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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोजपूर्ण अधिगम सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development and Discovery Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय प्रतिनिधित्व प्रणाली—**'प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व' (Symbolic Representation)**—जिसे उस संज्ञानात्मक अवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ बालक वस्तुओं या अनुभवों को मानसिक रूप से निरूपित करने के लिए भाषा, प्रतीकों, तार्किक संकेतों और अमूर्त चिन्हों (जैसे गणितीय प्रतीक, वर्णमाला और कोड) का उपयोग करना सीख जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त वैचारिक चिंतन, भाषाई मध्यस्थता और उच्च-स्तरीय तार्किक संश्लेषण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

जेरोम ब्रूनर के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत के अनुसार, 'प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व' (Symbolic Representation) विकास की अंतिम और सबसे परिपक्व अवस्था है। इस अवस्था में बालक अमूर्त विचारों, भाषा, गणितीय प्रतीकों और तार्किक संकेतों के माध्यम से अपने ज्ञान को कोड, संचित और संप्रेषित करता है। यह विद्यार्थियों में उच्च-स्तरीय तार्किक संश्लेषण, अमूर्त समस्या-समाधान और वैचारिक चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के लिए सबसे अधिक प्रामाणिक और महत्वपूर्ण है।
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