बाल अध्ययन की विधियाँ
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और बौद्ध शिक्षा पद्धति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बौद्ध मठों या विहारों में शिक्षा की शुरुआत 'प्रव्रज्या' (Pravrajya) संस्कार के साथ होती थी, जिसे पूरा करने के बाद लगभग 8 वर्ष की आयु में बालक को संघ में प्रवेश मिलता था, और वह 'श्राणेर' (Sramanera) कहलाता था।
- 2. बौद्ध शिक्षा प्रणाली में उच्च शिक्षा प्राप्ति के उपरांत लगभग 20 वर्ष की आयु में 'उपासंपादा' (Upasampada) संस्कार संपन्न कराया जाता था, जिसके पश्चात छात्र पूर्ण भिक्षु बन जाता था और उसे संघ की सदस्यता प्राप्त होती थी।
- 3. प्राचीन नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय बौद्ध शिक्षा प्रणाली के प्रमुख केंद्र थे, जहाँ प्रवेश पाने के लिए विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की प्रवेश परीक्षा या साक्षात्कार से नहीं गुजरना पड़ता था, बल्कि वे स्वतंत्र रूप से नामांकित हो जाते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि बौद्ध शिक्षा प्रणाली में मठों या विहारों में प्रवेश के लिए 'प्रव्रज्या' संस्कार कराया जाता था, जो प्रायः 8 वर्ष की आयु में होता था और इसके बाद छात्र 'श्राणेर' (नौसिखिया भिक्षु) बनता था। कथन 2 सही है क्योंकि लगभग 20 वर्ष की आयु पूरी होने पर शिक्षा के अगले चरण के लिए 'उपासंपादा' संस्कार होता था, जिसके बाद व्यक्ति पूर्ण भिक्षु बन जाता था। कथन 3 गलत है क्योंकि नालंदा, विक्रमशिला और तक्षशिला जैसे प्रसिद्ध बौद्ध विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाना अत्यंत कठिन था; नालंदा जैसे संस्थानों में प्रवेश के लिए एक कठिन द्वार-पंडित (प्रवेश परीक्षा) द्वारा साक्षात्कार लिया जाता था, जिसमें केवल योग्य विद्यार्थियों को ही प्रवेश मिलता था।
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पृथ्वी की आंतरिक संरचना, प्लेट विवर्तनिकी (Plate Tectonics) तथा ज्वालामुखी एवं…
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पृथ्वी की आंतरिक संरचना, प्लेट विवर्तनिकी (Plate Tectonics) तथा ज्वालामुखी एवं भूकम्प की घटनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रशांत महासागर की परिधि पर स्थित 'अग्नि वलय' (Ring of Fire) मुख्य रूप से अभिसारी प्लेट किनारों (Convergent Plate Boundaries) का क्षेत्र है, जहाँ अधिकांश सक्रिय ज्वालामुखी और विश्व के लगभग 75% से अधिक भूकम्प दर्ज किए जाते हैं।
2. रिक्टर पैमाना (Richter Scale) भूकम्प की तीव्रता (Magnitude) को मापने का एक लघुगणकीय (Logarithmic) पैमाना है, जिसका अर्थ है कि पैमाने पर प्रत्येक अगली पूर्ण संख्या की वृद्धि पिछले स्तर की तुलना में ऊर्जा रिलीज को लगभग 32 गुना बढ़ा देती है।
3. भूकम्प के दौरान उत्पन्न होने वाली प्राथमिक तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगे होती हैं जो ठोस, तरल और गैस—तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि द्वितीयक तरंगें (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगे होती हैं और वे केवल ठोस माध्यम में ही गमन कर सकती हैं।
4. मध्य-महासागरीय कटक (Mid-Oceanic Ridge) अपसारी प्लेट किनारों (Divergent Plate Boundaries) का सबसे अच्छा उदाहरण है, जहाँ मैग्मा के ऊपर उठने से नए महासागरीय क्रोड का निर्माण होता है और यहाँ आने वाले भूकम्प सामान्यतः गहरे फोकस (Deep-focus earthquakes) वाले होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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साक्षात्कार और केन्द्रित समूह चर्चाएँ किस प्रकार की मूल्यांकन तकनीक के तहत आती है?
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