शिक्षा दर्शन एवं शिक्षा चिंतक
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सामाजिक अध्ययन (Social Studies) शिक्षण के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के 'असहयोग आंदोलन' (Non-Cooperation Movement) और 'खिलाफत आंदोलन' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव को औपचारिक रूप से दिसंबर 1920 में आयोजित कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन में अनुमोदित किया गया था, जिसकी अध्यक्षता सी. विजयराघवाचारी ने की थी और इस अधिवेशन में असहयोग के कार्यक्रम को पूरी तरह स्वीकार किया गया था।
- 2. इस आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी ने ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रदत्त 'कैसर-ए-हिंद' (Kaiser-i-Hind) की उपाधि वापस कर दी थी, जबकि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने नाइटहुड (Sir) की उपाधि का त्याग कर दिया था।
- 3. चौरी-चौरा कांड (5 फरवरी 1922) की घटना से क्षुब्ध होकर महात्मा गांधी ने बारडोली में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में असहयोग आंदोलन को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा की, जिसके कारण चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू जैसे नेताओं ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए 'स्वराज पार्टी' के गठन का विरोध किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: सितंबर 1920 के कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में असहयोग का प्रस्ताव लाल लाजपत राय की अध्यक्षता में प्रस्तुत हुआ था, लेकिन दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन (अध्यक्ष सी. विजयराघवाचारी) में यह प्रस्ताव पूरी तरह और औपचारिक रूप से अनुमोदित व पारित किया गया। कथन 2 सही है: असहयोग आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी ने 'कैसर-ए-हिंद' तथा जमनालाल बजाज ने 'रायबहादुर' की उपाधि लौटाई थी, और रबीन्द्रनाथ टैगोर ने जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद ही अपनी 'नाइटहुड' उपाधि त्याग दी थी जिसे असहयोग आंदोलन के समय भी प्रभावी माना गया। कथन 3 गलत है: चौरी-चौरा की घटना के बाद जब गांधीजी ने आंदोलन वापस लिया, तो चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू इस निर्णय से अत्यंत क्षुब्ध हुए और उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर वर्ष 1923 में 'स्वराज पार्टी' की स्थापना की थी, न कि इसका विरोध किया था।
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व्यक्तित्व (Personality) के शील गुण (Trait) उपागम के संदर्भ में, गॉर्डन ऑलपोर्ट (Gordon Allport) द्वारा वर्गीकृत शील गुणों के तीन स्तरों — कार्डिनल शील गुण (Cardinal Traits), केंद्रीय शील गुण (Central Traits), और द्वितीयक शील गुण (Secondary Traits) — के बीच निम्नलिखित में से कौन सा अंतर उनके मनोवैज्ञानिक प्रभाव और व्यापकता का सबसे सटीक विश्लेषण प्रस्तुत करता है?
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गॉर्डन ऑलपोर्ट (Gordon Allport) द्वारा प्रतिपादित शील गुण (Trait) सिद्धांत के संदर्भ में, व्यक्तित्व के शील गुणों को उन्होंने किन तीन श्रेणियों—कार्डिनल (Cardinal), सेंट्रल (Central), और सेकेंडरी (Secondary)—में वर्गीकृत किया है? इनमें से 'कार्डिनल शील गुण' की सबसे मुख्य विशेषता निम्नलिखित में से कौन सी है?
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गॉर्डन ऑलपोर्ट (Gordon Allport) के शील गुण (Trait) सिद्धांत के संदर्भ में, व्यक्तित्व के निर्धारण में 'प्रमुख शील गुण' (Cardinal Traits), 'केंद्रीय शील गुण' (Central Traits), और 'गौण शील गुण' (Secondary Traits) के बीच निम्नलिखित में से कौन सा विश्लेषणात्मक वर्गीकरण और अंतर सबसे अधिक सटीक है?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर महात्मा गांधी चंपारण आए थे, जहाँ 'तीनकथा पद्धति' के अंतर्गत यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों से उनकी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करने का अनुबंध कराया जाता था, जिसके विरुद्ध यह सत्याग्रह भारत में गांधीजी का पहला सफल सविनय प्रयोग बना।
2. चंपारण जाँच समिति (Champarana Agrarian Committee) के एक सदस्य के रूप में ब्रिटिश सरकार द्वारा महात्मा गांधी को भी इस आयोग का सदस्य मनोनीत किया गया था, तथा इस समिति की संस्तुतियों के आधार पर 'चंपारण कृषि अधिनियम, 1917' पारित किया गया, जिसके तहत तीनकथा प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया और अवैध रूप से वसूले गए धन का एक हिस्सा किसानों को वापस लौटाया गया।
3. चंपारण सत्याग्रह की सफलता के दौरान महात्मा गांधी के साथ बराज किशोर प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, आचार्य कृपलानी और मधुलि जैसे स्थानीय प्रबुद्ध वकीलों और नेताओं ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया, जिससे बिहार में राष्ट्रीय राजनीति की एक मजबूत नींव पड़ी।
4. वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन के आगमन के समय बिहार में विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के वैकल्पिक संस्थानों के रूप में 'बिहार नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई, जिसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कार्य किया, और इसी काल में सदाकत आश्रम से मजहरुल हक के संपादन में 'द मदरलैंड' अखबार निकाला गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन तथा समाज सुधार के इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा वर्ष 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा का विरोध करना, एक ईश्वरवाद का प्रचार करना और हिंदू समाज में व्याप्त कुप्रथाओं जैसे सती प्रथा (जिसे 1829 में विलियम बेंटिक द्वारा कानून बनाकर अवैध घोषित किया गया था) का उन्मूलन करना था।
2. वर्ष 1867 में केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से बंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा 'प्रार्थना समाज' की स्थापना की गई थी, जिसका प्रमुख उद्देश्य अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देना, विधवा पुनर्विवाह का समर्थन करना और महिलाओं की शिक्षा तथा सामाजिक स्थिति में सुधार करना था।
3. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया था, और उन्होंने पाखंड खंडिनी पताका फहराते हुए मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, अवतारवाद और जन्म आधारित जाति व्यवस्था का पुरजोर खंडन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और वैदिक काल के अध्ययन-अध्यापन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वैदिक शिक्षा प्रणाली में औपचारिक शिक्षा की प्राप्ति से पूर्व बालक का 'उपत्ययन' (Upanayana) संस्कार संपन्न कराया जाता था, जिसे 'नयन संस्कार' भी कहा जाता था, और इस संस्कार के बाद बालक 'द्विज' (दो बार जन्मा हुआ) की संज्ञा प्राप्त करता था तथा गुरु के पास जाकर शिक्षा ग्रहण करता था।
2. ऋग्वैदिक काल में उच्च शिक्षा के अंतर्गत महिलाओं को भी अध्ययन का पूर्ण अधिकार प्राप्त था, जिसके तहत गार्गी, मैत्रेयी और अपाला जैसी विदुषी महिलाओं (ब्रह्मवादिनी) ने उच्च कोटि के दार्शनिक ज्ञान और शास्त्रों में महारत हासिल की थी।
3. वैदिक काल में शिक्षा सत्र की शुरुआत 'उपाकर्म' (Upakarma) अनुष्ठान के साथ श्रावण मास की पूर्णिमा को होती थी, जबकि शिक्षा सत्र का समापन 'उत्सर्जन' (Utsarjana) समारोह के साथ पौष या माघ मास की पूर्णिमा के दिन होता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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सामाजिक अध्ययन शिक्षण के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' (Civil Disobedience Movement) और वर्ष 1930-1931 के दौरान उत्तर प्रदेश (संयुक्त प्रांत) में चले 'कर-बंदी आंदोलन' (No-Tax Campaign) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1930 में महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश में कांग्रेस द्वारा लगान और मालगुजारी न देने के लिए 'कर-बंदी आंदोलन' चलाया गया था, जिसका नेतृत्व मुख्य रूप से जवाहरलाल नेहरू और गोविंद वल्लभ पंत जैसे नेताओं ने किया था।
2. उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (प्रयागराज) और रायबरेली जैसे जिलों में किसानों ने जमींदारों और ब्रिटिश सरकार को भू-राजस्व (Land Revenue) देने से स्पष्ट मना कर दिया था।
3. प्रथम गोलमेज सम्मेलन (1930) में कांग्रेस की ओर से महात्मा गांधी ने भाग लिया था, जहाँ उत्तर प्रदेश के कर-बंदी आंदोलन को वापस लेने की शर्त पर गांधी-इरविन समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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सामाजिक अध्ययन शिक्षण के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के 'असहयोग आंदोलन' (Non-Cooperation Movement) के स्थगन और उसके प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फरवरी 1922 में चौरी-चौरा (गोरखपुर, उत्तर प्रदेश) की हिंसक घटना के कारण महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन को अचानक वापस ले लिया था। 2. आंदोलन के स्थगन से क्षुब्ध होकर चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने कांग्रेस के भीतर ही रहकर विधानमंडलों में प्रवेश करने के उद्देश्य से वर्ष 1923 में 'स्वराज पार्टी' (Swaraj Party) की स्थापना की थी। 3. इस आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश (संयुक्त प्रांत) में किसानों का 'एका आंदोलन' (Eka Movement) मुख्य रूप से हरदोई, बहराइच और सीतापुर जिलों में लगान की अधिकता और बेगार के खिलाफ चलाया गया एक प्रमुख किसान आंदोलन था। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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