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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, पाउलाव (Ivan Pavlov) के 'शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत' (Classical Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'विलोपन' (Extinction) और 'स्वतः पुनःप्राप्ति' (Spontaneous Recovery) की अवधारणा—जिसके तहत जब किसी अनुबंधित उद्दीपन (CS) को बार-बार बिना स्वाभाविक उद्दीपन (UCS) के प्रस्तुत किया जाता है, तो अनुबंधित अनुक्रिया (CR) धीरे-धीरे कमजोर होकर समाप्त हो जाती है (विलोपन), किंतु कुछ समय के अंतराल के बाद बिना किसी पुनः प्रशिक्षण के अचानक वही अनुक्रिया दोबारा प्रकट हो जाती है (स्वतः पुनःप्राप्ति)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अवांछित व्यवहारों के संशोधन, आदत निर्माण और अधिगम प्रतिमान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के बाल विकास और शिक्षण शास्त्र पाठ्यक्रम के अनुसार, इवान पावलाव के शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning) में 'विलोपन' (Extinction) का अर्थ अनुबंधित अनुक्रिया का क्षीण होना है, किंतु 'स्वतः पुनःप्राप्ति' (Spontaneous Recovery) यह सिद्ध करती है कि अनुबंधन का पूर्ण विनाश नहीं होता, बल्कि तंत्रिका तंत्र में पुराना एस-आर (S-R) बंध संदमित (Inhibited) अवस्था में रहता है जो समय बीतने पर पुनः प्रकट हो सकता है। यह शिक्षकों को यह समझने में मदद करता है कि बच्चों के अवांछित व्यवहारों को केवल एक बार के विलोपन से हमेशा के लिए समाप्त नहीं माना जा सकता, बल्कि सतत सुदृढ़ीकरण और सकारात्मक वातावरण की आवश्यकता होती है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'आत्म-सिद्धि की आवश्यकता' (Need for Self-Actualization) और 'सम्मान की आवश्यकता' (Esteem Needs) के तार्किक स्वरूप, उनके क्रमिक विकास तथा कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की आंतरिक अभिप्रेरणा (Intrinsic Motivation) को सुदृढ़ करने के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी प्रेरणा सिद्धांत या आवश्यकताओं का पदानुक्रम' (Hierarchy of Needs) के अंतर्गत प्रतिपादित 'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकीकरण' (Self-Actualization) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्ति अपनी पूर्ण क्षमताओं, सृजनात्मक संभावनाओं, आंतरिक प्रतिभाओं और व्यक्तिगत विकास के सर्वोच्च शिखर को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रेरित रहता है, बशर्ते उसकी शारीरिक, सुरक्षा, अपनेपन और सम्मान संबंधी निम्न-स्तरीय आवश्यकताएं पूरी हो चुकी हों—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास, रचनात्मकता और आंतरिक अभिप्रेरणा के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियापूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'शेपिंग' (Shaping / आकृति-निर्माण) या 'सन्निकट सन्निकटन का क्रमिक उपागम' (Successive Approximation Method) की अवधारणा—जिसके तहत किसी जटिल, नए या अवांछित रूप से अनुपस्थित वांछित व्यवहार को सीधे प्राप्त करने के बजाय, उस अंतिम लक्ष्य की ओर बढ़ने वाले छोटे-छोटे और क्रमिक चरणों (Steps) या व्यवहारों को सुदृढ़ीकरण (Reinforcement) प्रदान करके धीरे-धीरे ढाला जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के नए व्यावहारिक कौशल के अर्जन, चरणबद्ध प्रगति, और जटिल आदतों के वैज्ञानिक निर्माण के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी उपागम' (Humanistic Approach) तथा 'अनुभवात्मक अधिगम' (Experiential Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित 'पूर्णतया कार्यशील व्यक्ति' (Fully Functioning Person) एवं 'सार्थक छात्र-केंद्रित शिक्षण' की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी की आंतरिक प्रेरणा (Intrinsic Motivation), आत्म-स्वीकृति और व्यक्तिगत विकास को प्राथमिकता दी जाती है तथा शिक्षक एक 'सुगमकर्ता' (Facilitator) की भूमिका निभाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संवेगात्मक स्वास्थ्य, स्वायत्तता और समग्र व्यक्तित्व विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) के 'संबंधवाद और प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Connectionism and Trial & Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness) की अवधारणा—जिसके तहत किसी कार्य को सीखने के लिए तंत्रिका तंत्र (Nervous System) की आंतरिक तत्परता या मानसिक तैयारी को रेखांकित किया जाता है, यानी जब कोई व्यक्ति सीखने के लिए मानसिक रूप से तैयार होता है, तो उसे कार्य करने में संतोष (Satisfaction) मिलता है और यदि वह तैयार नहीं है और उसे बलपूर्वक सिखाया जाता है, तो उसे झुंझलाहट या असंतोष (Annoyance) होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की प्रेरणा, परिपक्वता और अधिगम वक्र के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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