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उत्तर प्रदेश के खनिज संसाधनों और उनकी प्राप्ति वाले प्रमुख जिलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में देश के कुल 'चूना पत्थर' (Limestone) भंडार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पाया जाता है, और यहाँ के गुरमा, कनाच तथा डाला क्षेत्र चूना पत्थर खनन के लिए प्रमुख रूप से जाने जाते हैं।
- 2. 'युरेनियम' (Uranium) के सीमित भंडार उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में पाए जाते हैं, जो राज्य का एकमात्र ऐसा जिला है जहाँ यूरेanium के होने की पुष्टि हुई है।
- 3. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों में 'नॉन-प्लास्टिक फायर क्ले' (Non-Plastic Fire Clay) के विशाल भंडार पाए जाते हैं, जिनका उपयोग मुख्य रूप से उच्च तापमान सहन करने वाली ईंटों और सिरेमिक उद्योगों में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उत्तर प्रदेश के खनिज संसाधनों से संबंधित तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। 1. सोनभद्र जिला चूना पत्थर (Limestone), कोयला और डोलोमाइट के उत्पादन में अग्रणी है; गुरमा, कनाच और डाला क्षेत्र इसके प्रमुख स्रोत हैं। 2. ललितपुर जिला उत्तर प्रदेश में यूरेनियम का एकमात्र संभावित और संपुष्ट क्षेत्र है। 3. मिर्जापुर और सोनभद्र के पठारी क्षेत्रों में नॉन-प्लास्टिक फायर क्ले (Fire Clay), बॉक्साइट और पाइराइट्स के भी महत्वपूर्ण भंडार मिलते हैं।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अभिप्रेरणा के सिद्धांत' (Theories of Motivation) के संदर्भ में, अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) द्वारा प्रतिपादित 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs Theory) के अंतर्गत 'न्यूनता संबंधी आवश्यकताएँ' (Deficiency Needs - D-needs) और 'विकास संबंधी आवश्यकताएँ' (Growth Needs - B-needs) के वैज्ञानिक स्वरूप, उनके अनुक्रमिक पदानुक्रम तथा कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के मानवतावादी दृष्टिकोण के साथ उनके अंतर्संबंधों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश के भौतिक विभाजनों, भूगर्भिक संरचना और प्रमुख नदियों के प्रवाह तंत्र के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को मुख्य रूप से तीन प्राकृतिक प्रदेशों में विभाजित किया जाता है—भाबर एवं तराई क्षेत्र, गंगा-यमुना का विशाल मैदान, और दक्षिण का पठारी (पर्वतीय) क्षेत्र। दक्षिण का पठारी क्षेत्र प्रायद्वीपीय पठार का ही उत्तरward विस्तार है, जिसमें विंध्य पर्वत शृंखला की चट्टानें शामिल हैं।
2. उत्तर प्रदेश में बहने वाली 'बेतवा नदी' (जिसे वेत्रवती भी कहा जाता है) मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के कुमरागाँव से निकलती है और हमीरपुर जिले के निकट यमुना नदी में मिल जाती है, जबकि इसकी मुख्य सहायक नदी 'धसान' है।
3. राज्य में प्रवाहित होने वाली 'केन नदी' (जिसे कर्णवती भी कहा जाता है) कैमूर पहाड़ियों से निकलती है और बाँदा जिले के चिल्ला नामक स्थान पर यमुना नदी में मिलती है, और यह पन्ना राष्ट्रीय उद्यान से होकर प्रवाहित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम की शैलियाँ और कॉग्निटिव स्टाइल्स' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, हरमन विटकिन (Herman Witkin) द्वारा प्रतिपादित 'क्षेत्र-स्वतंत्र और क्षेत्र-आश्रित संज्ञानात्मक शैली' (Field-Independent and Field-Dependent Cognitive Styles) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'विजुअल-स्पेशियल नेटवर्क' (Visual-Spatial Network: विशेष रूप से दाहिना पैरिएटल लोब), 'डॉर्मोलेटेरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC), और 'वेंट्रल विजुअल पाथवे' के बीच विश्लेषणात्मक अमूर्त प्रसंस्करण, वैश्विक प्रासंगिकता और बाहरी विधाओं से स्वतंत्रता की सक्रियण गतिकी, तथा डेविड कोल्ब (David Kolb) द्वारा प्रतिपादित 'अनुभवात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle: मूर्त अनुभव, चिंतनशील अवलोकन, अमूर्त अवधारणा और सक्रिय प्रयोग) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, विभेदित अनुभवात्मक शिक्षाशास्त्र (Differentiated Experiential Constructivist Pedagogy) और विद्यार्थियों में संज्ञानात्मक लचीलेपन, समस्या-समाधान अनुकूलन व समग्र वैचारिक समझ के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक विभाजन, कृषि-जलवायु प्रदेशों और मृदा संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को कृषि और जलवायु की विभिन्नताओं के आधार पर कुल नौ (9) कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Agro-climatic Zones) में विभाजित किया गया है, जिसमें सबसे बड़ा क्षेत्र 'मैदानी भाग' और सबसे छोटा 'बुंदेलखंड क्षेत्र' माना जाता है।
2. उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग में पाई जाने वाली 'राड़' (Bhoor) या बलुई दोमट मृदा मूल रूप से पुरानी जलोढ़ (बांगर) मिट्टी का ही एक स्थानीय रूप है, जो अपेक्षाकृत अधिक उपजाऊ होती है और जिसमें नाइट्रोजन तथा फास्फोरस की प्रचुरता होती है।
3. उत्तर प्रदेश के दक्षिणी पठारी क्षेत्र (बुंदेलखंड) में मिलने वाली 'मार' (Maar) और 'कावर' (Kabar) मृदाएँ प्रकारान्तर से काली कपासी मिट्टी (Black Cotton Soil) से मिलती-जुलती हैं, जो नमी पाकर अत्यधिक चिपचिपी और सूखने पर बड़ी-बड़ी दरारें बनाने वाली होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'पर्यावरण अध्ययन' (EVS) के अंतर्गत 'जैव विविधता एवं उसका संरक्षण' (Biodiversity and its Conservation) के संदर्भ में, जैव विविधता के 'स्व-स्थान संरक्षण' (In-situ Conservation) और 'बाह्य-स्थान संरक्षण' (Ex-situ Conservation) के वैज्ञानिक दृष्टिकोण, उनके प्रमुख उदाहरणों (जैसे राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, बायोस्फीयर रिजर्व, वानस्पतिक उद्यान, जीन बैंक और चिड़ियाघर) तथा उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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