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History of India — Free MCQ Questions & Mock Test

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History of India ki taiyari ke liye 3670+ free MCQ questions, explanation ke saath — practice karein aur apni tayyari mazboot banayein.

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शुरुआती चरणों, नरम दल और गरम दल काल के वैचारिक संघर्ष तथा प्रमुख अधिवेशनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कांग्रेस के प्रारंभिक नरमपंथियों (जैसे दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता और गोपाल कृष्ण गोखले) की राजनीतिक कार्यपद्धति मुख्य रूप से '3P' यानी प्रार्थना (Prayer), याचिका (Petition) और विरोध (Protest) पर आधारित थी तथा उन्हें ब्रिटिश न्यायप्रियता में अटूट विश्वास था। 2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में ब्रिटिश वस्तुओं और संस्थानों के बहिष्कार के प्रस्ताव को पूरे देश में लागू करने का औपचारिक समर्थन किया गया, जिससे गरम दल के नेता अत्यधिक संतुष्ट हुए। 3. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार आधिकारिक रूप से 'स्वराज' (Swaraj) शब्द को अपने मुख्य लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया। 4. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में नरमपंथियों और उग्रवादियों के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर तीव्र गतिरोध उत्पन्न हुआ, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस का विभाजन हो गया और रास बिहारी बोस को अध्यक्ष चुना गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों के वैचारिक योगदान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' (1828) ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, और पुरोहितवाद का कड़ा विरोध किया तथा उपनिषदों और वेदों के तार्किक व एकेश्वरवादी स्वरूप पर बल दिया। 2. स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1875 में बॉम्बे में 'आर्य समाज' की स्थापना की और 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देते हुए जन्मजात जाति व्यवस्था और अस्पृश्यता का समर्थन किया। 3. ज्योतिराव फुले ने 1873 में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अतिशूद्रों को बौद्धिक रूप से जागरूक करना तथा ब्राह्मणवादी वर्चस्व और धार्मिक पाखंडों को चुनौती देना था। 4. प्रार्थना समाज की स्थापना आत्माराम पांडुरंग ने केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से 1867 में बंबई में की थी, जिसका प्रमुख ध्यान अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देने पर था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में वर्धन राजवंश तथा दक्षिण भारत के राजवंशों की प्रशासनिक, कलात्मक और सैन्य उपलब्धियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान कन्नौज की सभा में महायान बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार और चीनी यात्री ह्वेनसांग के सम्मान में एक भव्य धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया था, जिसमें बीस विभिन्न देशों के राजाओं ने भाग लिया था। 2. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) ने चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय को पराजित कर 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की थी और महाबलीपुरम में प्रसिद्ध एकश्म रथ मंदिरों (एकात्म रथ) का निर्माण कार्य उसी के काल में आरंभ हुआ था। 3. चालुक्य वंश के प्रसिद्ध शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका विस्तृत और प्रामाणिक विवरण संस्कृत में रचित 'ऐहोल शिलालेख' में मिलता है जिसकी रचना रवि कीर्ति ने की थी। 4. चोल सम्राट राजराजा प्रथम ने श्रीलंका (सीलोन) पर आक्रमण कर उसके उत्तरी भाग को अपने साम्राज्य में मिला लिया था और वहाँ के विजित क्षेत्रों में चोल प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित करते हुए अनुराधापुर शहर को अपनी नई राजधानी बनाया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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सत्रहवीं शताब्दी के मध्य में मराठा साम्राज्य के उत्थान और छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शिवाजी ने केंद्रीय प्रशासन में सहायता के लिए 'अष्टप्रधान' नामक मंत्रिपरिषद का गठन किया था, जिसमें प्रत्येक मंत्री राजा के प्रति उत्तरदायी होता था और इनमें 'पेशवा' (मुख्य प्रधान) के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पद 'सेनापति' (या सर-ए-नौबत) का था, जो विशुद्ध रूप से एक सैन्य पद था। 2. शिवाजी की राजस्व प्रणाली मुख्य रूप से मलिक अंबर की भू-राजस्व व्यवस्था पर आधारित थी, जिसके तहत शुरुआती दौर में उपज का 33 प्रतिशत भाग राज्य द्वारा लिया जाता था, जिसे बाद में बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया था। 