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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित प्रतिनिधित्व की अंतिम और उच्चतम अवस्था—**'प्रतीकात्मक अवस्था' (Symbolic Stage)**—जिसके तहत बच्चा वस्तुओं, अनुभवों या विचारों को व्यक्त करने के लिए भाषा, गणितीय प्रतीकों, संकेतों और अमूर्त कोड का उपयोग करने की उच्च क्षमता विकसित करता है, जहाँ प्रत्यक्ष भौतिक उपस्थिति की आवश्यकता नहीं होती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त चिंतन, तार्किक संप्रत्ययीकरण और उच्च-स्तरीय बौद्धिक संरचनाओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जेरोम ब्रूनर के अनुसार, संज्ञानात्मक विकास की तीन अवस्थाएँ होती हैं: क्रियात्मक (Enactive), दृश्य-प्रतिमात्मक (Iconic), और प्रतीकात्मक (Symbolic)। प्रतीकात्मक अवस्था में बच्चा भाषा, तार्किक प्रतीकों और अमूर्त संप्रत्ययों के माध्यम से संसार को समझना और व्यक्त करना सीख जाता है। इससे प्रत्यक्ष वस्तुओं की अनुपस्थिति में भी जटिल बौद्धिक समस्याओं का समाधान करना संभव हो जाता है, जो कक्षा-कक्षीय शिक्षण में उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक कौशल के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'स्वयं-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक विश्वास या आत्म-आकलन के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से व्यक्ति यह निर्धारित करता है कि वह किसी विशिष्ट स्थिति में अपेक्षित प्रदर्शन या कार्य को सफलताપूर्वक पूरा करने में कितना सक्षम है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लक्ष्य-निर्धारण, академиक प्रेरणा (Academic Motivation), दृढ़ता और चुनौती-प्रबंधन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory / Social Cognitive Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'आत्म-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) की अवधारणा—जिसके तहत किसी व्यक्ति की अपनी क्षमताओं में यह आंतरिक विश्वास और धारणा शामिल होती है कि वह किसी विशिष्ट परिस्थिति या चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए आवश्यक क्रियाओं को निष्पादित कर सकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा नियमन, शैक्षणिक दृढ़ता और लक्ष्य-प्राप्ति के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा' (Progressive Education) और 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित 'चिंतनशील चिंतन' (Reflective Thinking) के पांच चरणों तथा कक्षा-कक्ष में 'समस्या समाधान' (Problem Solving) पद्धति के व्यावहारिक अनुप्रयोग के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'अधिगम के खोजबीन सिद्धांत' (Discovery Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित तीन प्रतिनिधित्व स्वरूपों—(1) क्रियात्मक प्रतिनिधित्व (Enactive Representation), (2) दृश्य-प्रतिबिंबात्मक प्रतिनिधित्व (Iconic Representation), और (3) सांकेतिक प्रतिनिधित्व (Symbolic Representation)—तथा 'सर्पिलाकार पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की संज्ञानात्मक परिपक्वता और अमूर्त संकल्पनाओं के निर्माण के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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