BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

MPTET
1 views

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'आत्म-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्ति का यह आंतरिक विश्वास होता है कि वह किसी विशिष्ट परिस्थिति में वांछित परिणामों को प्राप्त करने के लिए अपनी संज्ञानात्मक, व्यवहारात्मक और संवेगात्मक क्षमताओं का सफलतापूर्वक संचालन और उपयोग कर सकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लक्ष्य-निर्धारण, दृढ़ता, आंतरिक अभिप्रेरणा और अकादमिक प्रदर्शन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

अल्बर्ट बंडूरा के सामाजिक अधिगम (तथा सामाजिक-संज्ञानात्मक) सिद्धांत में 'आत्म-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) एक केंद्रीय संप्रत्यय है। इसका तात्पर्य किसी व्यक्ति के इस विश्वास से है कि वह किसी विशिष्ट कार्य को पूरा करने में सक्षम है। उच्च आत्म-प्रभावकारिता वाले छात्र चुनौतीपूर्ण कार्यों से पलायन करने के बजाय उन्हें स्वीकार करते हैं, असफलताओं पर तुरंत निराश होने के बजाय रणनीतियों में सुधार करते हैं और अधिक दृढ़ता दिखाते हैं। विकल्प (a) इस मनोवैज्ञानिक अवधारणा के वैज्ञानिक प्रभाव को सटीक रूप से परिभाषित करता है, जबकि अन्य विकल्प तथ्यात्मक रूप से गलत या भ्रामक हैं।
Share:

Related Questions

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड टॉलमैन (Edward Tolman) के 'चिह्न अधिगम सिद्धांत' (Sign Learning Theory / Purposive Behaviorism) के अंतर्गत प्रतिपादित 'संज्ञानात्मक मानचित्र' (Cognitive Map) की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी अपने पर्यावरण और अंतरिक्षीय व्यवस्था (Spatial Layout) का एक आंतरिक मानसिक प्रतिनिधित्व या नक्शा तैयार करता है, जिससे वह किसी गंतव्य तक पहुँचने के लिए केवल रटी-रटाई आदतों या यांत्रिक उद्दीपक-अनुक्रिया बंधनों पर निर्भर रहने के बजाय पर्यावरण में आए परिवर्तनों के बावजूद लचीले और वैकल्पिक मार्गों का चयन करने में सक्षम होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्थानिक बुद्धिमत्ता, प्रासंगिक समस्या-समाधान और स्व-निर्देशित अन्वेषण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत' (Socio-Cultural Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'निजी भाषण' (Private Speech) की अवधारणा—जिसके तहत बच्चे अपने कार्यों को निर्देशित करने, अपनी सोच को विनियमित करने और जटिल समस्याओं को हल करते समय ऊंचे स्वर में खुद से बातचीत करते हैं, जो बाद में आंतरिक भाषण (Inner Speech) में परिवर्तित हो जाती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-नियमन (Self-Regulation), संज्ञानात्मक नियंत्रण और कार्यकारी कार्यों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्रकृतिवादी बुद्धि' (Naturalistic Intelligence) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्तियों में प्राकृतिक दुनिया (वनस्पति, जीव-जंतु, पारिस्थितिकी तंत्र, मौसम चक्र और पर्यावरण के विभिन्न घटकों) को सूक्ष्मता से पहचानने, वर्गीकृत करने, उनका अध्ययन करने और उनके साथ सफलतापूर्वक तालमेल बिठाने की उच्च क्षमता पाई जाती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अनुभवात्मक अधिगम, पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता और क्षेत्र-आधारित अन्वेषण (Field-based Exploration) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Cognitive Development Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित तीन निरूपण प्रणालियों—(1) क्रियात्मक निरूपण (Enactive Representation), (2) दृश्य/प्रतिबिम्बात्मक निरूपण (Iconic Representation), और (3) प्रतीकात्मक निरूपण (Symbolic Representation)—तथा उनके 'खोज अधिगम' (Discovery Learning) एवं 'सर्पिलाकार पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum) की अवधारणा के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त संप्रेषण, तार्किक चिन्तन और ज्ञान की संरचना (Scaffolding के माध्यम से) के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) अथवा 'सामाजिक संज्ञानात्मक सिद्धांत' के अंतर्गत प्रतिपादित **'पारस्परिक निर्धारणवाद' (Reciprocal Determinism)** की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्तिगत कारक (संज्ञानात्मक, जैविक और भावनात्मक), व्यवहार (Behavior), और पर्यावरणीय प्रभाव (Environment) तीनों निरंतर एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं और त्रिकोणीय रूप से अंतःक्रिया करते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-नियमन (Self-Regulation), विकासात्मक लचीलेपन और एजेंसी (Human Agency) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.