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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, पॉल टोरेन्स (E. Paul Torrance) के 'सृजनात्मक चिंतन के सिद्धांत' (Torrance Tests of Creative Thinking - TTCT) के अंतर्गत प्रतिपादित चार प्रमुख घटकों—(1) प्रवाह (Fluency), (2) लचीलापन (Flexibility), (3) मौलिकता (Originality), और (4) विस्तारण (Elaboration)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अपसारी चिंतन (Divergent Thinking), समस्या-समाधान क्षमताओं, और मौलिक विचारोत्पादक कौशलों के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
पॉल टोरेन्स (E. Paul Torrance) के सृजनात्मक चिंतन के सिद्धांत के अनुसार, 'प्रवाह' (Fluency) एक निश्चित समय में अधिक से अधिक विचार उत्पन्न करने की क्षमता है, 'लचीलापन' (Flexibility) विचारों या दृष्टिकोणों में विविधता को दर्शाता है, 'मौलिकता' (Originality) अनूठे और असाधारण विचारों को व्यक्त करती है, तथा 'विस्तारण' (Elaboration) किसी विचार या वस्तु में विस्तार से विवरण जोड़ने की क्षमता को प्रदर्शित करता है। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में इन चारों घटकों का वैज्ञानिक प्रबंधन विद्यार्थियों में अपसारी चिंतन को मजबूत करता है और उन्हें रूढ़िवादी व पारंपरिक सोच से परे जाकर नए दृष्टिकोणों के साथ समस्याओं का समाधान करने में सक्षम बनाता है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोजपूर्ण अधिगम सिद्धांत' (Discovery Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'स्पाइरल पाठ्यक्रम या सर्पिलाकार पाठ्यचर्या' (Spiral Curriculum)**—जिसे उस उत्कृष्ट शैक्षणिक संरचना के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत किसी भी विषय या जटिल अवधारणा को बच्चे की प्रारंभिक विकासात्मक अवस्था में उसके स्तर के अनुकूल सरल और सहज रूप में (जैसे क्रियात्मक या प्रतीकात्मक रूप से) प्रस्तुत किया जाता है, और जैसे-जैसे शिक्षार्थी की आयु, परिपक्वता और संज्ञानात्मक क्षमता बढ़ती जाती है, उसी विषय को क्रमिक रूप से अधिक उन्नत, अमूर्त और जटिल स्तर पर बार-बार पुनरावृत्ति के साथ पढ़ाया जाता है ताकि पूर्व-ज्ञान का विस्तार हो सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संचित ज्ञान-निर्माण, दीर्घकालिक स्मरण और वैचारिक गहराई के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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