BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

MPTET
1 views

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय मनोवैज्ञानिक अवधारणा—**'नकारात्मक पुनर्बलन' (Negative Reinforcement)**—जिसे उस प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ किसी अवांछित, कष्टदायक या प्रतिकूल उद्दीपक (Aversive Stimulus) को हटाकर या रोककर वांछित अनुक्रिया (Desirable Response) की संभावना या आवृत्ति को बढ़ाया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अनुकूली व्यवहार, तनाव मुक्ति और सकारात्मक आदत निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के बाल विकास और शिक्षाशास्त्र के दृष्टिकोण से, बी. एफ. स्किनर का 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' (Operant Conditioning) अधिगम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत है। इस सिद्धांत में 'नकारात्मक पुनर्बलन' (Negative Reinforcement) को अक्सर 'सजा' (Punishment) के साथ भ्रमित किया जाता है, लेकिन दोनों में मनोवैज्ञानिक रूप से बहुत बड़ा अंतर है। नकारात्मक पुनर्बलन में किसी कष्टदायक या अप्रिय उद्दीपक (जैसे- कक्षा में लगातार शोर होने पर शिक्षक द्वारा अप्रिय नियम को हटाना या गृहकार्य के दबाव से राहत देना) को हटाकर सही या वांछित व्यवहार की संभावना को *बढ़ाया* जाता है, जिससे विद्यार्थी को राहत (Relief) मिलती है और वह उस अनुकूली व्यवहार को दोहराने के लिए प्रेरित होता है। इसके विपरीत, सजा का मुख्य उद्देश्य किसी अवांछित व्यवहार की आवृत्ति को *घटाना* या समाप्त करना होता है। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य मनोवैज्ञानिक कथन है।
Share:

Related Questions

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड कोल्ब (David Kolb) के 'अनुभवात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के अंतर्गत प्रतिपादित चार प्रमुख चरणों—'ठोस अनुभव' (Concrete Experience), 'चिंतनशील अवलोकन' (Reflective Observation), 'मूर्त अवधारणालीकरण' (Abstract Conceptualization), और 'सक्रिय प्रयोग' (Active Experimentation)—के तार्किक अनुक्रम और कक्षा-कक्ष शिक्षण में विद्यार्थियों की संज्ञानात्मक शैलियों (Learning Styles) के समावेशन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, इवान पावलोव (Ivan Pavlov) के 'शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत' (Classical Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'विलोपन और स्वतः पुनरावृत्ति' (Extinction and Spontaneous Recovery)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ अस्वाभाविक उद्दीपक (CS) को बिना स्वाभाविक उद्दीपक (UCS) के बार-बार प्रस्तुत करने पर अनुक्रिया (CR) धीरे-धीरे क्षीण होकर समाप्त हो जाती है, परंतु कुछ समय का अंतराल देने के बाद अचानक वही अनुक्रिया बिना किसी नए प्रशिक्षण के पुनः प्रकट हो जाती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आदत संशोधन, पुरानी दुर्भावनाओं या भय के निवारण और अधिगम के स्थायित्व के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के 'मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत' (Psychoanalytic Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'व्यक्तित्व की संरचना' (Structure of Personality) में 'अहं रक्षा तंत्र' (Ego Defense Mechanisms) के एक विशिष्ट प्रकार के रूप में वर्णित 'तर्कसंगतीकरण' (Rationalization) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्ति अपनी असफलताओं, अस्वीकार्य व्यवहारों या अनैतिक इच्छाओं को समाज-स्वीकार्य और तार्किक कारणों से ढंकने का प्रयास करता है ताकि वह अपनी आत्म-छवि (Self-Image) और आत्म-सम्मान को मानसिक आघात से बचा सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के रक्षात्मक व्यवहार, मानसिक समायोजन, और तनाव प्रबंधन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'अर्थपूर्ण मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित **'अग्रिम संगठन' (Advance Organizer)** की अवधारणा—जिसके तहत किसी नए और जटिल विषय को पढ़ाने से पहले विद्यार्थियों के सामने उच्च-स्तर के, सारांश रूप में और अधिक व्यापक समावेशी परिचयात्मक सामग्रियां प्रस्तुत की जाती हैं, ताकि शिक्षार्थी अपने संज्ञानात्मक ढांचे में पहले से मौजूद प्रासंगिक पूर्व-ज्ञान (Anchor Ideas) के साथ नए ज्ञान को तार्किक रूप से जोड़ सकें—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्कीमा के सुदृढ़ीकरण, तार्किक अवबोध और दीर्घकालिक अर्थपूर्ण अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'संबधवाद के सिद्धांत' (Connectionism Theory / Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness) की अवधारणा—जिसके तहत जब कोई तंत्रिका मार्ग (Neural Pathway) कार्य करने के लिए पूरी तरह तत्पर होता है और उसे कार्य करने दिया जाता है, तो उसे संतोष मिलता है तथा वह क्रिया आनंददायक और स्थायी बनती है, जबकि तत्परता के बिना बलपूर्वक कार्य कराने पर झुंझलाहट या असंतोष उत्पन्न होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की मानसिक तैयारी, अभिप्रेरणात्मक संरेखण और अधिगम के पठार (Plateau of Learning) को दूर करने के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.