BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
27 views

भारत में दलीय व्यवस्था कैसी है?

Detailed Explanation

भारत में बहुदलीय (Multi-party) व्यवस्था है।
Share:

Related Questions

→ भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की शक्तियों, अधिकार क्षेत्र और न्यायिक समीक्षा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि या तथ्य के किसी ऐसे व्यापक सार्वजनिक महत्व के प्रश्न पर, जो उत्पन्न हुआ है या उत्पन्न होने की संभावना है, उच्चतम न्यायालय से परामर्श कर सके, और उच्चतम न्यायालय के लिए यह अनिवार्य है कि वह ऐसे प्रत्येक परामर्श संबंधी संदर्भ पर अपना मत राष्ट्रपति को प्रेषित करे। 2. उच्चतम न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) से संबंधित शक्ति के अंतर्गत न्यायालय को सिविल और आपराधिक दोनों प्रकार की अवमानना के लिए दंडित करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति संविधान के अनुच्छेद 129 के तहत उसे एक 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) का दर्जा प्रदान किए जाने से अंतर्निहित रूप से प्राप्त होती है। 3. अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रदत्त रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) उच्चतम न्यायालय का एक मौलिक अधिकार है, किंतु यह क्षेत्राधिकार अनन्य (Exclusive) नहीं है, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों को भी मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए समान रूप से रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) का अर्थ क्या है? → मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties) संविधान के किस भाग में वर्णित हैं? → भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के अंतर्गत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित विभिन्न अधिनियमों और उनके प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 के माध्यम से कंपनी के राजनीतिक और व्यापारिक कार्यों को पृथक किया गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (नियंत्रण बोर्ड) की स्थापना की गई जो राजनीतिक मामलों की देखरेख करता था, और इसे ब्रिटिश कैबिनेट के एक सदस्य के अधीन रखा गया। 2. चार्टर अधिनियम, 1833 द्वारा बंगाल के गवर्नर-जनरल को 'भारत का गवर्नर-जनरल' बना दिया गया, तथा इस अधिनियम ने मद्रास और बॉम्बे के गवर्नरों की विधायी शक्तियों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया, जिससे भारत में केंद्रीय केंद्रीकृत प्रशासन की नींव पड़ी। 3. चार्टर अधिनियम, 1853 के द्वारा गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी और प्रशासनिक कार्यों को स्पष्ट रूप से अलग किया गया, जिसके तहत परिषद में छह नए पार्षदों को जोड़ा गया जिन्हें 'विधान पार्षद' (Legislative Councillors) कहा गया, और सिविल सेवकों की भर्ती के लिए खुली प्रतियोगिता प्रणाली की शुरुआत की गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 74(1) के अनुसार राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा, और राष्ट्रपति अपने कृत्यों का प्रयोग करने में ऐसी सलाह के अनुसार कार्य करेगा, किंतु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद से ऐसी सलाह पर 'पुनर्विचार' करने की अपेक्षा कर सकता है और राष्ट्रपति पुनर्विचार के पश्चात दी गई ऐसी सलाह के अनुसार ही कार्य करने के लिए विवश होता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 75(1) के तहत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा इसके लिए यह संवैधानिक रूप से अनिवार्य है कि नियुक्त होने वाला व्यक्ति शपथ ग्रहण के समय संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) का अनिवार्य रूप से सदस्य हो। 3. संविधान के अनुच्छेद 63 के अनुसार भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा, जो पदेन राज्यसभा का सभापति होता है, और उपराष्ट्रपति के पद की रिक्ति के दौरान या जब उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर रहा हो, उस अवधि में वह राज्यसभा के सभापति के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करेगा और उसे राज्यसभा के सभापति को मिलने वाले वेतन या भत्ते प्राप्त करने का अधिकार नहीं होगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.