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UPTET
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भूगर्भीय संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उत्तर प्रदेश का सबसे दक्षिणी भाग प्राचीनतम गोंडवाना लैंड के प्रायद्वीपीय पठार का हिस्सा है, जिसे 'बुंदेलखंड का पठार' कहा जाता है।
- 2. विंध्य पर्वत श्रेणी का विस्तार उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर, सोनभद्र और बांदा जिलों के कुछ हिस्सों तक पाया जाता है, जो मुख्य रूप से बलुआ पत्थर के लिए प्रसिद्ध है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उत्तर प्रदेश की भूगर्भिक संरचना के अनुसार, राज्य का दक्षिणी भाग प्रायद्वीपीय पठार का हिस्सा है। बुंदेलखंड का पठार प्राचीनतम गोंडवाना लैंड का ही भाग है जो नीस और ग्रेनाइट चट्टानों से निर्मित है, अतः कथन 1 बिल्कुल सही है। इसके अलावा, राज्य के दक्षिण में सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली और बांदा जिलों में विंध्यन क्रम की चट्टानें पाई जाती हैं, जहाँ बलुआ पत्थर और चूना पत्थर प्रमुखता से मिलते हैं, अतः कथन 2 भी सही है। इसलिए सही विकल्प '1 और 2 दोनों' (c) है।
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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के अंतर्गत जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पियाजे के अनुसार बालक का संज्ञानात्मक विकास निरंतर न होकर अवस्थाओं (Stages) के क्रम में होता है, जिनमें प्रत्येक अवस्था गुणात्मक रूप से भिन्न होती है और सभी बालकों में इन अवस्थाओं का क्रम सार्वभौमिक तथा अपरिवर्तनीय होता है।
2. 'पूर्व संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage - लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बालकों में 'संरक्षण' (Conservation) का गुण पूरी तरह विकसित हो जाता है, जिससे वे यह समझ जाते हैं कि किसी वस्तु के आकार या रूप में परिवर्तन करने पर भी उसकी मात्रा या आयतन अपरिवर्तित रहता है।
3. 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage - 11 वर्ष से आगे) में बालक अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking), निगमनात्मक तर्क (Deductive Reasoning) और परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक समस्याओं को हल करने की क्षमता अर्जित कर लेता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम障害' (Learning Disabilities) या विशिष्ट अधिगम अक्षमताओं के संदर्भ में, जब किसी बालक को दृश्य-श्रव्य संकेतों को एकीकृत करने, जटिल स्थानिक संबंधों (Spatial Relationships) को समझने, और विशेष रूप से ज्यामितीय आकृतियों व मानचित्रों का सही अर्थ निकालने में गंभीर कठिनाई होती है, तो मनोवैज्ञानिक रूप से इस विशिष्ट गैर-मौखिक अधिगम विकार को निम्नलिखित में से किस नाम से जाना जाता है?
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भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के अंतर्गत 'असहयोग आंदोलन' (Non-Cooperation Movement) और 'खिलाफत आंदोलन' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव को औपचारिक रूप से दिसंबर 1920 में आयोजित 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन' में अनुमोदित किया गया था, जिसकी अध्यक्षता सी. आर. दास (चित्तरंजन दास) ने की थी और इस प्रस्ताव को उन्होंने ही प्रस्तुत किया था।
2. इस आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी ने सरकार द्वारा प्रदत्त 'कैसर-ए-हिंद' (Kaiser-i-Hind) की उपाधि वापस कर दी थी, जबकि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अपनी 'नाइटहुड' (Knighthood) की उपाधि पंजाब के जलियांवाला बाग नरसंहार के विरोध में त्याग दी थी।
3. फरवरी 1922 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के 'चौरी-चौरा' नामक स्थान पर हुई हिंसक घटना के कारण महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन को अचानक वापस ले लिया था, जिसके परिणामस्वरूप चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने कांग्रेस से अलग होकर 'स्वराज पार्टी' की स्थापना की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता' (Learning Disabilities) और 'समावेशी शिक्षा' (Inclusive Education) के संदर्भ में, सैमुअल किर्क (Samuel Kirk) द्वारा पहली बार प्रतिपादित शब्द 'लर्निंग डिसेबिलिटी' के अंतर्गत आने वाली प्रमुख विशिष्ट अक्षमताओं—जैसे 'डिस्लेक्सिया' (Dyslexia), 'डिस्ग्राफिया' (Dysgraphia), 'डिस्कैल्कुलिया' (Dyscalculia), 'डिस्प्रैक्सिया' (Dyspraxia), और 'अफेसिया/डिस्फेसिया' (Aphasia/Dysphasia)—के न्यूरोलॉजिकल और मनोवैज्ञानिक स्वरूप, तथा विशेष आवश्यकता वाले बालकों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act 2009) एवं 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' (RPWD Act 2016) के अंतर्गत परिभाषित प्रावधानों के पारस्परिक अंतर्संबंधों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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बाल विकास के विभिन्न सिद्धांतों के अंतर्गत 'विकास की भविष्यवाणी की जा सकती है' (Development is Predictable) और 'विकास का वर्तुल या चक्रीय क्रम' (Spiral, not Linear, Development) की अवधारणाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विकास की भविष्यवाणी करने का सिद्धांत यह स्पष्ट करता है कि व्यक्तिगत भिन्नताओं (Individual Differences) के बावजूद, प्रत्येक बालक के विकास की गति और उसके भावी प्रतिमानों (Patterns) का पूर्व-आकलन किया जा सकता है, क्योंकि विकास हमेशा एक निश्चित और क्रमिक दिशा (दिशात्मकता के नियम) का अनुसरण करता है।
2. 'विकास का वर्तुल या चक्रीय क्रम' यह दर्शाता है कि बालकों का विकास एक सीधी या रैखिक रेखा (Linear Path) में लगातार आगे नहीं बढ़ता है, बल्कि यह कभी आगे (प्रगति) और कभी पीछे हटकर (स्थायित्व या सुदृढ़ीकरण) एक सर्पीले या वर्तुल मार्ग का अनुसरण करता है।
3. विकास के वर्तुल क्रम के अंतर्गत, जब बालक किसी नई कौशल या क्षमता को सीखता है, तो वह उस कौशल को अधिक परिपक्व और स्थायी बनाने के लिए पीछे के अनुभवों को पूरी तरह से त्याग देता है और कभी भी पुराने व्यवहारों की पुनरावृत्ति नहीं करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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