3. 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' मराठा साम्राज्य के प्रमुख कर थे, जिनमें 'चौथ' पड़ोसी मुगल क्षेत्रों या गैर-मराठा क्षेत्रों से उनकी सुरक्षा के बदले वसूला जाने वाला कुल राजस्व का 25 प्रतिशत कर था, जबकि 'सरदेशमुखी' शिवाजी द्वारा अपने पैतृक देशदेशुख अधिकारों के दावे के रूप में कुल राजस्व का 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर के रूप में वसूला जाता था। 4. शिवाजी की सैन्य व्यवस्था में नियमित घुड़सवार सेना को 'बरगीर' कहा जाता था, जिनके घोड़े और हथियार राज्य द्वारा प्रदान किए जाते थे, जबकि 'सिलहदार' वे सैनिक होते थे जो अपने स्वयं के घोड़े और शस्त्र लेकर युद्ध में भाग लेते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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सविनय अवज्ञा आंदोलन, गोलमेज सम्मेलन और गांधी-इरविन समझौते के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1930 में प्रारंभ हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत महात्मा गांधी द्वारा अपनी प्रसिद्ध 'दांडी यात्रा' के साथ की गई थी, जिसके तहत उन्होंने 6 अप्रैल 1930 को दांडी में नमक कानून तोड़कर ब्रिटिश एकाधिकार को चुनौती दी थी। 2. प्रथम गोलमेज सम्मेलन (1930-31) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से भाग लिया था, क्योंकि गांधी-इरविन समझौते के तहत कांग्रेस के सभी राजनीतिक कैदियों की बिना शर्त रिहाई पर सहमति बन गई थी। 3. मार्च 1931 में संपन्न 'गांधी-इरविन समझौते' के तहत सरकार ने हिंसा में लिप्त कैदियों को छोड़कर अन्य सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करने तथा समुद्र तट के पास के गाँवों को अपने घरेलू उपयोग के लिए नमक बनाने का अधिकार देने पर सहमति व्यक्त की थी। 4. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था, किंतु सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर उत्पन्न तीव्र मतभेदों और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के साथ हुए विवाद के कारण यह सम्मेलन बिना किसी ठोस परिणाम के असफल घोषित कर दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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मध्यकालीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में 'भक्ति और सूफी आंदोलन' के प्रसार, उनकी दार्शनिक मान्यताओं तथा संतों के योगदान के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दक्षिण भारत के अलवार (वैष्णव) और नयनार (शैव) संतों ने भक्ति आंदोलन की नींव रखी थी, जिन्होंने जातिगत भेदभाव और वैदिक कर्मकांडों की कठोरता का विरोध करते हुए तमिल भाषा में भजनों के माध्यम से ईश्वर के प्रति व्यक्तिगत प्रेम और समर्पण (भक्ति) पर बल दिया। 2. सूफी संत चिश्ती सिलसिले के संस्थापक ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने भारत में इस सिलसिले की स्थापना की, किंतु दिल्ली में चिश्ती सिलसिले को लोकप्रिय बनाने और स्थापित करने का मुख्य श्रेय शेख निजामुद्दीन औलिया को जाता है, जिन्होंने 'वदत-उल-वजूद' (अस्तित्व की एकता) के सिद्धांत का समर्थन किया था। 3. 15वीं शताब्दी के महान संत कबीर दास ने निर्गुण ब्रह्म की उपासना पर बल दिया और वेदों व कुरान दोनों की बाह्य धार्मिक रूढ़ियों, मूर्तिपूजा तथा जाति व्यवस्था पर तीव्र प्रहार किया, तथा उनकी रचनाओं का संकलन उनके शिष्यों द्वारा 'बीजक' के रूप में किया गया था। 4. सगुण भक्ति धारा के प्रमुख संत तुलसीदास ने 'रामचरितमानस' की रचना अवधी भाषा में की, और वे अकबर के समकालीन थे, जिन्होंने अकबर के दरबार में नियमित रूप से उपस्थित होकर मनसबदारी पद स्वीकार किया था और शाही संरक्षण प्राप्त किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और उसके विरोध में उपजे स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन का प्रस्ताव लॉर्ड कर्ज़न द्वारा 20 जुलाई 1905 को घोषित किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता में सुधार करना था, किंतु वास्तविक औपनिवेशिक उद्देश्य उभरते हुए बंगाली राष्ट्रवाद को कमजोर करना और सांप्रदायिक आधार पर प्रांत का विभाजन करना था। 2. 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के ऐतिहासिक टाउन हॉल में आयोजित एक विशाल बैठक में औपचारिक रूप से 'स्वदेशी आंदोलन' (Swadeshi Movement) की घोषणा की गई तथा ब्रिटिश वस्तुओं और संस्थानों के बहिष्कार का प्रस्ताव पारित किया गया। 3. बंगाल विभाजन के प्रभावी होने की तिथि (16 अक्टूबर 1905) को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, बंगाली समाज के बीच आपसी भाईचारे का प्रतीक 'राखी बांधी गई' तथा रबीन्द्रनाथ ठाकुर के आह्वान पर 'आमार सोनार बांग्ला' गीत गाया गया। 4. