विकल्प (A) सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है।
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage: लगभग 11 वर्ष से वयस्कता तक) की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताओं पर विचार कीजिए:
1. इस अवस्था में बालकों में 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) की क्षमता पूरी तरह विकसित हो जाती है, जिससे वे बिना किसी दृश्य या मूर्त सामग्री के केवल प्रतीकों, विचारों और परिकल्पनाओं के आधार पर समस्याओं को हल कर सकते हैं।
2. बालक 'परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) करने में सक्षम हो जाते हैं, जिसका अर्थ है कि वे किसी समस्या के समाधान के लिए पहले विभिन्न परिकल्पनाएं (Hypotheses) बनाते हैं और फिर तार्किक रूप से उनका परीक्षण करके सही निष्कर्ष पर पहुंचते हैं।
3. इस चरण के दौरान बालकों की सोच से 'अहमकेंद्रिता' (Egocentrism) पूरी तरह समाप्त हो जाती है और वे वैज्ञानिक पद्धति की तरह व्यवस्थित और तार्किक ढंग से सोचना शुरू कर देते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास का सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के संदर्भ में, कोहलबर्ग द्वारा बताए गए तीन स्तरों और उनके अंतर्गत छह चरणों में से उस विशिष्ट चरण को पहचानिए जो 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-conventional Morality) के स्तर के अंतर्गत आता है, जिसमें व्यक्ति कानून और सामाजिक व्यवस्था से ऊपर उठकर अपने स्वयं के विवेक, सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों और मानवीय अधिकारों (जैसे न्याय, समानता और आपसी सम्मान) के आधार पर सही या गलत का निर्णय करता है, भले ही वे नियम समाज या कानून के विपरीत क्यों न हों?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अभिप्रेरणा और अधिगम' (Motivation and Learning) के संदर्भ में, मनोवैज्ञानिक अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) द्वारा प्रतिपादित 'मानवीय आवश्यकताओं के पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs Theory) के अनुसार, जब कोई व्यक्ति अपनी शारीरिक और सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद 'प्रेम और अपनेपन की आवश्यकता' (Love and Belongingness Needs) तथा 'सम्मान की आवश्यकता' (Esteem Needs) को पार करते हुए सर्वोच्च चरण—अर्थात 'आत्म-सिद्धि की आवश्यकता' (Self-Actualization)—की ओर अग्रसर होता है, तो मैस्लो के इस सिद्धांत के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा वैज्ञानिक कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक, राजनीतिक और विधायी ढांचे के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश विधानसभा (Uttar Pradesh Legislative Assembly) में कुल सदस्यों की संख्या 403 निर्वाचित और 1 आंग्ल-भारतीय (एंग्लो-इंडियन) मनोनीत सदस्य मिलाकर कुल 404 हुआ करती थी, किंतु 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 के द्वारा लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए सीटों के मनोनयन के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है।
2. उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जो प्रशासनिक सुविधा के लिए 18 मंडलों में विभाजित किए गए हैं, और इनमें सबसे बड़ा मंडल क्षेत्रफल और जनसंख्या की दृष्टि से 'कानपुर' मंडल है, जबकि सबसे छोटा मंडल 'सहारनपुर' है।
3. राज्य में विधान परिषद के गठन का प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत आता है, जिसके अनुसार संसद विधि द्वारा किसी राज्य में विधान परिषद का सृजन या उत्सादन कर सकती है यदि संबंधित राज्य की विधानसभा अपने कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से ऐसा संकल्प पारित कर दे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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हिंदी भाषा शिक्षण और व्याकरण के अंतर्गत, 'अलंकार' संप्रदाय के प्रवर्तक आचार्य कौन माने जाते हैं तथा उनके द्वारा रचित किस ग्रंथ में अलंकार को काव्य की आत्मा के रूप में सबसे पहले प्रतिष्ठित किया गया था?
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