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बच्चों के भाषा विकास और संज्ञानात्मक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के अनुसार भाषा केवल विचारों को व्यक्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह संज्ञानात्मक विकास को आकार देने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण सांस्कृतिक उपकरण है।
- 2. नोम चोमस्की (Noam Chomsky) के 'भाषा अर्जन उपकरण' (Language Acquisition Device - LAD) सिद्धांत के अनुसार, बच्चों में भाषा सीखने की जन्मजात क्षमता होती है और व्याकरण के सार्वभौमिक नियम उनके अंतर्जात होते हैं।
- 3. जीन पियाजे (Jean Piaget) के अनुसार भाषा का विकास बच्चे के अहंकेंद्रित वाक् (Egocentric Speech) से शुरू होता है और धीरे-धीरे सामाजिक वाक् में परिवर्तित होता है, जो वाइगोत्स्की के इस विचार से पूरी तरह मेल खाता है कि निजी वाक् (Private Speech) पूरी तरह से सामाजिक अंतःक्रिया का परिणाम है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: लेव वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत यह मानता है कि भाषा संज्ञानात्मक विकास में केंद्रीय भूमिका निभाती है और यह बच्चों के मानसिक विकास को आकार देती है। कथन 2 सही है: नोम चोमस्की का 'सार्वभौमिक व्याकरण' (Universal Grammar) और LAD सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि बच्चों में भाषा सीखने की जन्मजात क्षमता होती है। कथन 3 गलत है: जीन पियाजे का मानना था कि 'अहंकेंद्रित वाक्' बच्चे की संज्ञानात्मक अपरिपक्वता को दर्शाता है जो धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है, जबकि वाइगोत्स्की के अनुसार 'निजी वाक्' बच्चे के स्व-विनियमन (Self-regulation) में मदद करता है और यह सामाजिक अंतःक्रिया से आंतरिक रूप में विकसित होता है। अतः पियाजे और वाइगोत्स्की के विचार अहंकेंद्रित और निजी वाक् के संदर्भ में एक-दूसरे से भिन्न हैं, न कि पूरी तरह मेल खाते हैं।
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बाल विकास के सिद्धांतों और अधिगम प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बाल विकास की प्रक्रिया निरंतरता के सिद्धांत (Principle of Continuity) का पालन करती है, जिसका अर्थ है कि यह प्रक्रिया गर्भधारण से शुरू होकर मृत्युपर्यंत चलती रहती है और इसमें कभी भी कोई आकस्मिक या अचानक परिवर्तन नहीं होता है।
2. विकास की गति व्यक्तिगत भिन्नताओं (Individual Differences) के कारण सभी बच्चों में एक समान नहीं होती है, लेकिन विकास का प्रतिरूप (Developmental Pattern) सभी सामान्य बच्चों में लगभग एक जैसा ही होता है, जैसे कि मस्तोमुखी क्रम (Cephalocaudal sequence) और निकट-दूर क्रम (Proximodistal sequence)।
3. अधिगम और परिपक्वता (Maturation) एक दूसरे से पूरी तरह स्वतंत्र प्रक्रियाएँ हैं, जहाँ परिपक्वता केवल जैविक और आनुवंशिक कारकों पर निर्भर करती है, और इस पर पर्यावरण, अभ्यास या अधिगम के अनुभवों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के सामाजिक-सांस्कृतिक विकास सिद्धांत' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) और 'चान्त्वन/मचान (Scaffolding)' की अवधारणा के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डोसोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC), 'सुपीरियर टेम्पोरल सल्कास' (STS), और 'मिरर न्यूरॉन सिस्टम' (Mirror Neuron System - MNS) के बीच सामाजिक-संज्ञानात्मक मध्यस्थता (Socio-cognitive Mediation), बाहरी से आंतरिक वाक् संक्रमण (Inter-psychological to Intra-psychological transition), और कार्यकारी नियंत्रण संवर्धन की सक्रियण गतिकी, तथा जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'इंस्ट्रक्टिव स्कैफोल्डिंग मॉडल' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, सोशियो-कल्चर्स सेंसिटिव कंस्ट्रक्टिविस्ट पेडागोजी (Socio-culturally Sensitive Constructivist Pedagogy) और विद्यार्थियों में उच्च-क्रम संज्ञानात्मक विनियमन, सहयोगात्मक समस्या-समाधान व समग्र ज्ञान सह-निर्माण (Co-construction of Knowledge) के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश की प्रमुख नदियों और उनके उद्गम स्थल के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. चंबल नदी - जानापाव पहाड़ी (मध्य प्रदेश)
2. बेतवा नदी - कुमरा गाँव (रायसेन, मध्य प्रदेश)
3. केन नदी - कैमूर पहाड़ी (सतना, मध्य प्रदेश)
4. राप्ती नदी - रुकुमकोट (नेपाल हिमालय)
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
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भारतीय शिक्षा आयोग (हंटर आयोग, 1882) और लार्ड कर्जन के शैक्षिक सुधारों तथा प्राथमिक शिक्षा के विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हंटर आयोग (1882) ने प्राथमिक शिक्षा के प्रसार और सुधार की जिम्मेदारी मुख्य रूप से नवनिर्मित स्थानीय निकायों (District Boards और Municipalities) को सौंपने की संस्तुति की थी, तथा प्राथमिक शिक्षा स्थानीय भाषाओं (Vernacular Languages) के माध्यम से दिए जाने पर विशेष बल दिया था।
2. लॉर्ड कर्जन ने अपने कार्यकाल के दौरान वर्ष 1904 में 'भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम' (Indian Universities Act) पारित किया, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण को कड़ा करना, सीनेट के आकार को सीमित करना और उच्च शिक्षा में उच्च कोटि के अनुसंधान (Research) को बढ़ावा देना था।
3. वर्ष 1929 में स्थापित 'हार्टोग समिति' (Hartog Committee) ने भारत में प्राथमिक शिक्षा के अत्यधिक अपव्यय (Wastefulness) और ठहराव (Stagnation) की समस्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी और यह सुझाव दिया था कि प्राथमिक शिक्षा का विस्तार जल्दबाजी में करने के बजाय इसके गुणात्मक सुधार और समेकन (Consolidation) पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, वह स्तर जिसमें बालक के नैतिक निर्णय इस बात पर आधारित होते हैं कि समाज के नियम क्या हैं, कानून व्यवस्था बनाए रखना और सामाजिक कर्तव्यों का पालन करना कितना आवश्यक है, निम्नलिखित में से किस चरण या स्तर के अंतर्गत आता है?
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