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History of India — Free MCQ Questions & Mock Test

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History of India ki taiyari ke liye 3670+ free MCQ questions, explanation ke saath — practice karein aur apni tayyari mazboot banayein.

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सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (EIC) द्वारा भारत में अपनी राजनीतिक और वाणिज्यिक सत्ता की सुदृढ़ीकरण की प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1668 में ब्रिटिश सम्राट चार्ल्स द्वितीय ने बॉम्बे (मुम्बई) द्वीप को पुर्तगालियों से दहेज में प्राप्त किया था, जिसे उन्होंने मात्र 10 पाउंड वार्षिक किराए पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दिया था। 2. वर्ष 1690 में जॉब चारनाक ने हुगली के स्थान पर सुतानाती में एक अंग्रेजी कारखाने की नींव रखी, जो आगे चलकर कलकत्ता (कोलकाता) शहर के रूप में विकसित हुआ और यहाँ फोर्ट विलियम किले का निर्माण किया गया। 3. बंगाल के नवाब शाइस्ता खां ने वर्ष 1680 में एक फरमान जारी कर अंग्रेजों को बंगाल, बिहार और उड़ीसा में 3% वार्षिक चुंगी के भुगतान पर कर-मुक्त व्यापार करने का अनन्य अधिकार प्रदान किया था। 4. फ्रांसीसियों ने भारत में अपनी पहली फैक्ट्री वर्ष 1668 में सूरत में स्थापित की थी, जिसकी स्थापना फ्रेंकोइस कैरो के प्रयासों से हुई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के पश्चात ब्रिटिश क्राउन द्वारा भारत के प्रशासन में किए गए महत्वपूर्ण परिवर्तनों और 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा' (1858) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत सरकार अधिनियम 1858 के द्वारा भारत का शासन सीधे ब्रिटिश महारानी के नाम पर कर दिया गया, तथा 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर' को समाप्त कर उनके समस्त अधिकार 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) और उसकी सहायता के लिए गठित 15 सदस्यीय 'इंडिया काउंसिल' को सौंप दिए गए। 2. क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा (जो 1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद के दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ी गई थी) में यह स्पष्ट आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियासतों के साथ किए गए सभी संधियों और समझौतों का सम्मान करेगी तथा भविष्य में किसी भी भारतीय राज्य का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय नहीं किया जाएगा। 3. इस घोषणा में यह भी प्रावधान किया गया कि भारत के सभी नागरिकों को उनकी नस्ल, धर्म या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव किए बिना योग्यता के अनुसार सभी लोक सेवाओं (Civil Services) में निष्पक्ष रूप से नियुक्त किया जाएगा, और इस नीति को पूरी ईमानदारी से तुरंत लागू भी कर दिया गया था। 4. विद्रोह के बाद ब्रिटिश सेना के संगठन में बड़ा परिवर्तन करते हुए यूरोपीय सैनिकों का अनुपात बढ़ाया गया, विशेष रूप से बंगाल सेना में भारतीय और यूरोपीय सैनिकों का अनुपात 2:1 से बदलकर लगभग 1:2 कर दिया गया तथा सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण एवं तोपखाने (Artillery) जैसे विभागों पर पूरी तरह यूरोपीय नियंत्रण स्थापित किया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों—स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement), रयतवारी व्यवस्था (Ryotwari System) और महालवारी व्यवस्था (Mahalwari System)—के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्थाई बंदोबस्त प्रणाली के तहत लॉर्ड कॉर्नवालिस और जॉन शोर ने बंगाल, बिहार और उड़ीसा में 'सूर्यास्त कानून' (Sunset Law) का प्रावधान किया था, जिसके अनुसार यदि निर्धारित तिथि को सूर्यास्त तक जमींदार भू-राजस्व जमा नहीं करते थे, तो उनकी जमींदारी नीलाम कर दी जाती थी। 2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में लागू की गई रयतवारी व्यवस्था में सरकार और किसानों (रयतों) के बीच सीधा अनुबंध होता था, जिसमें कृषि योग्य भूमि का स्वामित्व किसानों को दिया गया और भू-राजस्व की दरें अत्यधिक होने के कारण किसानों को महाजनों के चंगुल से मुक्ति मिल गई थी। 3. हॉल्ट मैकेंज़ी द्वारा परिकल्पित और विलियम बेंटिंक के शासनकाल में उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू की गई महालवारी व्यवस्था में भू-राजस्व के निर्धारण के लिए पूरे गाँव या ग्राम समूह (महाल) को इकाई माना गया था, और इसमें राजस्व भुगतान की जिम्मेदारी सामूहिक रूप से पूरे ग्राम समुदाय की होती थी। 