त्वरित लिंक्स
Indian Polity
28 views
कौन सा अनुच्छेद गिरफ्तार व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अनुच्छेद 22 गिरफ्तारी के विरुद्ध अधिकार देता है।
Related Questions
→
संसद किन परिस्थितियों में राज्य सूची के विषय पर कानून बना सकती है?
→
भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के क्रम में 'रेगुलेटिंग एक्ट, 1773' और 'पिट्स इंडिया एक्ट, 1784' के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के द्वारा बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया, तथा उसकी सहायता के लिए एक चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, जिसमें निर्णय बहुमत के आधार पर लिए जाते थे और गवर्नर-जनरल को केवल निर्णायक मत (casting vote) देने का अधिकार था।
2. रेगुलेटिंग एक्ट के तहत ही वर्ष 1774 में कलकत्ता में एक उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना की गई, जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश और तीन अन्य न्यायाधीश शामिल थे, और इस न्यायालय की अपीलें सीधे तौर पर कलकत्ता स्थित गवर्नर-जनरल की परिषद में की जा सकती थीं, न कि ब्रिटेन की प्रिवी कौंसिल में।
3. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 द्वारा कंपनी के राजनीतिक और व्यापारिक कार्यों को पृथक कर दिया गया, जिसके तहत राजनीतिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'बोर्ड ऑफ़ कंट्रोल' (Board of Control) और व्यापारिक मामलों के लिए 'कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स' (Court of Directors) की स्थापना की गई, जिससे भारत में 'द्वैध शासन' (Double Government) की प्रणाली प्रारंभ हुई।
4. पिट्स इंडिया एक्ट के माध्यम से ही पहली बार भारत में कंपनी के अधीन क्षेत्र को आधिकारिक रूप से 'ब्रिटिश अधिकार क्षेत्र का भारतीय क्षेत्र' (British Possessions in India) कहा गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, किंतु महान्यायवादी को हटाने के लिए संविधान में महाभ impeachment जैसी किसी विशेष प्रक्रिया या आधार का उल्लेख नहीं किया गया है।
2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) को भारत के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान ही हटाया जा सकता है, तथा उसका वेतन और अन्य सेवा शर्तें संसद द्वारा निर्धारित की जाती हैं, जो उसकी नियुक्ति के पश्चात उसके अहित में लाभकारी रूप से परिवर्तित नहीं की जा सकती हैं।
3. भारत का महान्यायवादी संसद के किसी भी सदन की बैठकों में या उसकी संयुक्त बैठक में भाग ले सकता है और बोल सकता है, तथा उसे संसद के सदनों की किसी भी समिति का सदस्य भी बनाया जा सकता है, किंतु उसे मतदान करने का कोई अधिकार प्राप्त नहीं होता है।
4. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) पद छोड़ने के बाद भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य कार्यालय या रोजगार के पात्र नहीं होते हैं, जबकि महान्यायवादी को निजी वकालत करने से संविधान द्वारा पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की प्रस्तावना में 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' के आदर्शों को फ्रांसीसी क्रांति (1789) से लिया गया है, जबकि 'सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय' के आदर्श को रूसी क्रांति (1917) से प्रेरित होकर शामिल किया गया है।
2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में यह स्पष्ट किया गया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें संसद द्वारा अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते यह संशोधन संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) को क्षति न पहुँचाए।
3. बेरूबारी यूनियन बाद (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं है, इसलिए विधायिका इसमें संशोधन करने की शक्ति नहीं रखती है, और इस स्थिति को आज भी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पूर्णतः अपरिवर्तित रखा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी संबंधों और अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि किसी समय लोक हित में ऐसा प्रतीत हो कि राज्यों के बीच विवाद उत्पन्न हो गए हैं या उत्पन्न होने की संभावना है, तो वह एक अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना कर सकता है, तथा यह परिषद् एक स्थायी संवैधानिक निकाय है जो केवल विवादों पर निर्णय देने (Adjudication) का कार्य करती है, न कि परामर्श देने का।
2. अनुच्छेद 249 के अनुसार यदि राज्य सभा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई (2/3) बहुमत से ऐसा संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या expedient है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए उस विषय पर विधि बना सकती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है।
3. अनुच्छेद 252 के अंतर्गत यदि दो या अधिक राज्यों के विधानमंडल इस आशय के प्रस्ताव पारित करते हैं कि राज्य सूची के विषयों पर संसद को कानून बनाना चाहिए, तो संसद उन राज्यों के लिए उस विषय पर कानून बना सकती है, किंतु ऐसा अधिनियमित कानून केवल उन्हीं राज्यों पर लागू होता जिन्होंने ऐसा प्रस्ताव पारित किया हो या बाद में उसे अंगीकृत किया हो, और संसद स्वयं अपनी इच्छा से ऐसे अधिनियम में संशोधन या निरसन नहीं कर सकती जब तक कि संबंधित राज्य दोबारा अनुरोध न करें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.