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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय अवस्था—**'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage)**—जिसे लगभग 7 से 11 वर्ष की आयु के बीच परिभाषित किया जाता है, जहाँ बालक वस्तुओं और घटनाओं के वास्तविक, मूर्त और प्रत्यक्ष अनुभवों के आधार पर तार्किक रूप से सोचना शुरू कर देता है तथा किस केंद्रीय मानसिक क्षमता—**'संरक्षण' (Conservation)**—(अर्थात यह समझ विकसित होना कि किसी वस्तु के भौतिक स्वरूप, आकार या रूप में परिवर्तन करने पर भी उसकी मात्रा, द्रव्यमान या आयतन अपरिवर्तित रहता है) को पूरी तरह से आत्मसात कर लेता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक वर्गीकरण, आनुक्रमिकता और व्यावहारिक गणितीय अवधारणाओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (7 से 11 वर्ष) में बालकों में तार्किक चिंतन का विकास होता है। इस अवस्था की सबसे मुख्य विशेषता 'संरक्षण' (Conservation) का विकास है, जो विकेंद्रीकरण (एक साथ कई आयामों पर ध्यान देना) और प्रतिवर्तीता (क्रिया को उल्टा करके देखना) की मानसिक योग्यताओं पर आधारित होती है। इसके माध्यम से बालक यह समझता है कि बर्तन बदलने से पानी की मात्रा या मिट्टी के गोले का आकार बदलने से उसका द्रव्यमान नहीं बदलता। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य कथन है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-Conventional Level) के दोनों चरणों—(1) सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार (Social Contract and Individual Rights) तथा (2) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत (Universal Ethical Principles)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्वायत्त नैतिक तर्क (Autonomous Moral Reasoning), न्याय, मानवाधिकारों के प्रति सम्मान और आंतरिक विवेक (Conscience) के वैज्ञानिक विकास के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता स्तर' (Post-Conventional Morality Level) के तहत आने वाले सर्वोच्च चरण —'सार्वभौमिक नैतिक अंतःकरण अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation)— की अवधारणा, जिसके तहत व्यक्ति किसी सामाजिक नियम, कानून या परंपरा का पालन बाहरी दंड या सामाजिक स्वीकृति के भय से नहीं, बल्कि अपने स्वयं के आंतरिक रूप से चयनित सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों (जैसे न्याय, मानवाधिकार, और मानवीय गरिमा) के आधार पर करता है, और आवश्यकता पड़ने पर अन्यायपूर्ण कानूनों का सविनय अवज्ञा द्वारा विरोध भी करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय चरित्र निर्माण, स्वायत्त नैतिक तर्क और मानवीय मूल्यों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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