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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित **'अंशकालिक या आंतरायिक सुदृढीकरण अनुसूचियां' (Intermittent / Partial Reinforcement Schedules)** की अवधारणा—जिसके तहत प्रत्येक सही अनुक्रिया पर पुरस्कार देने के बजाय एक निश्चित या अनिश्चित समय अंतराल (Interval) या अनुक्रियाओं की संख्या (Ratio) के बाद सुदृढीकरण प्रदान किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अधिगम स्थायित्व, विलुप्तिकरण (Extinction) के प्रतिरोध और दीर्घकालिक प्रेरणा के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र पाठ्यक्रम के अनुसार, स्किनर के क्रियाप्रसूत अनुबंधन में आंतरायिक या अंशकालिक सुदृढीकरण (Intermittent Reinforcement) का विशेष महत्व है। जब किसी अनुक्रिया को हर बार पुरस्कृत (Continuous Reinforcement) न करके बीच-बीच में (कभी-कभी) सुदृढ़ किया जाता है, तो शिक्षार्थी को यह निश्चित रूप से पता नहीं होता कि अगला पुरस्कार कब मिलेगा। इसके परिणामस्वरूप, अधिगम का स्थायित्व बहुत बढ़ जाता है और वह व्यवहार विलोपन (Extinction) के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी (Resistant to extinction) हो जाता है। विशेष रूप से 'परिवर्तनशील अनुपात अनुसूची' (Variable Ratio Schedule) जुआ और लॉटरी की तरह सबसे अधिक स्थिर अनुक्रिया दर प्रदान करती है। अतः विकल्प (ए) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य कथन है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'संबंधवाद या प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness) की अवधारणा—जिसके तहत जब कोई तंत्रिका मार्ग (Neural Pathway) कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार होता है और उसे ऐसा करने दिया जाता है, तो उसे संतोष (Satisfaction) प्राप्त होता है तथा जब वह तैयार नहीं होता और उसे विवश किया जाता है, तो झुंझलाहट या असंतोष उत्पन्न होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा स्तर, अधिगम की तत्परता और मानसिक स्वास्थ्य के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी अभिप्रेरणा सिद्धांत' या 'आवश्यकताओं के पदानुक्रम' (Hierarchy of Needs) के अंतर्गत प्रतिपादित सर्वोच्च और अंतिम मनोवैज्ञानिक अवस्था—**'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकीकरण' (Self-Actualization)**—जिसे उस अद्वितीय मानसिक और व्यक्तिगत स्थिति के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ व्यक्ति अपनी पूर्ण आंतरिक क्षमताओं, सृजनात्मक संभावनाओं, प्रतिभाओं और व्यक्तिगत विकास की चरम सीमा को प्राप्त कर लेता है तथा समाज या बाहरी दुनिया से परे अपने अस्तित्व के वास्तविक उद्देश्य को समझकर उसका प्रकटीकरण करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तिगत विकास, आंतरिक प्रेरणा के उच्चीकरण और स्वायत्त सृजनात्मकता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, सिग्मंड फ्रायड (Sigmund Freud) के 'मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत' (Psychoanalytical Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित व्यक्तित्व की तीन संरचनात्मक प्रणालियों—(1) इड (Id), (2) अहम् (Ego), और (3) पराहम् (Superego)—तथा 'रक्षा तंत्र' (Defense Mechanisms, विशेष रूप से 'उर्ध्वपातन' अर्थात् Sublimation और 'प्रक्षेपण' अर्थात् Projection) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संवेगात्मक समायोजन, फ्रस्ट्रेशन टॉलरेंस (Frustration Tolerance), और नैदानिक मार्गदर्शन (Clinical Guidance) के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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