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जीन पियाजे
Asked 2 months ago · Viewed 18 times

जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) की निम्नलिखित विशेषताओं पर विचार कीजिए:

  1. 1. इस अवस्था में बालकों में 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-deductive Reasoning) की क्षमता विकसित होती है, जिससे वे अमूर्त समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न संभावनाओं और परिकल्पनाओं का तार्किक रूप से परीक्षण कर सकते हैं।
  2. 2. इस चरण के दौरान किशोरों में 'अहंप्रकेंद्रिता' (Adolescent Egocentrism) की भावना उत्पन्न होती है, जिसके अंतर्गत वे 'काल्पनिक दर्शक' (Imaginary Audience) और 'व्यक्तिगत कथा' (Personal Fable) जैसी मानसिक अनुभूतियों का अनुभव करते हैं।
  3. 3. इस अवस्था में पहुँचने पर बालक बिना किसी भौतिक या मूर्त सहारे के केवल भाषाई प्रतीकों और मौखिक बयानों के आधार पर ही तार्किक निष्कर्ष निकालने में पूरी तरह सक्षम हो जाते हैं, और संरक्षण (Conservation) का नियम इस अवस्था से बहुत पहले ही समाप्त हो चुका होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (लगभग 11 वर्ष से वयस्कता तक) में बालकों में परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क (Hypothetico-deductive reasoning) की क्षमता विकसित हो जाती है। कथन 2 भी सही है क्योंकि डेविड एल्किंड द्वारा वर्णित 'किशोर अहंप्रकेंद्रिता' (Adolescent Egocentrism), जिसमें 'काल्पनिक दर्शक' और 'व्यक्तिगत कथा' शामिल हैं, इसी अवस्था की प्रमुख विशेषता है। कथन 3 आंशिक रूप से गलत है क्योंकि संरक्षण (Conservation) का नियम इस अवस्था में समाप्त नहीं होता, बल्कि यह बहुत पहले ही 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' में पूरी तरह से विकसित और स्थिर हो चुका होता है। अतः केवल कथन 1 और 2 सही हैं।
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→ पियाजे के अनुसार, 'संवेगात्मक विकास' (Emotional Development) किस अवस्था में सबसे अधिक सामाजिक होता है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) की तात्विक और तार्किक विशेषताओं का गहन विश्लेषण करने पर, यदि एक किशोर अपनी सोच में 'निगमनात्मक तर्क' (Deductive Reasoning), 'परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक चिंतन' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) का पूर्ण रूप से उपयोग करने में सक्षम हो जाता है, तो इस अवस्था की अन्य विशिष्ट तात्विक एवं संज्ञानात्मक गतिकी के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) की सबसे प्रमुख और विशिष्ट विशेषता 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) तथा 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) का उभरना है। जब एक adolescent (किशोर) किसी जटिल वैज्ञानिक या तार्किक समस्या का समाधान करते समय केवल प्रत्यक्ष या मूर्त साक्ष्यों पर निर्भर रहने के बजाय, सभी संभावित चर (Variables) की पहचान करता है, मानसिक रूप से परिकल्पनाएँ (Hypotheses) गढ़ता है और फिर तार्किक रूप से निष्कर्षों का परीक्षण करता है, तो पियाजे के अनुसार यह संज्ञानात्मक परिपक्वता बालक की किस मूल मानसिक क्षमता और संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाती है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सी अवस्था 'अनुमानित-निगमनात्मक चिंतन' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'अमूर्त तर्क' (Abstract Reasoning) के विकास की विशेषता को सबसे सटीक रूप से दर्शाती है? → जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage: लगभग 11 वर्ष से वयस्कता तक) की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताओं पर विचार कीजिए: 1. इस अवस्था में बालकों में 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) की क्षमता पूरी तरह विकसित हो जाती है, जिससे वे बिना किसी दृश्य या मूर्त सामग्री के केवल प्रतीकों, विचारों और परिकल्पनाओं के आधार पर समस्याओं को हल कर सकते हैं। 2. बालक 'परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) करने में सक्षम हो जाते हैं, जिसका अर्थ है कि वे किसी समस्या के समाधान के लिए पहले विभिन्न परिकल्पनाएं (Hypotheses) बनाते हैं और फिर तार्किक रूप से उनका परीक्षण करके सही निष्कर्ष पर पहुंचते हैं। 3. इस चरण के दौरान बालकों की सोच से 'अहमकेंद्रिता' (Egocentrism) पूरी तरह समाप्त हो जाती है और वे वैज्ञानिक पद्धति की तरह व्यवस्थित और तार्किक ढंग से सोचना शुरू कर देते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? → जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'संवेदी-गामक अवस्था' (Sensorimotor Stage: जन्म से लगभग 2 वर्ष) की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताओं पर विचार कीजिए: 1. इस अवस्था में शिशु अपनी ज्ञानेंद्रियों (Senses) और शारीरिक गतिविधियों (Motor Actions) के माध्यम से संसार का अन्वेषण करता है और वस्तुओं को केवल प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करता है। 2. इस चरण की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि 'वस्तु स्थायित्व' (Object Permanence) का विकास है, जिसके तहत बालक यह समझने लगता है कि वस्तुएं तब भी अस्तित्व में रहती हैं जब वे उसकी दृष्टि से ओझल हो जाती हैं। 3. इस अवस्था के दौरान बालक में 'प्रतीकात्मक चिंतन' (Symbolic Thought) और भाषा के प्रयोग की पूर्ण क्षमता विकसित हो जाती है, जिससे वह अपने विचारों को शब्दों और संकेतों के माध्यम से व्यक्त करने में सक्षम हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? → जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage - लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बालकों में 'संरक्षण' (Conservation) की क्षमता का पूर्ण विकास हो जाता है, जिससे वे यह समझ पाते हैं कि किसी वस्तु के आकार या रूप बदलने पर उसकी मात्रा या द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है। 2. 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage - लगभग 7 से 11 वर्ष) में बालक वस्तुओं को उनके गुणों के आधार पर आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करने की क्षमता यानी 'क्रमबद्धता' (Seriation) और 'वर्गीकरण' (Classification) सीख जाता है। 3. 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage - 11 वर्ष से आगे) की एक प्रमुख विशेषता 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-deductive Reasoning) का विकास है, जिसमें किशोर अमूर्त विचारों और वैज्ञानिक रूप से समस्याओं के समाधान की कल्पना करने में सक्षम हो जाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? → बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) की विभिन्न अवस्थाओं और उनकी प्रमुख विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'पूर्व संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage - लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बच्चों में 'संरक्षण' (Conservation) का गुण पूरी तरह विकसित हो जाता है, जिसके कारण वे यह समझ पाते हैं कि किसी वस्तु के आकार या रूप में परिवर्तन होने पर भी उसका द्रव्यमान, आयतन या मात्रा अपरिवर्तित रहती है। 2. 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage - लगभग 7 से 11 वर्ष) में बच्चे वस्तुओं को किसी एक विशिष्ट गुण के आधार पर क्रमबद्ध करने (Seriation) और उनका वर्गीकरण (Classification) करने की क्षमता प्राप्त कर लेते हैं, तथा वे अमूर्त तार्किक चिंतन भी इसी अवस्था में पूरी तरह करने लगते हैं। 3. 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage - 11 वर्ष से आगे) में किशोरों के भीतर परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क (Hypothetical-Deductive Reasoning) और अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking) की योग्यता विकसित हो जाती है, जिससे वे बिना किसी वास्तविक या मूर्त सामग्री की उपस्थिति के भी मानसिक रूप से समस्याओं के समाधान की कल्पना कर सकते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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