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History of India — Free MCQ Questions & Mock Test
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🎯 367 Mock Tests Khelein
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दिल्ली में 1857 के विद्रोह के घटनाक्रम, नेतृत्व और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मई 1857 को मेरठ के विद्रोही सिपाहियों के दिल्ली पहुँचने के बाद उन्होंने अनमने और वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट घोषित कर दिया था, हालांकि जफर इस विद्रोह का नेतृत्व करने के लिए शुरू में अत्यधिक उत्सुक और राजनीतिक रूप से पूरी तरह तैयार थे। 2. दिल्ली में विद्रोह की वास्तविक सैन्य कमान और प्रशासनिक नियंत्रण जनरल बख्त खान के हाथों में था, जो बरेली से आए सैनिकों के एक दस्ते का नेतृत्व कर रहे थे और उन्होंने 'कोर्ट ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' (प्रशासनिक न्यायालय) की स्थापना की थी। 3. ब्रिटिश सेनापति जॉन निकलसन के नेतृत्व में सितंबर 1857 में दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के लिए कड़ा संघर्ष किया गया, जिसमें ब्रिटिश सेना को भारी क्षति हुई, किंतु अंततः कश्मीरी गेट पर कब्जा कर लिया गया और निकलसन इस अभियान के दौरान गंभीर रूप से घायल होकर मारे गए। 4. दिल्ली के पतन के बाद सम्राट बहादुर शाह जफर ने हुमायूँ के मकबरे में शरण ली थी, जहाँ से मेजर विलियम हडसन ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था, तथा जफर के बेटों की हत्या के उपरांत उन्हें निर्वासित कर रंगून भेज दिया गया था जहाँ उनकी मृत्यु हो गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल साम्राज्य के प्रशासनिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जहाँगीर के शासनकाल में मुगल चित्रकला अपने स्वर्ण काल पर पहुँची, जिसमें प्राकृतिक दृश्यों, पक्षियों और पोर्ट्रेट चित्रकारी को विशेष प्रोत्साहन मिला, तथा जहाँगीर का दावा था कि वह किसी भी चित्र को देखकर यह बता सकता है कि उसे किस चित्रकार ने बनाया है। 2. शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान वास्तुकला ने अपनी पराकाष्ठा को छुआ, किंतु उसके अंतिम वर्षों में उसके पुत्रों के बीच हुए उत्तराधिकार के युद्ध में दाराशिकोह ने सामूगढ़ के निर्णायक युद्ध में औरंगजेब को पराजित कर मुगल सिंहासन पर अधिकार कर लिया था। 3. औरंगजेब ने अपने शासनकाल के दौरान संगीत पर प्रतिबंध लगा दिया, झरोखा दर्शन और तुलादान जैसी मुगल परंपराओं को समाप्त कर दिया, तथा सिक्कों पर कलमा खुदवाने की प्रथा को भी बंद करवा दिया था। 4. अकबर द्वारा शुरू की गई 'दीन-ए-इलाही' वस्तुतः कोई नया धर्म नहीं था, बल्कि यह सूफीवादी विचारों पर आधारित एक आचार संहिता थी जिसका प्रधान पुरोहित अबुल फजल था और बीरबल एकमात्र हिंदू दरबारी था जिसने इसे स्वीकार किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शुरुआती चरणों और नरम दल-गरम दल काल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कांग्रेस के प्रारंभिक नरमपंथियों (जैसे दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता और गोपाल कृष्ण गोखले) की राजनीतिक कार्यपद्धति मुख्य रूप से '3P' यानी प्रार्थना (Prayer), याचिका (Petition) और विरोध (Protest) पर आधारित थी। 2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में ब्रिटिश वस्तुओं और संस्थानों के बहिष्कार के प्रस्ताव को पूरे देश में लागू करने का समर्थन किया गया, जिससे गरम दल के नेता अत्यधिक संतुष्ट हुए। 3. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार आधिकारिक रूप से 'स्वराज' (Swaraj) शब्द को अपने मुख्य लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया। 4. