त्वरित लिंक्स
MPTET
1 views
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित तीन प्रतिनिधित्व स्वरूपों—(1) क्रियात्मक प्रतिनिधित्व (Enactive Representation), (2) दृश्य-प्रतिबिम्बात्मक प्रतिनिधित्व (Iconic Representation), और (3) संकेतात्मक प्रतिनिधित्व (Symbolic Representation)—तथा 'खोजपूर्ण अधिगम' (Discovery Learning) और 'स्पाइरल पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum) की अवधारणा के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की संवादात्मक संरचनाओं, अमूर्त विचारों के भाषागत रूपांतरण और जटिल अवधारणाओं के क्रमिक पुनर्दर्शन के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जेरोम ब्रूनर के संज्ञानात्मक विकास और शिक्षण सिद्धांत के अनुसार, 'स्पाइरल पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum) का मुख्य आधार यह है कि विषय-वस्तु को विद्यार्थी की विकासात्मक अवस्था के अनुकूल सरल से जटिल रूपों में बार-बार प्रस्तुत किया जाए (revisited)، ताकि वे प्रत्येक चक्र में अधिक परिपक्वता के साथ ज्ञान का निर्माण कर सकें। ब्रूनर का मानना था कि किसी भी विषय को किसी भी उम्र के बच्चे को बौद्धिक रूप से ईमानदार तरीके से सिखाया जा सकता है। अन्य विकल्प वैज्ञानिक रूप से भ्रामक या असत्य हैं क्योंकि ब्रूनर खोजपूर्ण अधिगम में भी संरचनाबद्ध मार्गदर्शन को महत्वपूर्ण मानते हैं।
Related Questions
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रॉबर्ट गैग्नी (Robert Gagne) के 'अधिगम के पदानुक्रम सिद्धांत' (Conditions of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित 'समस्या समाधान अधिगम' (Problem Solving Learning) की सर्वोच्च अवस्था—जिसके तहत शिक्षार्थी अपने पूर्व-अर्जित नियमों, सिद्धांतों और कौशलों का उपयोग करते हुए एक ऐसी नवीन और जटिल मानसिक परिस्थिति का सफलतापूर्वक सामना करता है जहाँ उसे चिंतन, तार्किकता और अंतर्दृष्टि के माध्यम से नए समाधान या नियम का आविष्कार करना होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक प्रसंस्करण, सृजनात्मकता और स्वतंत्र ज्ञान-निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी उपागम' (Humanistic Approach to Education) के अंतर्गत प्रतिपादित **'सुगमकर्ता के रूप में शिक्षक' (Teacher as a Facilitator)** और **'स्वायत्त अनुभवात्मक अधिगम' (Experiential Learning)** की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षक ज्ञान का एक सत्तावादी प्रेषक न बनकर एक ऐसा सहायक या सुगमकर्ता होता है जो कक्षा में एक मनोवैज्ञानिक रूप से सुरक्षित, गैर-न्यायसंगत और सहानुभूतिपूर्ण वातावरण (Empathetic Environment) का निर्माण करता है, ताकि शिक्षार्थी अपनी आंतरिक प्रेरणा और आत्म-बोध के आधार पर स्वयं अपने अनुभवों से सार्थक ज्ञान का अर्जन कर सकें—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-निर्देशित अधिगम (Self-Directed Learning), संवेगात्मक स्वतंत्रता और सकारात्मक आत्म-संकल्पना (Positive Self-Concept) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) के 'संबद्धतावाद या प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Connectionism / Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'प्रभाव का नियम' (Law of Effect)**—जिसे उस मूल मनोवैज्ञानिक नियम के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अनुसार किसी अनुक्रिया के बाद यदि संतोषजनक या सुखद परिणाम (Satisfying State of Affairs) प्राप्त होता है, तो उस उद्दीपक-अनुक्रिया (S-R) बंधन या साहचर्य की ताकत बढ़ जाती है, और यदि असंतोषजनक या कष्टदायक परिणाम मिलता है, तो वह बंधन कमजोर हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सुदृढ़ीकरण, प्रेरणा (Motivation) और अधिगम की प्रभावशीलता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित तीन प्रतिनिधित्व प्रणालियों में से एक—'प्रतिबिम्बात्मक प्रतिनिधित्व' (Iconic Representation)—की अवधारणा, जिसके तहत शिक्षार्थी दुनिया को मानसिक छवियों, दृश्यों, आरेखों और संवेगात्मक प्रतीकों के माध्यम से समझता और प्रस्तुत करता है (जो संक्रियात्मक अवस्था और प्रतीकात्मक अवस्था के बीच की कड़ी होती है), के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के दृश्य-श्रव्य संज्ञान, स्थानिक बुद्धिमत्ता (Spatial Intelligence), और अवधारणात्मक प्रतिरूपण के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी प्रेरणा के पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'कमी की आवश्यकताएं' (Deficiency Needs / D-needs) तथा 'विकास की आवश्यकताएं' (Growth Needs / B-needs)—विशेष रूप से 'आत्म-सिद्धि' (Self-Actualization) और 'सौंदर्यपरक आवश्यकताएं' (Aesthetic Needs)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की अंतर्निहित क्षमताओं के पूर्ण विकास, सुरक्षा एवं अपनेपन की अनुभूतियों के संतुलन, और सार्थक संज्ञानात्मक अन्वेषण के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.