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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भू-गर्भीय विभाजन तथा आर्थिक परिदृश्य के संदर्भ में 'विंध्यन पर्वतीय एवं पठारी क्षेत्र' की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश के दक्षिण में स्थित यह क्षेत्र मुख्य रूप से मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली और चित्रकूट जनपदों के दक्षिणी भागों में फैला हुआ है, जो कैमूर और सोनार श्रेणियों के रूप में विंध्यन क्रम की प्राचीन चट्टानों से निर्मित है। 2. इस क्षेत्र की स्थलाकृति अत्यधिक पथरीली, असमतल और सूखी होने के कारण यहाँ की मृदा मुख्य रूप से 'लाल और सघन' (Red Soil) प्रकार की है, जिसमें जल धारण क्षमता कम होने के कारण सिंचाई के लिए मुख्य रूप से पक्के कुओं और नहरों की अत्यधिक आवश्यकता होती है। 3. विंध्यन क्षेत्र में खनिज संसाधनों की दृष्टि से चूना पत्थर (Limestone), डोलोमाइट, नॉन-प्लास्टिक फायरक्ले और ग्लास सैंड (शीशा बालू) के प्रचुर भंडार पाए जाते हैं, जिसके कारण इस क्षेत्र में सीमेंट, कांच और खनन आधारित उद्योगों का अच्छा विकास हुआ है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
विंध्यन पर्वतीय और पठारी क्षेत्र उत्तर प्रदेश का सबसे दक्षिणी प्राकृतिक भू-भाग है। कथन 1 बिल्कुल सही है क्योंकि यह क्षेत्र मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली आदि जिलों में कैमूर और सोन श्रेणियों के रूप में फैला है और यहाँ विंध्यन क्रम की प्राचीन चट्टानें मिलती हैं। कथन 2 भी सही है क्योंकि यहाँ की पथरीली और असमतल भूमि में लाल मृदा पाई जाती है, जिसकी जल धारण क्षमता कम होती है और सिंचाई के लिए कृत्रिम साधनों (नहरों, नलकूपों व पक्के कुओं) की आवश्यकता होती है। कथन 3 भी पूर्णतः सत्य है क्योंकि उत्तर प्रदेश में सीमेंट उद्योग (जैसे चुर्क, डाला) के लिए आवश्यक चूना पत्थर और ग्लास सैंड के सबसे बड़े भंडार इसी विंध्यन क्षेत्र (विशेषकर सोनभद्र और मिर्जापुर) में पाए जाते हैं। अतः तीनों कथन सही हैं।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सृजनात्मकता' (Creativity) और 'चिंतन प्रक्रिया' के संदर्भ में, ग्राहम वालेस (Graham Wallas) द्वारा प्रतिपादित 'सृजनात्मक चिंतन के चार चरण'—'तैयारी' (Preparation), 'उद्भावन/प्रभवन' (Incubation), 'प्रदीप्ति/अंतर्दृष्टि' (Illumination), और 'सत्यापन/मूल्यांकन' (Verification)—के वैज्ञानिक स्वरूप, तथा जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking) के प्रमुख घटकों—'धाराप्रवाह' (Fluency), 'लचीलापन' (Flexibility), 'मौलिकता' (Originality), और 'विस्तार' (Elaboration)—के पारस्परिक अंतर्संबंधों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बुद्धि परीक्षण और मापन' के संदर्भ में, मनोवैज्ञानिक अल्फ्रेड बिने (Alfred Binet) और थियोडोर साइमन द्वारा विकसित प्रथम बुद्धि परीक्षण (Binet-Simon Intelligence Scale) तथा विलियम स्टर्न (William Stern) और लुई टरमन (Lewis Terman) द्वारा प्रतिपादित 'बुद्धि लब्धि' (Intelligence Quotient - IQ) की संकल्पना के गणितीय और मनोवैज्ञानिक आधार के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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पर्यावरण अध्ययन (EVS) के शिक्षण अधिगम और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के संदर्भ में 'ऊर्जा के पिरामिड' (Pyramid of Energy) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऊर्जा का पिरामिड सदैव सीधा (Upright) बनता है, क्योंकि पारिस्थितिकी तंत्र में एक पोषण स्तर (Trophic Level) से दूसरे पोषण स्तर पर ऊर्जा के स्थानांतरण के दौरान 'लिंड़ेमैन का 10 प्रतिशत नियम' (Lindeman's 10% Law) लागू होता है, जिसके अनुसार प्रत्येक अगले स्तर पर केवल 10% ऊर्जा ही संचित हो पाती है और शेष 90% ऊर्जा श्वसन, ताप और चयापचय क्रियाओं में हास (Loss) हो जाती है।
2. जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Aquatic Ecosystem) में बायोमास का पिरामिड अक्सर उल्टा (Inverted) बनता है, लेकिन उसी जलीय तंत्र में ऊर्जा का पिरामिड फिर भी सदैव सीधा ही रहता है क्योंकि ऊर्जा का क्षسय प्रत्येक चरण में अपरिहार्य है।
3. ऊर्जा के पिरामिड में उत्पादक (Producers) हमेशा शीर्ष पर और सर्वोच्च मांसाहारी (Top Carnivores) हमेशा आधार (Base) पर स्थित होते हैं, क्योंकि ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत सूर्य का प्रकाश सीधे सर्वोच्च उपभोक्ताओं द्वारा अवशोषित किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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हिंदी भाषा और व्याकरण के अंतर्गत 'संधि' और 'समास' के नियमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दीर्घ स्वर संधि के अंतर्गत जब ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ, ऋ के पश्चात क्रमशः समान ह्रस्व या दीर्घ स्वर आते हैं, तो दोनों मिलकर क्रमशः आ, ई, ऊ, ऋ हो जाते हैं, जैसे— 'विद्या + आलय' में दीर्घ 'आ' का निर्माण होता है।
2. 'द्विगु समास' और 'कर्मधारय समास' दोनों में समानता यह है कि दोनों का उत्तर पद प्रधान होता है, परंतु द्विगु समास का पूर्व पद सदैव 'संख्यावाचक' होता है जो किसी समूह या समाहार का बोध कराता है, जबकि कर्मधारय समास में पूर्व और उत्तर पद के बीच 'विशेषण-विशेष्य' या 'उपमान-उपमेय' का संबंध होता है।
3. 'बहुव्रीहि समास' में दोनों पद प्रधान होते हैं और सामासिक पद अपने सामान्य अर्थ को छोड़कर किसी अन्य तीसरे पद या अर्थ का विशेष रूप से बोध कराता है, जैसे— 'चक्रपाणि' (चक्र है पाणि में जिसके अर्थात् विष्णु)।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'स्मृति और विस्मरण के सिद्धांतों' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, हरमन एबिंगहॉस (Hermann Ebbinghaus) द्वारा प्रतिपादित 'विस्मरण वक्र' (Forgetting Curve) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'हिप्पोकैम्पस' (Hippocampus: विशेष रूप से सीए1 और सीए3 क्षेत्र), 'मेडियल टेम्पोरल लोब' (Medial Temporal Lobe), और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex) के बीच सिनैप्टिक समेकन (Synaptic Consolidation), सिस्टम समेकन (System Consolidation), और अल्पकालिक से दीर्घकालिक स्मृति में रूपांतरण की सक्रियण गतिकी, तथा जॉन एंसन मटर्स (John Anderson) के 'एक्टिविटी-बेस्ड मॉडल ऑफ मेमोरी' (ACT-R Model: घोषणात्मक और कार्यविधि स्मृति) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, स्पेaced रिपीटिशन-बेस्ड कंस्ट्रक्टिविस्ट पेडागोजी (Spaced Repetition-Based Constructivist Pedagogy) और विद्यार्थियों में सूचना पुनर्प्राप्ति, संचयी ज्ञानार्जन व समग्र संज्ञानात्मक स्थायित्व के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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