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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भूगर्भीय स्वरूप के अंतर्गत, राज्य की प्रमुख नदी घाटियों, मैदानी संरचनाओं और उनमें पाई जाने वाली स्थलाकृतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश के मध्यवर्ती मैदान (गंगा-यमुना का मैदान) का निर्माण मुख्य रूप से टरटियरी (Tertiary) काल के अंत में और प्लिस्टोसीन काल के दौरान हिमालयी नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ (Alluvium) निक्षेपों से हुआ है। 2. गंगा और यमुना के मध्यवर्ती उच्च भूमि क्षेत्र को 'बांगर' (Bangar) कहा जाता है, जो पुरानी जलोढ़ मिट्टी से निर्मित होने के कारण प्रतिवर्ष बाढ़ के नए निक्षेप प्राप्त करता है और इसलिए यह अत्यंत अत्यधिक उपजाऊ होता है। 3. राज्य के दक्षिण-पूर्व में प्रवाहित होने वाली 'सोन नदी' के घाटी क्षेत्र में प्राचीन काल की विंध्यन चट्टानों के अपरदन से बनी लाल और पीली मिट्टी पाई जाती है, जहाँ शुष्क कृषि प्रणालियों का प्रचलन अधिक है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: उत्तर प्रदेश का विशाल मध्यवर्ती मैदान मुख्य रूप से टरटियरी और प्लिस्टोसीन युग के दौरान उत्तर के पर्वतीय क्षेत्रों से बहकर आने वाली नदियों द्वारा लाए गए कछारी या जलोढ़ (Alluvium) निक्षेपों के संचयन से बना है। कथन 2 गलत है: 'बांगर' (Bangar) क्षेत्र पुरानी जलोढ़ मृदा (Old Alluvium) से निर्मित उच्च भूमि का हिस्सा है जहाँ बाढ़ का पानी सामान्यतः नहीं पहुँच पाता है, इसलिए यहाँ प्रतिवर्ष नए निक्षेप नहीं आते (नए निक्षेप 'खादर' या कछार क्षेत्रों में आते हैं)। कथन 3 सही है: राज्य के दक्षिण-पूर्वी भाग (विशेषकर सोनभद्र और मिर्जापुर क्षेत्र) में विंध्यन श्रेणी के विस्तार के कारण सोन नदी की घाटी में लाल और पीली मिट्टी (Red and Yellow Soils) पाई जाती है, जहाँ सिंचाई के साधनों की कमी के कारण शुष्क कृषि (Dryland Farming) की जाती है।
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, बालकों में 'संरक्षण' (Conservation) की अवधारणा का विकास किस अवस्था के दौरान पूर्ण रूप से होता है, तथा इस अवस्था की मुख्य मानसिक विशेषता क्या है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अभिप्रेरणा के सिद्धांत' (Theories of Motivation) के संदर्भ में, अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) द्वारा प्रतिपादित 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs Theory) के अंतर्गत 'न्यूनता संबंधी आवश्यकताएँ' (Deficiency Needs - D-needs) और 'विकास संबंधी आवश्यकताएँ' (Growth Needs - B-needs) के वैज्ञानिक स्वरूप, उनके अनुक्रमिक पदानुक्रम तथा कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के मानवतावादी दृष्टिकोण के साथ उनके अंतर्संबंधों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और दर्शन के संदर्भ में, 'बौद्ध शिक्षा प्रणाली' (Buddhist Education System) और उसके प्रमुख संस्थानों एवं नियमों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध शिक्षा प्रणाली में अध्ययन की शुरुआत 'प्रव्रज्या' संस्कार से होती थी, जो लगभग 8 वर्ष की आयु में होता था और इसके बाद छात्र को 'श्रामणेर' (नवदीक्षित भिक्षु) कहा जाता था, जबकि उच्च शिक्षा लगभग 20 वर्ष की आयु में 'उपसंपदा' संस्कार के बाद शुरू होती थी जिसके बाद छात्र पूर्ण भिक्षु बन जाता था।
2. बौद्ध काल के प्रसिद्ध शिक्षण संस्थानों में नालंदा, तक्षशिला, वल्लभी और विक्रमशिला शामिल थे, जहाँ प्रवेश के लिए द्वारपाल (पंडित) द्वारा कठिन मौखिक प्रवेश परीक्षा ली जाती थी, जिसे पार करने के बाद ही छात्रों को प्रवेश मिलता था।
3. प्राचीन बौद्ध शिक्षा में जाति व्यवस्था का कड़ा विरोध किया जाता था और शिक्षा के द्वार सभी वर्णों तथा महिलाओं के लिए भी खुले थे, किंतु संघ के नियमों के अनुसार चोर, हत्यारे, रोगी और राज्य के कर्मचारियों (जैसे सैनिक) को संघ में प्रवेश की अनुमति नहीं थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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प्राथमिक स्तर पर बाल विकास और अधिगम की प्रक्रियाओं का अध्ययन करते समय, 'कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत' (Kohlberg's Theory of Moral Development) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, पारंपरिक नैतिकता का स्तर (Conventional Level) लगभग 10 से 13 वर्ष की आयु के बच्चों में पाया जाता है, जिसमें बालक सामाजिक नियमों, न्याय और दूसरों की स्वीकृतियों (गुड बॉय/नाइस गर्ल अभिविन्यास) के अनुसार नैतिक निर्णय लेता है।
2. उत्तर-पारंपरिक नैतिकता के स्तर (Post-conventional Level) में व्यक्ति सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अंतरात्मा के सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों (Universal Ethical Principles) के आधार पर कार्य करता है, जो कि कानून से ऊपर हो सकते हैं।
3. कोहलबर्ग ने अपने इस सिद्धांत को प्रतिपादित करने के लिए विभिन्न आयु वर्ग के बालकों और बालिकाओं पर नैदानिक साक्षात्कारों (Clinical Interviews) का प्रयोग किया था, जिसमें उन्होंने 'हाइन्ज दुविधा' (Heinz Dilemma) जैसी नैतिक कहानियों का उपयोग करके उनके तर्कों का विश्लेषण किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) की अवधारणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य सामान्य विद्यालयों में सभी बालकों को, चाहे उनकी शारीरिक, मानसिक, सामाजिक या आर्थिक स्थिति कैसी भी हो, बिना किसी भेदभाव के समान शिक्षण अधिगम अवसर प्रदान करना है।
2. यह प्रणाली विशेष बालकों (दिव्यांगों) के लिए केवल पृथक् (Segregated) विशेष विद्यालयों की स्थापना पर जोर देती है ताकि उनका विशेष शिक्षकों द्वारा अलग से विकास किया जा सके।
3. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-2005) और निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act - 2009) दोनों ही देश में समावेशी शिक्षा प्रणाली के सशक्त क्रियान्वयन की वकालत करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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