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जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) की निम्नलिखित विशेषताओं पर विचार कीजिए: 1. इस अवस्था में बालकों में 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-deductive Reasoning) की क्षमता विकसित होती है, जिससे वे अमूर्त समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न संभावनाओं और परिकल्पनाओं का तार्किक रूप से परीक्षण कर सकते हैं। 2. इस चरण के दौरान किशोरों में 'अहंप्रकेंद्रिता' (Adolescent Egocentrism) की भावना उत्पन्न होती है, जिसके अंतर्गत वे 'काल्पनिक दर्शक' (Imaginary Audience) और 'व्यक्तिगत कथा' (Personal Fable) जैसी मानसिक अनुभूतियों का अनुभव करते हैं। 3. इस अवस्था में पहुँचने पर बालक बिना किसी भौतिक या मूर्त सहारे के केवल भाषाई प्रतीकों और मौखिक बयानों के आधार पर ही तार्किक निष्कर्ष निकालने में पूरी तरह सक्षम हो जाते हैं, और संरक्षण (Conservation) का नियम इस अवस्था से बहुत पहले ही समाप्त हो चुका होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (लगभग 11 वर्ष से वयस्कता तक) में बालकों में परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क (Hypothetico-deductive reasoning) की क्षमता विकसित हो जाती है। कथन 2 भी सही है क्योंकि डेविड एल्किंड द्वारा वर्णित 'किशोर अहंप्रकेंद्रिता' (Adolescent Egocentrism), जिसमें 'काल्पनिक दर्शक' और 'व्यक्तिगत कथा' शामिल हैं, इसी अवस्था की प्रमुख विशेषता है। कथन 3 आंशिक रूप से गलत है क्योंकि संरक्षण (Conservation) का नियम इस अवस्था में समाप्त नहीं होता, बल्कि यह बहुत पहले ही 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' में पूरी तरह से विकसित और स्थिर हो चुका होता है। अतः केवल कथन 1 और 2 सही हैं।
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