शिक्षा दर्शन एवं शिक्षा चिंतक
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सामाजिक अध्ययन (Social Studies) शिक्षण के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' (Civil Disobedience Movement) और 'गांधी-इरविन समझौते' (Gandhi-Irwin Pact) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत महात्मा गांधी द्वारा 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से प्रसिद्ध 'दांडी मार्च' (Salt March) के साथ की गई थी, जिसके तहत 6 अप्रैल 1930 को दांडी में नमक कानून तोड़कर इस आंदोलन का देशव्यापी विस्तार किया गया था।
- 2. 5 मार्च 1931 को हस्ताक्षरित 'गांधी-इरविन समझौते' के तहत ब्रिटिश सरकार ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी राजनीतिक बंदियों (हिंसक अपराधों में लिप्त व्यक्तियों को छोड़कर) को रिहा करने और समुद्र तट के किनारे बसे लोगों को बिना कर के अपने घरेलू उपयोग के लिए नमक बनाने की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की थी।
- 3. कांग्रेस की ओर से महात्मा गांधी ने इस समझौते के बाद कांग्रेस के कराची अधिवेशन (1931) की अध्यक्षता की थी और प्रथम गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए लंदन गए थे, जहाँ उन्होंने सांप्रदायिक पंचाट (Communal Award) के मुद्दे पर दलितों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल की मांग का पूर्ण समर्थन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: महात्मा गांधी ने 12 मार्च 1930 को अपने 78 चुने हुए अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से दांडी यात्रा शुरू की थी और 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुंचकर नमक कानून तोड़ा था, यहीं से सविनय अवज्ञा आंदोलन की औपचारिक शुरुआत हुई थी। कथन 2 सही है: 5 मार्च 1931 को वायसराय लॉर्ड इरविन और महात्मा गांधी के मध्य हुए 'गांधी-इरविन समझौते' (जिसे दिल्ली समझौता भी कहा जाता है) के अंतर्गत सरकार ने हिंसा के आरोपियों को छोड़कर सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करने तथा समुद्र तटीय क्षेत्रों में व्यक्तिगत एवं घरेलू उपयोग के लिए नमक बनाने की छूट देने की बात स्वीकार की थी। कथन 3 गलत है: गांधी-इरविन समझौते के बाद कांग्रेस का कराची अधिवेशन मार्च 1931 में हुआ था जिसकी अध्यक्षता वल्लभभाई पटेल ने की थी, न कि महात्मा गांधी ने। इसके अलावा, गांधीजी ने 'द्वितीय' गोलमेज सम्मेलन (1931) में भाग लिया था, न कि प्रथम गोलमेज सम्मेलन में (कांग्रेस ने प्रथम गोलमेज सम्मेलन का बहिष्कार किया था)। साथ ही, गांधीजी ने रेम्जे मैकडोनाल्ड के सांप्रदायिक पंचाट (Communal Award) में दलितों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल की मांग का कड़ा विरोध किया था और इसके विरोध में येरवड़ा जेल में आमरण उपवास भी किया था।
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सामाजिक अध्ययन (Social Studies) शिक्षण के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' (Civil Disobedience Movement) और 'गो गोलमेज सम्मेलन' (Round Table Conferences) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत महात्मा गांधी द्वारा 12 मार्च 1930 को प्रसिद्ध 'दांडी मार्च' (Dandi March) के साथ की गई थी, जिसमें गांधीजी ने अपने 78 चुने हुए अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से दांडी तक की लगभग 240 मील की यात्रा पैदल तय करके 6 अप्रैल 1930 को नमक कानून तोड़ा था।
2. प्रथम गोलमेज सम्मेलन (नवंबर 1930 - जनवरी 1931) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से भाग लिया था, क्योंकि इस सम्मेलन के आयोजन से पूर्व ही वायसराय इरविन और महात्मा गांधी के बीच 'गांधी-इरविन समझौता' हो चुका था जिसके तहत कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित कर दिया था।
3. लंडन में आयोजित तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भाग लेने वाले एकमात्र भारतीय नेता डॉ. बी. आर. अम्बेडकर थे, जबकि कांग्रेस ने केवल दूसरे गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधी को अपने एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में शामिल किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन तथा समाज सुधार के इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा वर्ष 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा का विरोध करना, एक ईश्वरवाद का प्रचार करना और हिंदू समाज में व्याप्त कुप्रथाओं जैसे सती प्रथा (जिसे 1829 में विलियम बेंटिक द्वारा कानून बनाकर अवैध घोषित किया गया था) का उन्मूलन करना था।
2. वर्ष 1867 में केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से बंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा 'प्रार्थना समाज' की स्थापना की गई थी, जिसका प्रमुख उद्देश्य अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देना, विधवा पुनर्विवाह का समर्थन करना और महिलाओं की शिक्षा तथा सामाजिक स्थिति में सुधार करना था।
3. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया था, और उन्होंने पाखंड खंडिनी पताका फहराते हुए मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, अवतारवाद और जन्म आधारित जाति व्यवस्था का पुरजोर खंडन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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सामाजिक अध्ययन शिक्षण के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के 'असहयोग आंदोलन' (Non-Cooperation Movement) के स्थगन और उसके प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फरवरी 1922 में चौरी-चौरा (गोरखपुर, उत्तर प्रदेश) की हिंसक घटना के कारण महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन को अचानक वापस ले लिया था। 2. आंदोलन के स्थगन से क्षुब्ध होकर चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने कांग्रेस के भीतर ही रहकर विधानमंडलों में प्रवेश करने के उद्देश्य से वर्ष 1923 में 'स्वराज पार्टी' (Swaraj Party) की स्थापना की थी। 3. इस आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश (संयुक्त प्रांत) में किसानों का 'एका आंदोलन' (Eka Movement) मुख्य रूप से हरदोई, बहराइच और सीतापुर जिलों में लगान की अधिकता और बेगार के खिलाफ चलाया गया एक प्रमुख किसान आंदोलन था। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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सामाजिक अध्ययन शिक्षण के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के 'सविनाय अवज्ञा आंदोलन' (Civil Disobedience Movement) के चरण में, वर्ष 1930 में महात्मा गांधी द्वारा शुरू किए गए 'दांडी मार्च' (Dandi March) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह मार्च साबरमती आश्रम से दांडी तट तक कुल 240 मील की पैदल यात्रा थी, जिसमें 78 चुने हुए अनुयायी शामिल थे। 2. यह यात्रा 12 मार्च 1930 को आरंभ हुई और 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुंचकर नमक कानून तोड़ा गया। 3. इस आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश (तत्कालीन संयुक्त प्रांत) में कर न अदायगी (No-Tax Campaign) का नेतृत्व मुख्य रूप से जवाहरलाल नेहरू और गोविंद वल्लभ पंत ने जमींदारों और किसानों को संगठित करके किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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