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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा' (Progressive Education) और 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित 'चिंतनशील चिंतन' (Reflective Thinking) के पांच चरणों तथा कक्षा-कक्ष में 'समस्या समाधान' (Problem Solving) पद्धति के व्यावहारिक अनुप्रयोग के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
जॉन डीवी (John Dewey) ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'How We Think' (1910) में 'चिंतनशील चिंतन' (Reflective Thinking) के पांच स्पष्ट चरण बताए हैं: (1) कठिनाई की अनुभूति (A felt difficulty), (2) कठिनाई का स्थान निर्धारण और उसका बौद्धिकीकरण (Location and definition of the difficulty), (3) संभावित समाधान या परिकल्पनाओं का सुझाव (Suggestions of possible solutions), (4) परिकल्पनाओं के तार्किक परिणामों का विकास (Development by reasoning of the bearings of the suggestion), और (5) परिकल्पना का प्रायोगिक परीक्षण व सत्यापन (Further observation and experiment leading to acceptance or rejection). प्रगतिशील शिक्षा और 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत के तहत यह प्रक्रिया विद्यार्थियों को समस्या-समाधानक (Problem Solvers) बनाती है और उन्हें वास्तविक जीवन की चुनौतियों से निपटने के लिए सक्षम करती है। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'खोज अधिगम सिद्धांत' (Discovery Learning Theory) और संज्ञानात्मक विकास के चरणों के अंतर्गत प्रतिपादित **'प्रतीकात्मक अवस्था' (Symbolic Stage)**—जिसके तहत बच्चा या शिक्षार्थी वस्तुओं या अनुभवों को मानसिक प्रतीकों, भाषा, चिह्नों और अमूर्त कोड के माध्यम से प्रस्तुत और प्रसंस्कृत करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त तार्किक चिंतन, भाषा-मध्यस्थता और उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक संरचनाओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एरिक्सन (Erik Erikson) के 'मनोसामाजिक विकास के सिद्धांत' (Psychosocial Development Theory) के अंतर्गत किशोरावस्था से संबंधित अवस्था 'पहचान बनाम भूमिका संभ्रम' (Identity vs. Role Confusion) तथा प्रारंभिक वयस्कता से संबंधित अवस्था 'अंतरंगता बनाम अलगाव' (Intimacy vs. Isolation) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण व परामर्श प्रक्रियाओं में विद्यार्थियों के 'स्वयं की पहचान' (Self-Identity) के सुदृढ़ीकरण और सामाजिक समायोजन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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