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जीन पियाजे
Asked 2 months ago · Viewed 18 times

जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage - लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बालक में 'संरक्षण' (Conservation) की क्षमता का पूर्ण विकास हो जाता है, जिससे वह यह समझ पाता है कि किसी वस्तु के आकार या रूप में परिवर्तन करने पर भी उसकी मात्रा या आयतन अपरिवर्तित रहता है।
  2. 2. 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage - लगभग 7 से 11 वर्ष) में बच्चे वस्तुओं और घटनाओं के वर्गीकरण (Classification), उत्क्रमणीयता (Reversibility) और 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) की योग्यताओं में पारंगत हो जाते हैं, लेकिन वे अमूर्त तार्किक चिंतन और परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क (Hypothetical-deductive reasoning) का उपयोग करने में असमर्थ होते हैं।
  3. 3. पियाजे के अनुसार 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) वह अंतिम चरण है जो किशोरावस्था से प्रारंभ होता है, जिसमें व्यक्ति वैज्ञानिक पद्धति से सोचना सीखता है और विभिन्न संभावनाओं के आधार पर अमूर्त समस्याओं का समाधान कर सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि 'संरक्षण' (Conservation) की क्षमता का विकास पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था में नहीं, बल्कि 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) के दौरान होता है। पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था में बच्चे 'संरक्षण' और 'विकेंद्रीकरण' के अभाव (Centration) से ग्रसित होते हैं।
कथन 2 सत्य है क्योंकि मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (7-11 वर्ष) में बच्चे वर्गीकरण, उत्क्रमणीयता और विकेंद्रीकरण सीख जाते हैं, किंतु अमूर्त चिंतन नहीं कर पाते।
कथन 3 सत्य है क्योंकि औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (11 वर्ष से ऊपर/किशोरावस्था) में किशोर अमूर्त चिंतन और परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क करने में सक्षम हो जाते हैं।

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