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शिक्षक को बच्चों की जिज्ञासाओं का सम्मान करना चाहिए और उन्हें अलग तरह से सोचने और मौलिक विचार प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
वातावरण का अर्थ उन सभी बाहरी परिस्थितियों से है जो व्यक्ति के जन्म से लेकर मृत्यु तक उसके विकास और व्यवहार को प्रभावित करती हैं।
रोर्शा स्याही धब्बा परीक्षण (Rorschach Inkblot Test) व्यक्तित्व मापन की एक प्रमुख प्रक्षेपी विधि है, जिसमें अचेतन मन का अध्ययन किया जाता है।
ई.एल. थॉर्नडाइक के सिद्धांत को 'उद्दीपक-अनुक्रिया' (S-R) सिद्धांत कहा जाता है, जहाँ प्रयास करने से सही अनुक्रिया का चयन होता है।
एरिक्सन ने अपने मनोसामाजिक विकास के सिद्धांत में मानव जीवन को 8 स्पष्ट अवस्थाओं में विभाजित किया है।
जे.पी. गिलफोर्ड ने बुद्धि का त्रि-आयामी (3D) सिद्धांत दिया था, जिसमें उन्होंने बुद्धि को तीन आयामों (संक्रिया, विषय-वस्तु और उत्पाद) में वर्गीकृत किया है।
सीखने के पठार को दूर करने के लिए रुचिपूर्ण शिक्षण विधियों का उपयोग और सीखने के वातावरण में परिवर्तन करना सबसे प्रभावी होता है।
उपचारात्मक शिक्षण का मुख्य उद्देश्य उन छात्रों की अधिगम संबंधी समस्याओं और कमजोरियों का पता लगाकर उन्हें दूर करना है।
IQ (Intelligence Quotient) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग विलियम स्टर्न (William Stern) द्वारा किया गया था।
आकलन का प्राथमिक गुण यह है कि यह शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया में सुधार के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान करता है।
शिक्षण के दौरान किया गया आकलन (Formative Assessment) सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे शिक्षण प्रक्रिया में तुरंत सुधार किया जा सकता है।
संवेदी-पेशीय अवस्था (Sensorimotor Stage) जन्म से 2 वर्ष तक की अवधि है, जिसमें बच्चा इंद्रियों के माध्यम से सीखता है।
भाटिया बैटरी परीक्षण का उपयोग मुख्य रूप से अशाब्दिक (Non-verbal) बुद्धि को मापने के लिए किया जाता है।
चार्ल्स स्पीयरमैन ने बुद्धि का द्विकारक सिद्धांत प्रतिपादित किया था, जिसमें उन्होंने सामान्य (g) और विशिष्ट (s) कारक बताए थे।
24वें संशोधन द्वारा राष्ट्रपति स्वीकृति के लिए बाध्य हैं।
इवान पावलोव ने अपने शास्त्रीय अनुबंधन का प्रयोग कुत्ते (Dog) की पाचन प्रक्रिया और लार के स्राव पर किया था।
पावलोव के सिद्धांत में 'भोजन' (स्वाभाविक उद्दीपन) ही पुनर्बलन की भूमिका निभाता है, जिसे वह उद्दीपक कहता है।
अल्फ्रेड बिने के मूल परीक्षण को 'स्टैनफोर्ड-बिने स्केल' के रूप में लुईस टर्मन द्वारा संशोधित और मानकीकृत किया गया था।
योगात्मक मूल्यांकन का मुख्य उपयोग शिक्षण सत्र, पाठ्यक्रम या सत्र के अंत में किया जाता है ताकि छात्र की कुल उपलब्धि का मापन हो सके।
सृजनात्मकता का संबंध अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) से होता है, क्योंकि इसमें व्यक्ति एक समस्या के लिए अनेक समाधान सोचता है।