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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा' (Progressive Education) तथा 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित 'चिंतनशील चिंतन' (Reflective Thinking) के पाँच चरणों—(1) सुझाव (Suggestion), (2) बौद्धिकरण (Intellectualization), (3) परिकल्पना (Hypothesis), (4) तर्क (Reasoning), और (5) परीक्षण (Testing)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की वैज्ञानिक जिज्ञासा, अनुभवात्मक समस्या-समाधान, और लोकतांत्रिक मूल्यों के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
जॉन डीवी (John Dewey) का 'चिंतनशील चिंतन' (Reflective Thinking) और 'प्रगतिशील शिक्षा' (Progressive Education) का सिद्धांत इस बात पर जोर देता है कि शिक्षा जीवन की तैयारी नहीं, बल्कि स्वयं जीवन है। उनके अनुसार, 'करके सीखना' (Learning by Doing) और वैज्ञानिक पद्धति के पाँच चरण (सुझाव, बौद्धिकरण, परिकल्पना, तर्क और परीक्षण) विद्यार्थियों को निष्क्रिय श्रोता से निकालकर सक्रिय अन्वेषक बनाते हैं। यह प्रक्रिया विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं का सामना करने, तार्किक परिकल्पनाएँ गढ़ने और उनके प्रायोगिक परीक्षण द्वारा ज्ञान का स्वतः निर्माण करने में सक्षम बनाती है, जो कि MPTET बाल विकास पाठ्यक्रम का एक अति महत्त्वपूर्ण और व्यावहारिक आयाम है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अग्रिम संगठक' (Advance Organizer) की अवधारणा—जिसके तहत किसी नई और जटिल विषय-संरचना को प्रस्तुत करने से पहले छात्रों के मौजूदा संज्ञानात्मक ढांचे (Cognitive Structure) में पहले से मौजूद प्रासंगिक विचारों और संप्रत्ययों के साथ नए ज्ञान को प्रभावी रूप से जोड़ने के लिए एक उच्च-स्तरीय, अमूर्त परिचयात्मक सामग्री या वैचारिक ढांचा प्रदान किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के पूर्व-ज्ञान के सक्रियीकरण, स्कीमा (Schema) के निर्माण और दीर्घकालिक सार्थक ज्ञानार्जन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लेविंसन (Daniel Levinson) के 'वयस्क विकास के मनोसामाजिक सिद्धांत' (Psychosocial Theory of Adult Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'मध्य-वयस्कता के संक्रमण' (Mid-Life Transition) तथा 'वयस्क जीवन की संरचना' (Adult Life Structure) की अवधारणाओं के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय तथा वयस्क शिक्षा (Adult Education) के संदर्भ में शिक्षकों के 'व्यावसायिक जीवन चक्र' (Professional Life Cycle) और 'बर्नआउट' (Burnout) के प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडविन गुथरी (Edwin Guthrie) के 'समीप्यता का अधिगम सिद्धांत' (Contiguity Theory of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'एकल-प्रयास अधिगम' (One-Trial Learning)**—जिसे उस मूल मनोवैज्ञानिक नियम के रूप में परिभाषित किया जाता है जो यह स्पष्ट करता है कि किसी उद्दीपक (Stimulus) और अनुक्रिया (Response) के बीच का साहचर्य अपनी पहली ही बार में पूर्ण शक्ति प्राप्त कर लेता है यदि उनके बीच की समय और स्थान की निकटता (Contiguity) सटीक हो, और पुनरावृत्ति (Repetition) केवल आदतों की संख्या बढ़ाती है न कि साहचर्य की ताकत को—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आदत निर्माण, त्रुटि निवारण और तात्कालिक अनुक्रिया संधारण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धिमत्ता सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय मानसिक क्षमता—**'अंतरा-वैयक्तिक बुद्धिमत्ता' (Intrapersonal Intelligence)**—जिसे स्वयं की भावनाओं, प्रेरणाओं, आंतरिक अवस्थाओं, शक्तियों, सीमाओं और कमजोरियों को गहराई से समझने, उनका सटीक मूल्यांकन करने और तदनुसार अपने व्यवहार को विनियमित व निर्देशित करने की क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-नियमन (Self-regulation), आत्म-प्रतिबिंबन (Self-reflection) और metacognitive विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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