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कोहलर ने चिम्पांजी (सुल्तान) पर प्रयोग करके यह सिद्ध किया कि प्राणी समस्या का समाधान अपनी सूझ-बूझ (Insight) द्वारा करता है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 से 18 तक 'समानता का अधिकार' वर्णित है, जो कानून के समक्ष समानता और भेदभाव के निषेध की बात करता है।
रॉबर्ट स्टर्नबर्ग ने बुद्धि का त्रि-तंत्रीय सिद्धांत दिया था, जिसमें उन्होंने विश्लेषणात्मक, सृजनात्मक और व्यावहारिक बुद्धि का वर्णन किया है।
जब सीखने की प्रक्रिया में उन्नति रुक जाती है, तो उसे सीखने का पठार (Plateau of Learning) कहा जाता है।
ब्रिटिश शासन के दौरान गवर्नर जनरल की परिषद में पहली बार लॉर्ड मैकाले (Thomas Babington Macaulay) को विधि सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्हें 1834 में इस पद पर नियुक्त किया गया था और उनकी देखरेख में ही भारतीय दंड...
वाइगोत्सकी का मानना है कि भाषा और विचार शुरू में अलग होते हैं, लेकिन भाषा चिंतन को व्यवस्थित करने और जटिल कार्यों को करने में एक औज़ार के रूप में कार्य करती है।
यद्यपि संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया गया था, लेकिन यह पूर्ण रूप से 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
गेस्टाल्ट अधिगम सिद्धांत में कोहलर ने चिम्पांजी पर प्रयोग करते हुए अंतर्दृष्टि या सूझ द्वारा सीखने पर बल दिया था।
औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था (11 वर्ष से ऊपर) में बालक जटिल परिकल्पनाएं बनाने और तार्किक रूप से उनका परीक्षण करने में सक्षम हो जाता है।
लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013 के तहत भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए लोकपाल का गठन किया गया।
वोल्फगैंग कोहलर ने गेस्टाल्ट सिद्धांत में यह स्पष्ट किया कि सीखना अचानक सूझ या अंतर्दृष्टि (Insight) द्वारा होता है।
बालक का सामाजिक विकास मुख्य रूप से उसके आसपास के वातावरण (Environment) और सामाजिक अंतःक्रिया से प्रभावित होता है।
बहु-संवेदी शिक्षण विधियाँ (दृश्य, श्रव्य, स्पर्श) अधिगम अक्षमता वाले बच्चों को कठिन अवधारणाएं समझने में मदद करती हैं।
ZPD उस कार्य क्षेत्र को कहते हैं जिसे बालक बड़ों या अधिक ज्ञानी व्यक्ति (MKO) के मार्गदर्शन में पूरा कर सकता है।
फिलिप वर्नन के पदानुक्रम में 'सामान्य कारक' (G-factor) सबसे ऊपर होता है, जो सभी मानसिक गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
उद्दीपक विभेदन वह प्रक्रिया है जिसमें प्राणी दो मिलते-जुलते उद्दीपकों में अंतर करना सीख जाता है और केवल सही उद्दीपक पर अनुक्रिया करता है।
सृजनात्मकता के लिए अपसारी चिंतन आवश्यक है, क्योंकि यह एक ही समस्या के कई नवीन समाधान खोजने की अनुमति देता है।
सूचना प्रसंस्करण मॉडल के अनुसार, कार्यशील स्मृति में ही सूचनाओं का कूट संकेतन और विश्लेषण होता है।
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि इन न्यायाधिकरणों ने मामलों का फैसला करते समय ऐसी कानूनी मिसालों पर भरोसा किया जो अस्तित्व में ही नहीं थीं और पूरी तरह से एआई द्वारा गढ़ी गई थीं।
मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था में बच्चे मूर्त वस्तुओं के आधार पर तार्किक चिंतन करने और उन्हें समझने में सक्षम हो जाते हैं।