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भारतीय शिक्षा आयोग (हंटर आयोग, 1882) और लार्ड कर्जन के शैक्षिक सुधारों तथा प्राथमिक शिक्षा के विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हंटर आयोग (1882) ने प्राथमिक शिक्षा के प्रसार और सुधार की जिम्मेदारी मुख्य रूप से नवनिर्मित स्थानीय निकायों (District Boards और Municipalities) को सौंपने की संस्तुति की थी, तथा प्राथमिक शिक्षा स्थानीय भाषाओं (Vernacular Languages) के माध्यम से दिए जाने पर विशेष बल दिया था। 2. लॉर्ड कर्जन ने अपने कार्यकाल के दौरान वर्ष 1904 में 'भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम' (Indian Universities Act) पारित किया, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण को कड़ा करना, सीनेट के आकार को सीमित करना और उच्च शिक्षा में उच्च कोटि के अनुसंधान (Research) को बढ़ावा देना था। 3. वर्ष 1929 में स्थापित 'हार्टोग समिति' (Hartog Committee) ने भारत में प्राथमिक शिक्षा के अत्यधिक अपव्यय (Wastefulness) और ठहराव (Stagnation) की समस्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी और यह सुझाव दिया था कि प्राथमिक शिक्षा का विस्तार जल्दबाजी में करने के बजाय इसके गुणात्मक सुधार और समेकन (Consolidation) पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन पूरी तरह से सत्य हैं। 1. भारतीय शिक्षा आयोग (हंटर आयोग, 1882) ने प्राथमिक शिक्षा का नियंत्रण स्थानीय बोर्डों और नगरपालिकाओं को हस्तांतरित करने तथा मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा को माध्यम बनाने की सिफारिश की थी। 2. लॉर्ड कर्जन ने 1904 के विश्वविद्यालय अधिनियम के माध्यम से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को सीमित किया, सीनेट के सदस्यों की संख्या घटाई और सरकारी नियंत्रण बढ़ाया, साथ ही शोध और उच्च शिक्षा पर जोर दिया। 3. हार्टोग समिति (1929) ने प्राथमिक शिक्षा में 'अपव्यय' (बच्चे का बीच में ही स्कूल छोड़ना) और 'ठहराव' (एक ही कक्षा में कई साल रुकना) की गंभीर समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया और मात्रा के बजाय गुणवत्ता पर जोर देने की बात कही।
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