कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के नैतिक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) के 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) चरण की निम्नलिखित विशेषताओं पर विचार कीजिए:
- 1. इस चरण में व्यक्ति का यह मानना होता है कि नियम और कानून समाज के आपसी समझौते या अनुबंध का परिणाम हैं, इसलिए यदि कोई कानून मानवाधिकारों या समाज के बहुसंख्यक कल्याण की रक्षा करने में असफल रहता है, तो उसे बदला जा सकता है।
- 2. इस स्तर पर नैतिकता पूरी तरह से बाहरी दंड, पुरस्कार या सामाजिक प्रतिष्ठा की चाह पर आधारित होती है, जहाँ व्यक्ति केवल इसलिए नियमों का पालन करता है ताकि वह कानून और व्यवस्था बनाए रखने वाले अधिकारियों की नजर में अच्छा बन सके।
- 3. यह चरण कोहलबर्ग के सिद्धांत के स्तर-III (Level III) के अंतर्गत आता है, जो सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों (Universal Ethical Principles) से ठीक पहले की अवस्था है, और इसमें वैधानिक कानूनों की तुलना में सामाजिक न्याय एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
Detailed Explanation
कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता (Post-Conventional Morality) नैतिक विकास का तीसरा और अंतिम स्तर (Level III) है, जिसकी आयु सामान्यतः किशोरावस्था के बाद या वयस्कता में शुरू होती है। इस स्तर के अंतर्गत दो चरण आते हैं: पाँचवाँ चरण 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) तथा छठा चरण 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत' (Universal Ethical Principles)।
कथन 1 सही है: इस चरण में व्यक्ति यह समझता है कि कानून लचीले साधन हैं जिन्हें समाज के कल्याण और मानवाधिकारों के आधार पर सुधारा जा सकता है।
कथन 2 गलत है: बाहरी दंड, पुरस्कार या 'अच्छा लड़का/लड़की' बनने की प्रवृत्ति कोहलबर्ग के 'पूर्व-रूढ़िगत' (Pre-Conventional) और 'पारंपरिक' (Conventional) स्तरों से संबंधित है, न कि उत्तर-रूढ़िगत स्तर से।
कथन 3 सही है: यह चरण स्तर-III का भाग है जो सार्वभौमिक सिद्धांतों से पूर्व आता है और इसमें वैधानिक कानूनों से ऊपर सामाजिक न्याय और व्यक्तिगत अधिकारों को महत्व दिया जाता है। अतः केवल कथन 1 और 3 सही हैं।