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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, 'कार्ल रोजर्स' (Carl Rogers) द्वारा प्रतिपादित 'मानवतावादी उपागम' (Humanistic Approach) और 'सुविधाजनक अधिगम' (Facilitative Learning) के सिद्धांत के अनुसार, एक शिक्षक को कक्षा कक्ष में 'सुविधादाता' (Facilitator) की भूमिका निभाते समय निम्नलिखित में से किस मुख्य शिक्षण रणनीति का पालन करना चाहिए ताकि विद्यार्थियों में सार्थक और अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) को बढ़ावा मिल सके?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के मानवतावादी अधिगम सिद्धांत के अनुसार, शिक्षा छात्र-केंद्रित होनी चाहिए जहाँ शिक्षक का मुख्य कार्य ज्ञान थोपना नहीं बल्कि एक 'सुविधादाता' (Facilitator) के रूप में कार्य करना है। रोजर्स के अनुसार सार्थक (Meaningful) और अनुभवात्मक अधिगम तब होता है जब कक्षा में तीन प्रमुख शर्तें पूरी होती हैं: 1. वास्तविकतात या पारदर्शिता (Genuineness/Congruence), 2. पूर्ण स्वीकृति या बेजोड़ सकारात्मक सम्मान (Unconditional Positive Regard), और 3. सहानुभूतिपूर्ण समझ (Empathic Understanding)। अतः विकल्प (c) इस सिद्धांत की सबसे सटीक और मनोवैज्ञानिक रूप से सही व्याख्या करता है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लेव वायगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत' (Socio-Cultural Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD)**—जिसे उस वास्तविक विकासात्मक स्तर (जो स्वतंत्र समस्या-समाधान द्वारा निर्धारित होता है) और संभावित विकासात्मक स्तर (जो वयस्क मार्गदर्शन या अधिक सक्षम साथी (MKO) के सहयोग से प्राप्त किया जाता है) के बीच के अंतर के रूप में परिभाषित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के मचान (Scaffolding), सामाजिक मध्यस्थता (Social Mediation) और उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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