4. इन तीनों प्रणालियों का दीर्घकालिक परिणाम यह हुआ कि पारंपरिक कृषि अर्थव्यवस्था का वाणिज्यीकरण हो गया, जिसके तहत किसानों ने अपनी मर्जी से खाद्यान्न के स्थान पर केवल अफीम, नील और कपास जैसी नकदी फसलों का उत्पादन शुरू किया जिससे ग्रामीण गरीबी में भारी कमी आई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों जैसे पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा में हुए संघर्षों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए ऐतिहासिक विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता और क्रांतिकारी पीर अली खान ने किया था, जिनके नेतृत्व में हुए इस संघर्ष के दौरान अफीम एजेंट डॉ. लायेल मारा गया था। 2. दानापुर छावनी के 7वें, 8वें और 40वें रेजिमेंट के भारतीय सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया था और सोन नदी पार करके सीधे आरा की ओर कूच किया था, जहाँ उन्होंने बाबू वीर कुंवर सिंह की सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ एक मजबूत संयुक्त मोर्चा बनाया था। 3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में भी विद्रोही सिपाहियों और स्थानीय नागरिकों में भारी असंतोष देखा गया, जहाँ मुजफ्फरपुर में यूरोपीय अधिकारियों पर हमले हुए, जबकि छपरा में ब्रिटिश संचार व्यवस्था और सरकारी भवनों को निशाना बनाया गया। 4. पटना के कमिश्नर विलियम टेलर ने बिहार में बढ़ते विद्रोही तेवरों को दबाने के लिए अत्यंत क्रूर दमनकारी नीतियां अपनाई थीं, जिसके तहत उसने पटना के मौलवी अहमदुल्लाह, वारिस अली और मोहम्मद हुसैन को तुरंत गिरफ्तार कर फांसी पर लटका दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की प्रकृति और उसके कारणों के संबंध में विभिन्न ब्रिटिश एवं भारतीय इतिहासकारों द्वारा दिए गए प्रसिद्ध मतों और कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. "यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था" - आर.सी. मजूमदार 2. "यह विद्रोह पूर्णतः देशभक्ति से रहित और स्वार्थी सैनिकों का एक ऐसा संघर्ष था जिसका कोई उच्च उद्देश्य नहीं था" - सर जॉन सीले 3. "जिस तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम को वीर सावरकर ने महिमामंडित किया, वह वास्तव में एक सुनियोजित राष्ट्रीय षड्यंत्र था जिसका नेतृत्व केवल सामंती तत्वों ने किया" - बेंजामिन डिजरायली 4. "यह धर्म का युद्ध था जो बर्बरता और सभ्यता के बीच एक क्रूर संघर्ष के रूप में लड़ा गया था" - टी.आर. होम्स उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?

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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों—विशेष रूप से पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में हुई क्रांतिकारी गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए ऐतिहासिक विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता और क्रांतिकारी पीर अली खान ने किया था, जिनके नेतृत्व में हुए इस संघर्ष के दौरान अफीम एजेंट डॉ. लायेल मारा गया था। 2. दानापुर छावनी के 7वें, 8वें और 40वें रेजिमेंट के भारतीय सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया था और सोन नदी पार करके सीधे आरा की ओर कूच किया था, जहाँ उन्होंने बाबू वीर कुंवर सिंह की सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ एक मजबूत संयुक्त मोर्चा बनाया था। 3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में भी विद्रोही सिपाहियों और स्थानीय नागरिकों में भारी असंतोष देखा गया, जहाँ मुजफ्फरपुर में यूरोपीय अधिकारियों पर हमले हुए, जबकि छपरा में ब्रिटिश संचार व्यवस्था और सरकारी भवनों को निशाना बनाया गया। 4. दानापुर और पटना के विद्रोही सैनिकों के दमन के लिए ब्रिटिश सरकार ने केवल स्थानीय अधिकारियों की सहायता ली थी और बिहार में किसी भी अतिरिक्त यूरोपीय सेना या नौसेना के टुकड़ी का प्रयोग नहीं किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन एवं तत्पश्चात प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में हुए नवाचारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्वदेशी आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा की आवश्यकता को पूरा करने के लिए अगस्त 1906 में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) का गठन किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य साहित्यिक और वैज्ञानिक शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी शिक्षा प्रदान करना था। 2. इस आंदोलन के रचनात्मक कार्यक्रमों के तहत आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय ने स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वक्र्स' (Bengal Chemical and Pharmaceutical Works) की स्थापना की थी। 