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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत' (Socio-Cultural Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) तथा 'मचान या पाटन' (Scaffolding) की अवधारणा के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सहयोगात्मक समस्या-समाधान, सांस्कृतिक उपकरणों के आंतरिककरण (Internalization) और उच्च मानसिक प्रक्रियाओं के वैज्ञानिक विकास के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत (Socio-Cultural Theory) के अनुसार, 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (ZPD) वह अंतराल है जो एक बच्चे द्वारा स्वतंत्र रूप से किए जाने वाले कार्य और किसी वयस्क या अधिक सक्षम साथी (More Knowledgeable Other - MKO) के मार्गदर्शन में किए जाने वाले कार्य के बीच होता है। 'मचान' (Scaffolding) इसी ZPD के भीतर दी जाने वाली वह अस्थायी सहायता है, जिसे बच्चा जैसे-जैसे कौशल सीखता जाता है, वैसे-वैसे शिक्षक या MKO द्वारा धीरे-धीरे कम कर दिया जाता है। विकल्प 'b' इस अवधारणा के वैज्ञानिक और शैक्षणिक निहितार्थ को पूर्णतः सटीक रूप से परिभाषित करता है।
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→ मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रिचर्ड एटकिंसन (Richard Atkinson) और रिचर्ड शिफरिन (Richard Shiffrin) के 'सूचना प्रसंस्करण मॉडल' (Information Processing Model) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'संवेदी स्मृति या सेंसरी मेमोरी' (Sensory Memory)**—जिसे उस प्रारंभिक और अति-अल्पकालिक मानसिक भंडार के रूप में परिभाषित किया जाता है जो पर्यावरण से प्राप्त होने वाली समस्त दृश्य, श्रव्य और अन्य संवेदी सूचनाओं को बिना किसी दीर्घकालिक प्रसंस्करण के अत्यंत सूक्ष्म समय (मिलीसेकंड से लेकर कुछ सेकंड तक) के लिए यथार्थ रूप में ग्रहण और सुरक्षित रखता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के ध्यान (Attention), धारणा और चयनात्मक प्रसंस्करण (Selective Processing) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लेव वायगोत्스키 (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत' (Socio-Cultural Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) तथा 'मचान या पाटन' (Scaffolding) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सहयोगात्मक समस्या-समाधान (Collaborative Problem Solving), आंतरिक भाषा (Inner Speech) के विकास, और सांस्कृतिक रूप से मध्यस्थ संज्ञानात्मक उपकरणों (Culturally Mediated Cognitive Tools) के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Humanistic Theory of Needs) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकीकरण' (Self-Actualization)**—जिसे उस सर्वोच्च मनोवैज्ञानिक आवश्यकता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति अपनी संपूर्ण आंतरिक क्षमताओं, अद्वितीय योग्यताओं, सर्जनात्मक संभावनाओं और व्यक्तिगत विकास की चरम सीमा को प्राप्त करने के लिए अभिप्रेरित होता है, और यह स्तर तभी प्राप्त होता है जब उसकी सभी आधारभूत आवश्यकताएँ (जैसे शारीरिक, सुरक्षा, अपनेपन और सम्मान की आवश्यकताएँ) संतोषजनक रूप से पूरी हो चुकी होती हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के समग्र विकास, आंतरिक प्रेरणा और उच्च-स्तरीय शैक्षणिक उपलब्धियों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Cognitive Development Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'संरक्षण या कंजर्वेशन' (Conservation)**—जिसे उस तार्किक मानसिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बच्चा यह समझ पाता है कि किसी वस्तु के भौतिक स्वरूप, आकार, रूप-रंग या दिखावे में परिवर्तन होने के बावजूद उसकी मात्रा, द्रव्यमान, आयतन या संख्या अपरिवर्तित (Constant) रहती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के मूर्त संक्रियात्मक चिंतन, विकेंद्रीकरण (Decentration) और तार्किक ज्ञान निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, नॉर्मन मंटेल और जेरोम ब्रूनर द्वारा समर्थित तथा संज्ञानात्मक मनोविज्ञान में केंद्रीय महत्व रखने वाले 'स्क্যাफोल्डिंग या पाटन' (Scaffolding) की अवधारणा से थोड़ा आगे बढ़कर, जॉन फ्लेवेल (John Flavell) द्वारा प्रतिपादित 'अधिज्ञानात्मकता या मेटाकॉग्निशन' (Metacognition) के अंतर्गत आने वाले घटक 'अधिज्ञानात्मक ज्ञान' (Metacognitive Knowledge - जिसमें व्यक्ति की अपनी संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं के बारे में जागरूकता, कार्य संबंधी ज्ञान और रणनीतिक ज्ञान शामिल है) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-नियमित अधिगम (Self-Regulated Learning), संज्ञानात्मक निगरानी (Cognitive Monitoring) और आलोचनात्मक चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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