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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'उत्तर प्रदेश की प्राचीन सभ्यता और इतिहास' के संदर्भ में, ताम्र पाषाण कालीन (Chalcolithic) और उत्तर वैदिक कालीन पुरास्थलों (जैसे सोती संस्कृति, अतरंजीखेड़ा, हस्तिनापुर और लाल किला-गाजियाबाद) से प्राप्त साक्ष्यों, मृद्भाण्ड संस्कृतियों (जैसे गेरुवर्ण मृद्भाण्ड संस्कृति - OCP और चित्रित धूसर मृद्भाण्ड संस्कृति - PGW), तथा लौह युग के आरंभ से जुड़े पुरातात्विक अवशेषों के वैज्ञानिक विश्लेषण के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उत्तर प्रदेश के पुरातात्विक इतिहास में गंगा-यमुना दोआब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र (जैसे अतरंजीखेड़ा, हस्तिनापुर, आलमगीरपुर) प्राचीन सभ्यताओं के विकास के प्रमुख केंद्र रहे हैं। 'गेरुवर्ण मृद्भाण्ड संस्कृति' (Ochre Coloured Pottery - OCP) ताम्र पाषाण काल (लगभग 2000 ईसा पूर्व से 1500 ईसा पूर्व) का प्रतिनिधित्व करती है। इसके बाद उत्तर वैदिक काल में (लगभग 1200 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व) 'चित्रित धूसर मृद्भाण्ड संस्कृति' (Painted Grey Ware - PGW) का विकास हुआ, जो भारत में लौह युग के आरंभ और लोहे के व्यापक प्रयोग (जैसे कृषि उपकरण और हथियार) से जुड़ी हुई है। अतरंजीखेड़ा से शुरुआती लौह साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। अतः विकल्प (ए) इस संदर्भ में सर्वाधिक उपयुक्त और वैज्ञानिक रूप से सत्य है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमताओं (Learning Disabilities) और विशिष्ट बालकों के तंत्रिका-मनोवैज्ञानिक (Neuro-psychological) स्वरूप' के संदर्भ में, सैमुअल किर्क (Samuel Kirk) द्वारा सर्वप्रथम प्रतिपादित शब्द 'लर्निंग डिसएबिलिटी' (Learning Disability) के अंतर्गत 'डिस्लेक्सिया' (Dyslexia - पठन संबंधी विकार) के न्यूरो-बायोलॉजिकल आधार और मस्तिष्क के 'बाएं गोलार्ध के टेम्परो-पैराइटल जंक्शन' (Left Hemisphere Temporo-parietal Junction) की कार्यात्मक अक्षमता, तथा रेमंड बार्कले (Russell Barkley) द्वारा प्रतिपादित 'अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर' (ADHD) के 'एग्जीक्यूटिव फंक्शनिंग मॉडल' (Executive Functioning Model) के अंतर्गत प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (Prefrontal Cortex) की शिथिलता के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'यूनिवर्सल डिजाइन फॉर लर्निंग' (UDL) के अनुप्रयोग और विद्यार्थियों में बहुसंवेदी शिक्षण रणनीतियों (Multi-sensory Teaching Strategies) के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बुद्धि के संरचना मॉडल' (Structure of Intellect Model) के संदर्भ में, मनोवैज्ञानिक जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा 1967 में प्रतिपादित त्रि-आयामी सिद्धांत (3D Model of Intellect) के अनुसार, बौद्धिक योग्यताओं को तीन स्वतंत्र आयामों—विषय-वस्तु (Contents), संक्रियाएँ (Operations), और उत्पाद (Products)—में वर्गीकृत किया गया है। गिलफोर्ड के इस संशोधित और विस्तारित मॉडल में इन तीनों आयामों के अंतर्गत उप-श्रेणियों (Sub-divisions) की कुल संख्या क्रमशः कितनी है, जिसके आधार पर कुल 180 प्रकार की बौद्धिक क्षमताओं का निर्माण होता है?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) और राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय संविधान की प्रस्तावना में प्रयुक्त 'समाजवादी' (Socialist) शब्द लोकतांत्रिक समाजवाद (Democratic Socialism) को दर्शाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य मिश्रित अर्थव्यवस्था के माध्यम से आय, अवसर और जीवन स्तर की असमानताओं को समाप्त करना है।