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा के साथ-साथ पारंपरिक मेलों, उत्सवों और लोकगीतों का उपयोग जन-जागरूकता के लिए किया गया, किंतु मुस्लिम बहुल क्षेत्रों और किसान वर्ग की व्यापक एवं सक्रिय भागीदारी के कारण यह आंदोलन अखिल भारतीय स्वरूप प्राप्त करने में पूरी तरह सफल रहा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नरम दल (Moderate) और गरम दल (Extremist) के वैचारिक संघर्ष, प्रमुख अधिवेशनों तथा उनके नेतृत्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कांग्रेस के प्रारंभिक नरमपंथियों (जैसे गोपाल कृष्ण गोखले और सुरेन्द्रनाथ बनर्जी) का यह अटूट विश्वास था कि ब्रिटिश शासन भारत के हित में है और वे मुख्य रूप से '3P' (Prayer, Petition और Protest) की राजनीतिक कार्यपद्धति में विश्वास रखते थे। 2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में ब्रिटिश वस्तुओं और संस्थानों के बहिष्कार के प्रस्ताव को पूरे देश में लागू करने का औपचारिक और पूर्ण समर्थन किया गया, जिससे गरम दल के नेता अत्यधिक संतुष्ट हुए। 3. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार आधिकारिक रूप से 'स्वराज' (Swaraj) शब्द को अपने मुख्य लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया था। 4. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में नरमपंथियों और उग्रवादियों के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर तीव्र गतिरोध उत्पन्न हुआ, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस का विभाजन हो गया और रास बिहारी बोस को अध्यक्ष चुना गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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बंगाल विभाजन (1905) और उसके परिणामस्वरूप प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन के वैचारिक तथा आर्थिक आयामों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन के निर्णय की औपचारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्ज़न द्वारा की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक सुविधा बताना था, किंतु इसका वास्तविक औपनिवेशिक उद्देश्य राजनीतिक रूप से उभरते हुए बंगाली राष्ट्रवाद की रीढ़ को तोड़ना और संप्रदाय के आधार पर प्रांत को विभाजित करना था। 2. 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के ऐतिहासिक टाउन हॉल में आयोजित एक विशाल बैठक में औपचारिक रूप से 'स्वदेशी आंदोलन' का प्रस्ताव पारित किया गया, जिसके तहत केवल ब्रिटिश वस्त्रों का बहिष्कार किया गया, जबकि ब्रिटिश शिक्षण संस्थानों, अदालतों और उपाधियों का बहिष्कार इस आंदोलन के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया था। 3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार के साथ-साथ पारंपरिक मेलों, उत्सवों (जैसे शिवाजी और गणपति उत्सव) और लोकगीतों का उपयोग व्यापक जन-जागरूकता फैलाने के लिए किया गया, तथा अवनिंद्रनाथ टैगोर ने 'इंडियन सोसाइटी ऑफ ओरिएंटल आर्ट' की स्थापना कर भारतीय कला में स्वदेशी और राष्ट्रीय चेतना को पुनर्जीवित किया। 4. स्वदेशी आंदोलन के आर्थिक और रचनात्मक कार्यक्रमों के तहत बंगाल नेशनल कॉलेज की स्थापना की गई, जिसके पहले प्रधानाचार्य अरबिंदो घोष बने, और राष्ट्रीय शिक्षा परिषद (National Council of Education) का गठन तकनीकी और साहित्यिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उससे जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नाना साहब, जो पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र थे, ने कानपुर में 5 जून 1857 को विद्रोह का नेतृत्व संभाला, क्योंकि ब्रिटिश सरकार ने उनकी पैतृक पेंशन और उपाधि को बंद कर दिया था तथा उन्हें बिठूर से कानपुर आने पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। 2. तात्या टोपे (रामचंद्र पांडुरंग टोपे) नाना साहब के अत्यंत योग्य सैन्य कमांडर थे, जिन्होंने कानपुर के पतन के बाद ग्वालियर में सिंधिया सेना को अपने पक्ष में मिला लिया था और बाद में अंग्रेजों के खिलाफ लंबे समय तक सफल छापामार युद्ध का संचालन किया था। 3. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और राजनीतिक दूत थे, ने विद्रोह से पूर्व लंदन जाकर पेशवा की पेंशन बहाली के लिए पैरवी की थी और बाद में क्रीमिया का दौरा कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटिश साम्राज्य विरोधी ताकतों से संपर्क साधने का प्रयास किया था। 4. कानपुर में ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने अत्यंत क्रूरता के साथ विद्रोह को कुचला था, जिसके दौरान 'सती चौरा घाट' की घटना घटी थी, और अंततः नाना साहब ब्रिटिश सेना को परास्त कर सुरक्षित रूप से यूरोप चले गए थे, जहाँ उनकी प्राकृतिक मृत्यु हुई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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