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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'हिंदी भाषा एवं व्याकरण' के अंतर्गत 'संधि और उनके प्रकार' के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प 'व्यंजन संधि' (Consonant Sandi) के नियमों—विशेष रूप से 'वर्गीय व्यंजनों के प्रथम वर्ण का तृतीय वर्ण में परिवर्तन' (जैसे क, च, ट, त, प् का ग, ज, ड, द, ब में बदलना) तथा 'प्रथम वर्ण का पंचम वर्ण में परिवर्तन'—के व्याकरणिक विश्लेषण और उनके सबसे सटीक व मानकीकृत उदाहरणों (जैसे 'दिग्गज', 'जगदीश', 'वाग्जाल', 'उन्नयन', और 'चिन्मय') के वैधानिक एवं तार्किक स्वरूप को प्रदर्शित करता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
व्याख्या: व्यंजन संधि के नियमानुसार, यदि किसी वर्ग (क, च, ट, त, प्) के पहले वर्ण (क, च, ट, त, प) का मेल किसी स्वर, अंतःस्थ व्यंजन (य, र, ल, व) या किसी वर्ग के तीसरे/चौथे वर्ण से हो, तो वह पहला वर्ण अपने ही वर्ग के तीसरे वर्ण (ग, ज, ड, द, ब) में बदल जाता है (जैसे- दिक् + गज = दिग्गज, जगत् + ईश = जगदीश)। इसी प्रकार, यदि किसी वर्ग के पहले वर्ण का मेल किसी अनुनासिक वर्ण (न या म) से हो, तो वह पहला वर्ण अपने ही वर्ग के पाँचवें (पंचम) वर्ण में बदल जाता है (जैसे- उत् + नयन = उन्नयन, चित् + मय = चिन्मय)। अतः विकल्प (a) पूर्णतः सत्य और मानक है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सृजनात्मकता' (Creativity) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, जे.पी. गिल Guilford द्वारा प्रतिपादित 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking: तरलता, मौलिकता, लचीलेपन और विस्तारण) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (Default Mode Network - DMN) और 'एक्जीक्यूटिव कंट्रोल नेटवर्क' (Executive Control Network - ECN) के बीच गतिक संतुलन, 'डर्सोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC), तथा 'पोस्टेरियर सिगुलेट कॉर्टेक्स' के बीच सहयोगात्मक सक्रियण, और नवीन विचार जनन (Novel Ideation) की तंत्रिका गतिकी, तथा एडवर्ड डी बोनो के 'लैटरल थिंकिंग' (Lateral Thinking) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-क्रिएटिविटी ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Creativity Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में मौलिक समस्या-समाधान, संज्ञानात्मक लचीलेपन व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम स्थानांतरण के आधुनिक और समकालीन सिद्धांतों' के संदर्भ में, चार्ल्स जुड (Charles Judd) द्वारा प्रतिपादित 'सामान्यीकरण का सिद्धांत' (Theory of Generalization)—जो यह बताता है कि अधिगम का स्थानांतरण सीखे गए नियमों, सिद्धांतों और सामान्यीकरण के आधार पर होता है—तथा गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिकों (जैसे मैक्स वर्दीमर, कोहका और कोहलर) द्वारा प्रतिपादित 'सूझ या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत' (Insight Theory of Learning) के अंतर्गत 'पूर्णता के अहसास' (Aha! Experience) और संज्ञानात्मक पुनर्गठन (Cognitive Restructuring) की संकल्पनाओं के वैज्ञानिक स्वरूप के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक समस्या-समाधान आधारित कक्षा-कक्ष शिक्षण में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और गुरुकुल परंपरा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्राचीन काल में 'उपनिदेश' और 'समावर्तन' संस्कार शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण चरण थे, जहाँ समावर्तन संस्कार छात्र की औपचारिक शिक्षा की पूर्णता और उसके गृहस्थ आश्रम में प्रवेश से पूर्व गुरु के आश्रम में आयोजित किया जाता था।
2. उत्तर-वैदिक काल और उपनिषद काल में शिक्षा मुख्य रूप से मौखिक परंपरा (श्रुति) पर आधारित थी, किंतु इस काल में महिलाओं को वेदों के अध्ययन, उपनयन संस्कार और ब्रह्मवादिनी के रूप में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का पूर्ण अधिकार प्राप्त था।
3. नालंदा और वल्लभी प्राचीन भारत के प्रसिद्ध बौद्ध शिक्षण संस्थान थे, जहाँ नालंदा महाविहार मुख्य रूप से महायान बौद्ध धर्म के साथ-साथ तर्कशास्त्र, व्याकरण, चिकित्सा और खगोल विज्ञान का एक विशाल आवासीय विश्वविद्यालय था, जिसे गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम का संरक्षण प्राप्त था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) में प्रेक्षणात्मक अधिगम (Observational Learning) की प्रक्रिया के चार क्रमिक चरणों का सही मनोवैज्ञानिक अनुक्रम निम्नलिखित में से कौन सा है?
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