BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

MPTET
17 views

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा' (Progressive Education) और 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित 'चिंतनशील चिंतन' (Reflective Thinking) के पांच चरणों तथा कक्षा-कक्ष में 'समस्या समाधान' (Problem Solving) पद्धति के व्यावहारिक अनुप्रयोग के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

जॉन डीवी (John Dewey) ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'How We Think' (1910) में 'चिंतनशील चिंतन' (Reflective Thinking) के पांच स्पष्ट चरण बताए हैं: (1) कठिनाई की अनुभूति (A felt difficulty), (2) कठिनाई का स्थान निर्धारण और उसका बौद्धिकीकरण (Location and definition of the difficulty), (3) संभावित समाधान या परिकल्पनाओं का सुझाव (Suggestions of possible solutions), (4) परिकल्पनाओं के तार्किक परिणामों का विकास (Development by reasoning of the bearings of the suggestion), और (5) परिकल्पना का प्रायोगिक परीक्षण व सत्यापन (Further observation and experiment leading to acceptance or rejection). प्रगतिशील शिक्षा और 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत के तहत यह प्रक्रिया विद्यार्थियों को समस्या-समाधानक (Problem Solvers) बनाती है और उन्हें वास्तविक जीवन की चुनौतियों से निपटने के लिए सक्षम करती है। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है।
Share:

Related Questions

→ मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत उत्तर-पारंपरिक नैतिकता स्तर (Post-Conventional Morality) के दूसरे चरण—अर्थात् 'सार्वभौमिक नैतिक अंतरात्मा का अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation / Stage 6)—की अवधारणा, जिसके तहत व्यक्ति किसी बाहरी सामाजिक दबाव, कानून या दंड के भय से परे जाकर अपने स्व-चयित आंतरिक सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों (जैसे न्याय, मानवाधिकार, समानता और मानवीय गरिमा) के आधार पर सही या गलत का निर्णय लेता है, भले ही वे नियम सामाजिक कानूनों के विपरीत क्यों न हों—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय नैतिक विवेक, तार्किक स्वायत्तता और मूल्य-आधारित चरित्र निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत' (Socio-Cultural Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD)**—जिसे उस वास्तविक विकासात्मक स्तर (जो स्वतंत्र समस्या-समाधान द्वारा निर्धारित होता है) और संभावित विकासात्मक स्तर (जो वयस्क मार्गदर्शन या अधिक सक्षम सहकर्मी के सहयोग से समस्या-समाधान द्वारा निर्धारित होता है) के बीच के अंतराल के रूप में परिभाषित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सहयोगात्मक अधिगम, संज्ञानात्मक विस्तार और मध्यस्थता (Mediation) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, चार्ल्स स्पीयरमैन (Charles Spearman) के 'बुद्धि के द्वicar कारक सिद्धांत' (Two-Factor Theory of Intelligence) के अंतर्गत प्रतिपादित सामान्य मानसिक योग्यता या 'जी-कारक' (g-factor) और विशिष्ट मानसिक क्षमताओं या 'एस-कारक' (s-factor) की वास्तविक मनोवैज्ञानिक विशेषताओं तथा कक्षा-कक्षीय शिक्षण में संज्ञानात्मक अंतरण (Cognitive Transfer) और विविध विषयों के अधिगम पर इनके सापेक्षिक प्रभाव के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, उर्री ब्रॉन्fenbrenner (Urie Bronfenbrenner) के 'पारिस्थितिकीय प्रणालियों का सिद्धांत' (Ecological Systems Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'माइक्रोसिस्टम या सूक्ष्मतंत्र' (Microsystem)**—जिसे उस सबसे भीतरी और प्रत्यक्ष पर्यावरण परत के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके साथ बालक अपने दैनिक जीवन में आमने-सामने की सीधी अंतःक्रिया करता है (जैसे कि परिवार, विद्यालय, सहपाठी समूह और पास-पड़ोस)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सामाजिक-संवादात्मक विकास, प्रेरणा और व्यक्तिगत अनुभवों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'शेपिंग या आकार देना' (Shaping) की अवधारणा—जिसके तहत किसी जटिल या नए वांछित व्यवहार को प्राप्त करने के लिए क्रमिक सन्निकटन (Successive Approximations) की विधि का उपयोग किया जाता है, जहाँ अंतिम लक्ष्य तक पहुँचने के लिए प्रत्येक छोटे सुधरे हुए कदम या व्यवहारिक घटक को सुदृढ़ीकरण (Reinforcement) प्रदान किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के जटिल कौशल अर्जन, चरणबद्ध व्यवहार संशोधन और सुदृढ़ीकरण अनुसूचियों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.