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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'सकारात्मक पुनर्बलन' (Positive Reinforcement), 'नकारात्मक पुनर्बलन' (Negative Reinforcement), 'प्राथमिक एवं गौण पुनर्बलक' (Primary and Secondary Reinforcers) तथा 'पुनर्बलन अनुसूचियों' (Schedules of Reinforcement - जैसे निश्चित अंतराल, परिवर्तनशील अनुपात आदि) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में वांछित व्यवहारों के shaping (रूप देने) और अधिगम की निरंतरता के विकास के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

व्याख्या: बी. एफ. स्किनर के क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत (Operant Conditioning) के अनुसार, पुनर्बलन अनुसूचियाँ (Schedules of Reinforcement) अधिगम की गति और उसके स्थायित्व को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। 'परिवर्तनशील अनुपात अनुसूची' (Variable Ratio Schedule - जिसमें अनिश्चित संख्या में अनुक्रियाओं के बाद पुनर्बलन दिया जाता है) जुआ खेलने की मशीन की तरह कार्य करती है और यह विलोपन (Extinction) के प्रति सबसे अधिक प्रतिरोधी होती है, जिससे कक्षा में विद्यार्थियों द्वारा लगातार उच्च दर पर वांछित अनुक्रियाएँ प्राप्त की जा सकती हैं। विकल्प (a) गलत है क्योंकि नकारात्मक पुनर्बलन अवांछित उद्दीपक को हटाकर वांछित व्यवहार को बढ़ाता है, जबकि सजा व्यवहार को घटाती है। विकल्प (c) गलत है क्योंकि शिक्षा में प्रशंसा, ग्रेड जैसे गौण पुनर्बलक अधिक महत्वपूर्ण हैं। विकल्प (d) गलत है क्योंकि Shaping का उपयोग जटिल मानवीय व्यवहारों के शिक्षण में व्यापक रूप से किया जाता है।
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