2. संविधान के भाग IV में निहित अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण इस प्रकार वितरित होना चाहिए जिससे जनसाधारण के सामूहिक हित का सर्वोत्तम रूप से साधन हो, और यह निर्देशक तत्व मौलिक अधिकारों पर प्राथमिकता प्राप्त करते हैं जब इन्हें अनुच्छेद 39(b) या (c) को लागू करने के लिए अधिनियमित किया जाता है (संशोधन 42 के प्रावधान के तहत)।
3. वर्ष 1976 के 42वें संविधान संशोधन द्वारा प्रस्तावना में 'पंथनिरपेक्ष', 'समाजवादी' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए थे, जिसमें 'समाजवादी' शब्द का तात्पर्य उत्पादन और वितरण के सभी साधनों के राष्ट्रीयकरण से है, जिससे निजी संपत्ति का पूर्णतः उन्मूलन हो जाता है।
4. सर्वोच्च न्यायालय के 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' वाद में यह स्पष्ट किया गया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें संसद द्वारा अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते वह संविधान के 'मूल ढांचा' (Basic Structure) का उल्लंघन न करे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली तथा बौद्ध और वैदिक कालीन शिक्षण संस्थाओं के तुलनात्मक अध्ययन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध कालीन शिक्षा प्रणाली में उच्च शिक्षा का केंद्र 'विहार' और 'संघ' होते थे, जहाँ शिक्षा प्राप्त करने वाले भिक्षुओं को 'सामणेर' कहा जाता था, तथा नालंदा, वल्लभी और विक्रमशिला जैसे महाविहार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के प्रसिद्ध केंद्र थे जहाँ प्रवेश के लिए कठोर द्वार-पंडित (Gatekeeper Scholars) मौखिक परीक्षा लेते थे।
2. वैदिक कालीन शिक्षा प्रणाली में गुरुकुल आधारित शिक्षा में 'ब्रह्मचर्य आश्रम' का पालन करना अनिवार्य था, और यहाँ छात्रों के चरित्र निर्माण, आत्म-संयम तथा आध्यात्मिक चेतना के विकास पर बल दिया जाता था, जहाँ शिक्षा का माध्यम संस्कृत भाषा थी।
3. मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली में प्राथमिक शिक्षा के लिए 'मक्तब' (Maktab) और उच्च शिक्षा के लिए 'मदरसा' (Madarsa) की व्यवस्था थी, तथा मक्तब में कुरान की आयतों को कंठस्थ कराने और लिखने की प्रारंभिक शिक्षा दी जाती थी, लेकिन इसमें किसी भी प्रकार की धर्मनिरपेक्ष या व्यावहारिक शिक्षा का पूर्ण अभाव था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बुद्धि के बहुबुद्धि सिद्धांत' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, हावर्ड गार्डनर (Howard Gardner) द्वारा प्रतिपादित 'बहुबुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences: भाषाई, तार्किक-गणितीय, स्थानिक, संगीतात्मक, शारीरिक-गतिकी, अंतर्व्यक्तिगत, अंतravýakti / इंट्रापर्सनल और प्रकृतिवादी बुद्धि) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के विशिष्ट न्यूरल मॉड्यूल्स जैसे 'ब्रोका और वर्निक क्षेत्र' (भाषाई), 'इन्फीरियर पैरिएटल और प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (तार्किक), 'ऑक्सीपिटोपैरिएटल नेटवर्क' (स्थानिक), और 'सेरेबेलम व बेसल गैन्ग्लिया' (शारीरिक-गतिकी) के बीच स्वायत्त प्रसंस्करण, विशिष्ट संज्ञानात्मक डोमेन सक्रियण और मॉड्यूलर संगठन की गतिकी, तथा रॉबर्ट स्टर्नबर्ग (Robert Sternberg) द्वारा प्रतिपादित 'बुद्धि के त्रिचापीय सिद्धांत' (Triarchic Theory: विश्लेषणात्मक, रचनात्मक और व्यावहारिक बुद्धि) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, विभेदित शिक्षाशास्त्र (Differentiated Instruction Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहु-आयामी क्षमताओं, प्रासंगिक अनुकूलन व समग्र संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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