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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंध' (Operant Conditioning) सिद्धांत के अंतर्गत 'पुनर्बलन अनुसूचियों' (Schedules of Reinforcement) में से 'परिवर्ती अंतराल अनुसूची' (Variable Interval Schedule) का अधिगमकर्ताओं के व्यवहार पर क्या सबसे प्रमुख और विशिष्ट मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है?
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Detailed Explanation
बी. एफ. स्किनर के क्रियाप्रसूत अनुबंधन में 'परिवर्ती अंतराल अनुसूची' (Variable Interval Schedule) के तहत पुनर्बलन एक अनिश्चित और बदलते समय अंतराल के बाद दिया जाता है (जैसे कभी 2 मिनट बाद, कभी 7 मिनट बाद, कभी 4 मिनट बाद)। चूँकि अधिगमकर्ता को यह ज्ञात नहीं होता कि अगला पुनर्बलन कब मिलेगा, इसलिए वह एक स्थिर और निरंतर मध्यम गति से अनुक्रिया करता रहता है। इस अनुसूची की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि यह विलुप्तिकरण (Extinction) के प्रति सबसे अधिक प्रतिरोध (Resistance) उत्पन्न करती है, अर्थात पुनर्बलन बंद होने के बाद भी यह व्यवहार काफी लंबे समय तक बना रहता है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage - लगभग 11 से 15 वर्ष या उससे आगे) के दौरान उभरने वाली 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्कणा' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'संयोजकता विचार' (Combinatorial Thinking) की अवधारणाओं—जिनके तहत किशोर मूर्त वस्तुओं की सीमाओं से परे जाकर अमूर्त प्रस्तावनाओं (Abstract Propositions), तार्किक विकल्पों के व्यवस्थित संयोजनों और वैज्ञानिक पद्धति के आधार पर समस्याओं के समाधान की क्षमता विकसित करते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय आलोचनात्मक चिंतन, अमूर्त संकल्पनाओं के विश्लेषण, और बौद्धिक स्वायत्तता के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, नॉर्मन मंटगोमेरी मास्टर्स (Norman G. Milgram) अथवा सामान्यतः शैक्षणिक मनोविज्ञान में प्रयुक्त **'मास्टर लर्निंग मॉडल या प्रवीणता अधिगम मॉडल' (Mastery Learning Model)**—जिसे बेंजामिन ब्लूम (Benjamin Bloom) द्वारा अत्यधिक लोकप्रिय बनाया गया—के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'निदानात्मक-उपचारात्मक शिक्षण चक्र या डायग्नोस्टिक-रेमेडियल टीचिंग साइकिल'**—जिसे उस सुव्यवस्थित शैक्षणिक प्रक्रिया के रूप रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षक विद्यार्थियों की लघु-स्तरीय फॉर्मेटिव परीक्षाओं (Formative Assessments) के माध्यम से उनके विशिष्ट अधिगम अंतरालों (Learning Gaps) और त्रुटियों का वैज्ञानिक निदान (Diagnosis) करता है और तदुपरांत उन्हें पूरक शिक्षण सामग्रियां, सुधारात्मक रणनीतियाँ (Corrective Strategies) एवं पर्याप्त अतिरिक्त समय प्रदान करके प्रत्येक विद्यार्थी को विषयवस्तु में न्यूनतम 80% से 90% तक की 'प्रवीणता' (Mastery) प्राप्त करने का अवसर देता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के व्यक्तिगत भिन्नताओं के समाधान, सुदृढ़ीकरण और अकादमिक सफलता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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