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UPTET
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पर्यावरण अध्ययन (EVS) के शिक्षण अधिगम प्रक्रिया और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) के मार्गदर्शक सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन पर्यावरण अध्ययन के पाठ्यक्रम और शिक्षाशास्त्र के संबंध में सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) 2005 के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन (EVS) का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनके परिवेश से जोड़ना, उन्हें रटने की प्रवृत्ति से दूर करना और ज्ञान को विद्यालय की बाहरी दुनिया व वास्तविक जीवन के अनुभवों के साथ जोड़ना है। यह विषय विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और पर्यावरण शिक्षा के अंतर्संबंधों पर आधारित एक एकीकृत दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, न कि केवल किताबी ज्ञान पर।
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) और बाल-केन्द्रित शिक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य केवल विशेष आवश्यकता वाले बालकों (CWSN) को सामान्य विद्यालयों में प्रवेश देना है, और इसके लिए सामान्य पाठ्यचर्या या शिक्षण विधियों में किसी भी प्रकार के लचीलेपन या अनुकूलन की आवश्यकता नहीं होती है। 2. 'सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग' (Universal Design for Learning - UDL) का सिद्धांत समावेशी कक्षाओं में अधिगम की बाधाओं को दूर करने के लिए बहुविध प्रस्तुतिकरण (Multiple Means of Representation), बहुविध अभिव्यक्ति (Multiple Means of Expression) और बहुविध सहभागिता (Multiple Means of Engagement) के प्रावधान पर बल देता है। 3. शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act 2009) और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) दोनों ही दिव्यांग और सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से वंचित बच्चों की मुख्यधारा की शिक्षा के लिए 'समान अवसर' और 'विशेष सहायता' दोनों की वकालत करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बुद्धि के संरचनात्मक व पदानुक्रमित सिद्धांतों' के संदर्भ में, फिलिप वर्नोन (Philip Vernon) द्वारा प्रतिपादित 'बुद्धि का पदानुक्रमित मॉडल' (Hierarchical Model of Intelligence) के अंतर्गत 'सामान्य कारक (g)' और विशिष्ट समूहों जैसे 'मौखिक-शैक्षणिक' (Verbal-Educational) तथा 'व्यावहारिक-यांत्रिक' (Practical-Mechanical) कारकों के न्यूरो-मनोवैज्ञानिक स्वरूप, तथा सिरिल बर्ट (Cyril Burt) के पदानुक्रमित दृष्टिकोण के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, मानकीकृत मूल्यांकन (Standardized Assessment) और विद्यार्थियों में बहु-आयामी योग्यताओं के वैज्ञानिक वर्गीकरण में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? उत्तर प्रदेश के भौगोलिक विभाजनों, खनिज संपदा और उद्योग-धंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों में पाई जाने वाली 'डोलमाइट' (Dolomite) चट्टानों का उपयोग मुख्य रूप से इस्पात (Steel) और सीमेंट उद्योगों में फ्लक्स के रूप में किया जाता है। 2. उत्तर प्रदेश के चंदौली और सोनभद्र क्षेत्रों में 'पाइराइट' (Pyrite) के पर्याप्त भंडार खोजे गए हैं, जिसका उपयोग मुख्य रूप से गंधक (सल्फर) और सल्फ्यूरिक एसिड के निर्माण के लिए किया जाता है। 3. राज्य में 'चूना पत्थर' (Limestone) के सबसे प्रमुख भंडार मिर्जापुर जिले के कजराहट और गुरमा क्षेत्रों तथा सोनभद्र जिले के बाबूगढ़ क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जो सीमेंट उद्योग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता' (Learning Disabilities) के संदर्भ में, गणितीय योग्यताओं से जुड़ी अक्षमता 'डिस्कैल्कुलिया' (Dyscalculia) के विभिन्न उप-प्रकारों में से 'लेक्सिकल डिस्कैल्कुलिया' (Lexical Dyscalculia) की सबसे विशिष्ट एवं वैज्ञानिक पहचान निम्नलिखित में से किस विकासात्मक कठिनाई के रूप में की जाती है? प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और दर्शन के संदर्भ में, 'वेदांत दर्शन' (उत्तर मीमांसा) और इसके विभिन्न संप्रदायों के प्रणेताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वेदांत दर्शन उपनिषदों पर आधारित है, और इसके मूल ग्रंथ 'ब्रह्मसूत्र' (जिसे शारीरक सूत्र भी कहा जाता है) की रचना महर्षि बादरायण ने की थी, जो इस दर्शन का आधार स्तंभ माना जाता है। 2. आदि शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित 'अद्वैत वेदांत' के अनुसार ब्रह्म एकमात्र सत्य है और जगत मिथ्या (माया) है, तथा जीव और ब्रह्म मूल रूप से एक ही हैं (अहं ब्रह्मस्मि)। 3. रामानुजाचार्य द्वारा प्रतिपादित 'विशिष्टाद्वैत' दर्शन के अनुसार ईश्वर, जीव और जगत तीनों वास्तविक हैं, और जीव ब्रह्म का ही अंश होते हुए भी उससे भिन्न है, जबकि माधवाचार्य ने 'द्वैत वेदांत' का प्रतिपादन किया जिसके अनुसार ईश्वर और जीव सर्वथा भिन्न (अलग) हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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