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में नरमपंथियों और उग्रवादियों के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर तीव्र गतिरोध उत्पन्न हुआ, जिसके परिणामस्वरुप कांग्रेस का विभाजन हो गया और रास बिहारी बोस को अध्यक्ष चुना गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) का मुख्य उद्देश्य वेदों की सर्वोच्चता स्थापित करना तथा पश्चिमी शिक्षा के प्रभाव को पूरी तरह से नकारते हुए प्राचीन रूढ़िवादिता का समर्थन करना था। 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, अवतारवाद तथा जन्मजात जाति व्यवस्था का कड़ा विरोध किया। 3. केशव चंद्र सेन के नेतृत्व में ब्रह्म समाज में हुए वैचारिक मतभेदों के परिणामस्वरुप वर्ष 1866 में देवेंद्रनाथ ठाकुर ने 'आदि ब्रह्म समाज' की स्थापना की थी। 4. सत्यशोधक समाज की स्थापना ज्योतिराव फुले द्वारा 1873 में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अतिशूद्रों को वैचारिक रूप से जागरूक करना तथा ब्राह्मणवादी वर्चस्व और धार्मिक पाखंडों को चुनौती देना था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बिहार के अन्य क्षेत्रों—विशेष रूप से पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में 1857 के विद्रोह के घटनाक्रम और उसके नेतृत्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खां ने किया था, जिनके नेतृत्व में हुए इस संघर्ष में अफीम एजेंट डॉ. लायेल मारा गया था, किंतु ब्रिटिश अधिकारियों ने शीघ्र ही इस विद्रोह को कुचलकर पीर अली खां को फाँसी दे दी थी। 2. दानापुर छावनी के 7वें, 8वें और 40वें रेजिमेंट के भारतीय सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया था और सोन नदी पार करके आरा की ओर कूच किया था, जहाँ उन्होंने वीर कुंवर सिंह की सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाया था। 3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में भी 1857 के विद्रोह की सुगबुगाहट तेज हो गई थी, जहाँ मुजफ्फरपुर में यूरोपीय अधिकारियों और प्रिंसेप महोदय के खिलाफ असंतोष फूटा था, जबकि छपरा में विद्रोही सिपाहियों और स्थानीय जमींदारों ने ब्रिटिश संचार व्यवस्था और सरकारी भवनों को निशाना बनाया था। 4. पटना के कमिश्नर विलियम टेलर ने बिहार में बढ़ते विद्रोही तेवरों को दबाने के लिए अत्यधिक दमनकारी नीतियां अपनाई थीं, जिसके तहत उसने पटना के मौलवी अहमदुल्लाह, वारिस अली और मोहम्मद हुसैन जैसे प्रमुख संदिग्ध मुस्लिम विद्वानों को षड्यंत्र रचने के आरोप में गिरफ्तार कर मृत्युदंड दे दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के स्वरूप और उसके मूल्यांकन के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों और विचारकों के कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. "यह न तो पहला, न ही राष्ट्रीय, और न ही स्वतंत्रता संग्राम था" - डॉ. आर.सी. मजूमदार 2. "यह सुनियोजित तरीके से लड़ा गया भारत का प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम था" - वी.डी. सावरकर 3. "यह विद्रोह केवल एक सिपाही विद्रोह था, जिसका राष्ट्रीयता से कोई दूर-दूर तक संबंध नहीं था" - सर जॉन सीले 4. "यह धर्म का अंधा युद्ध था जो कि बर्बरता और सभ्यता के बीच का संघर्ष था" - टी.आर. होम्स उपर्युक्त युग्मों में से कौन-कौन से सही सुमेलित हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उससे जुड़े घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नाना साहब (पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) ने कानपुर में 5 जून 1857 को विद्रोह का नेतृत्व संभाला था, क्योंकि ब्रिटिश सरकार ने उनकी पैतृक पेंशन और उपाधि को बंद कर दिया था तथा उन्हें बिठूर से कानपुर आने पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। 