3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान सांस्कृतिक क्षेत्र में हुए पुनर्जागरण के अंतर्गत अवनिंद्रनाथ टैगोर ने 'इंडियन सोसाइटी ऑफ ओरिएंटल आर्ट' की स्थापना की, तथा उनकी प्रसिद्ध पेंटिंग 'भारत माता' ने राष्ट्रवादियों के बीच अपार लोकप्रियता हासिल की। 4. स्वदेशी आंदोलन का प्रभाव केवल बंगाल तक ही सीमित रहा, और बंबई, मद्रास या पंजाब जैसे अन्य प्रांतों के नेताओं ने ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार के प्रस्ताव को पूर्णतः अस्वीकार कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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मुगलकालीन प्रशासनिक और सैन्य व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अकबर द्वारा प्रारंभ की गई मनसबदारी व्यवस्था आंशिक रूप से मंगोलों की दशमलव पद्धति पर आधारित थी, जिसमें मनसबदारों के पद 'जात' और 'सवार' श्रेणियों में विभाजित थे, जहाँ 'जात' अधिकारी के व्यक्तिगत वेतन और पद को इंगित करता था, जबकि 'सवार' उसके द्वारा रखे जाने वाले घोड़ों और घुड़सवार सैनिकों की संख्या को निर्धारित करता था। 2. जहांगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में एक नया प्रावधान 'दु-अस्मेह सिंह-अस्मेह' (दो घोड़े या तीन घोड़े वाले) जोड़ा गया था, जिसके तहत चुनिंदा मनसबदारों को बिना अतिरिक्त 'जात' रैंक बढ़ाए ही अधिक 'सवार' रखने की अनुमति दी जाती थी। 3. शाहजहां के शासनकाल के दौरान मनसबदारी प्रणाली में 'माहवार' (Monthly scale) प्रणाली की शुरुआत की गई, जिसके अंतर्गत यदि जागीर से होने वाली आय छह महीने के बराबर होती थी, तो उसे 'شش ماهہ' (छमाही) जागीर कहा जाता था। 4. औरंगजेब के शासनकाल में दक्षिण के अभियानों के दौरान मराठों और डेक्कनी रियासत के अमीरों को अत्यधिक संख्या में मनसब देने के कारण जागीरों का भारी संकट (Jagirdari Crisis) उत्पन्न हो गया था, क्योंकि उपलब्ध जागीरें मनसबदारों की संख्या से बहुत कम पड़ गई थीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और उसके विरोध में उपजे स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में हुए संस्थागत परिवर्तनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन के निर्णय के विरोध में स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक शुरुआत के लिए 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के ऐतिहासिक टाउन हॉल में आयोजित बैठक में केवल ब्रिटिश वस्त्रों के बहिष्कार का निर्णय लिया गया था, जबकि विदेशी शिक्षण संस्थानों, अदालतों और उपाधियों के बहिष्कार को इस आंदोलन के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया था। 2. स्वदेशी आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा की आवश्यकता को पूरा करने के लिए अगस्त 1906 में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) का गठन किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य साहित्यिक और वैज्ञानिक शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी और प्रायोगिक शिक्षा प्रदान करना था। 3. स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय ने 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वक्र्स' (Bengal Chemical and Pharmaceutical Works) की स्थापना की थी, जो स्वदेशी उपक्रमों के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हुई। 4. स्वदेशी आंदोलन के दौरान सांस्कृतिक पुनर्जागरण के तहत अवनिंद्रनाथ टैगोर ने 'इंडियन सोसाइटी ऑफ ओरिएंटल आर्ट' की स्थापना की, तथा उनकी प्रसिद्ध पेंटिंग 'भारत माता' ने राष्ट्रवादियों के बीच अपार लोकप्रियता हासिल की। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वास्को डी गामा की भारत की दूसरी यात्रा (वर्ष 1502) के दौरान उसने कोचीन में पुर्तगालियों की पहली फैक्ट्री या कारखाने की स्थापना की थी, जबकि पुर्तगालियों द्वारा भारत में निर्मित पहला दुर्ग 'सैन एंजेलो किला' कन्नूर में बनाया गया था। 2. फ्रांसिस्को डी अल्मेडा भारत में पहला पुर्तगाली गवर्नर था, जिसने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (नीले पानी की नीति) का प्रतिपादन किया था, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर पर पुर्तगाली प्रभुत्व स्थापित करना और व्यापारिक एकाधिकार सुनिश्चित करना था। 3. अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने वर्ष 1510 में बीजापुर के आदिल शाह से गोवा को छीनकर पुर्तगाली नियंत्रण में ले लिया था और पुर्तगालियों को भारतीय महिलाओं के साथ विवाह करने के लिए प्रोत्साहित किया था। 4. नुनीकुओ (Nuno da Cunha) के गवर्नर बनने के बाद पुर्तगालियों ने वर्ष 1530 में अपना आधिकारिक मुख्यालय कोचीन से स्थानांतरित कर गोवा बना लिया तथा हुगली और बेसिन के क्षेत्रों पर भी अपना प्रभाव फैलाया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

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