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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड कोल्ब (David Kolb) के 'अनुभवात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के अंतर्गत प्रतिपादित चार चरणों—(1) मूर्त अनुभव (Concrete Experience), (2) विचारशील अवलोकन (Reflective Observation), (3) अमूर्त अवधारणा (Abstract Conceptualization), और (4) सक्रिय प्रयोग (Active Experimentation)—तथा उनके द्वारा वर्णित चार अधिगम शैलियों—'अभिसारी' (Convergent), 'अपसारी' (Divergent), 'आत्मसातकर्ता' (Assimilating), और 'समायोजक' (Accommodating)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में व्यक्तिगत भिन्नताओं को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों की संज्ञानात्मक शैली के विकास के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

डेविड कोल्ब के अनुभवात्मक अधिगम चक्र (Experiential Learning Cycle) के अनुसार, अधिगम एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा अनुभव के परिवर्तन से ज्ञान का सृजन होता है। कोल्ब ने चार अधिगम शैलियों (Learning Styles) का वर्णन किया है। 'अभिसारी' (Convergent) शैली वाले शिक्षार्थी अमूर्त अवधारणाओं (Abstract Conceptualization) और सक्रिय प्रयोग (Active Experimentation) को मिलाते हैं; वे व्यावहारिक समस्याओं के समाधान खोजने और तकनीकी या वैज्ञानिक कार्यों में उत्कृष्ट होते हैं। इसके विपरीत, 'अपसारी' शैली वाले मूर्त अनुभव और विचारशील अवलोकन का प्रयोग करते हैं (जो कल्पना और विचार-मंथन के लिए अच्छी है)। 'आत्मसातकर्ता' अमूर्त अवधारणा और विचारशील अवलोकन का उपयोग करते हैं, जबकि 'समायोजक' मूर्त अनुभव और सक्रिय प्रयोग (जो जोखिम उठाने और नए अनुभवों से सीखने से जुड़ी है) का उपयोग करते हैं। अतः विकल्प 'a' पूर्णतः वैज्ञानिक और सही है।
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