2. तात्या टोपे (रामचंद्र पांडुरंग टोपे) नाना साहब के अत्यंत योग्य और वफादार सैन्य कमांडर थे, जिन्होंने कानपुर के पतन के बाद ग्वालियर में सिंधिया सेना को अपने पक्ष में मिला लिया था और बाद में अंग्रेजों के खिलाफ लंबे समय तक सफल छापामार युद्ध का संचालन किया था। 3. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और राजनीतिक दूत थे, ने विद्रोह से पूर्व लंदन जाकर पेशवा की पेंशन बहाली के लिए पैरवी की थी और बाद में तुर्की और क्रीमिया का दौरा कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटिश साम्राज्य विरोधी ताकतों से संपर्क साधने का प्रयास किया था। 4. कानपुर में ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने अत्यंत क्रूरता के साथ विद्रोह को कुचला था, जिसके दौरान 'सती चौरा घाट' की घटना घटी थी, और अंततः नाना साहब ब्रिटिश सेना को परास्त कर सुरक्षित रूप से यूरोप चले गए थे, जहाँ उनकी प्राकृतिक मृत्यु हुई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्धन राजवंश तथा दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) के प्रशासनिक, कलात्मक और राजनीतिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) ने वातापी के चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय को पराजित कर 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की थी और इसी के शासनकाल में महाबलीपुरम के प्रसिद्ध एकात्मथ रथ मंदिरों (रथ मंदिरों) का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। 2. बादामी के चालुक्य वंश के प्रसिद्ध शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका विस्तृत विवरण ऐहोल शिलालेख में मिलता है, जिसकी रचना रवि कीर्ति ने संस्कृत भाषा और कर्नाटक लिपि में की थी। 3. चोल सम्राट राजराजा प्रथम ने श्रीलंका (ईप्सित) पर आक्रमण कर उसके उत्तरी भाग को अपने साम्राज्य में मिला लिया था और वहाँ के राजा को पराजित कर अनुराधापुर शहर को अपनी राजधानी बनाया था तथा राजराजेश्वर (बृहदेश्वर) मंदिर का निर्माण करवाया था। 4. वर्धन वंश के राजा हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान चीनी यात्री ह्वेनसांग (Hiuen Tsang) भारत आया था, जिसने कन्नौज में आयोजित भव्य धार्मिक महासम्मेलन और प्रयाग के महाकुंभ (मोक्ष परिषद) का अपनी यात्रा वृत्तांत 'सी-यू-की' में सजीव वर्णन किया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, मनसबदारी प्रथा और नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अकबर द्वारा प्रशासनिक सुधारों के तहत शुरू की गई 'मनसबदारी प्रथा' मुख्य रूप से मंगोलों की दशमलव प्रणाली पर आधारित थी, जिसमें मनसबदारों के पद दो श्रेणियों—'जात' (व्यक्तिगत पद और वेतन) और 'सवार' (घुड़सवार सैनिकों की संख्या)—में विभाजित थे, जिसे बाद में जहाँगीर ने 'दु-अस्मेह सिह-अस्मेह' प्रणाली के माध्यम से और अधिक लचीला बनाया था। 2. शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान मनसबदारी व्यवस्था में 'माहवार' (Month-scale) प्रणाली की शुरुआत हुई, जिसके तहत राजस्व वसूली के आधार पर मनसबदारों के वेतन महीनों में निर्धारित किए जाने लगे, क्योंकि साम्राज्य की जागीरों से होने वाली आय और कुल वेतन की मांग के बीच असंतुलन पैदा होने लगा था। 3. औरंगजेब के शासनकाल में दक्षिण भारत के अभियानों के दौरान मनसबदारों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि हो गई, जिसके परिणामस्वरूप जागीरों की भारी कमी हो गई और इस संकट को 'जागीरदारी संकट' (Jagirdari Crisis) के रूप में जाना जाता है। 4. अकबर ने अपने शासनकाल में राजपूतों के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित करने की नीति अपनाई, किंतु आमेर के कछवाहा वंश को छोड़कर किसी भी अन्य राजपूत राज्य ने मुगल सर्वोच्चता को स्वेच्छा से स्वीकार नहीं किया था और निरंतर armed struggle जारी रखा था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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