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उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे, विधानमंडल और प्रमुख संस्थाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उत्तर प्रदेश द्विसदनीय विधानमंडल (Bicameral Legislature) वाला राज्य है, जिसमें विधानसभा की कुल निर्वाचित सदस्यों की संख्या 403 है तथा विधान परिषद में सदस्यों की कुल संख्या 100 है।
- 2. उत्तर प्रदेश में 'राज्य लोक सेवा अधिकरण' (State Public Services Tribunal) की स्थापना लखनऊ में की गई है, जो राज्य सरकार के कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवादों का त्वरित समाधान करता है।
- 3. इलाहाबाद उच्च न्यायालय (वर्तमान में प्रयागराज उच्च न्यायालय) की स्थापना वर्ष 1866 में की गई थी, और इसकी एक आधिकारिक खंडपीठ (Bench) लखनऊ में स्थित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए तीनों कथन उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और विधायी ढांचे के संबंध में पूर्णतः सत्य हैं:
1. उत्तर प्रदेश में द्विसदनीय व्यवस्था है। यहाँ विधानसभा की 403 निर्वाचित सीटें और विधान परिषद की 100 सीटें हैं, जो देश में सबसे अधिक हैं।
2. राज्य के कर्मचारियों के सेवा विवादों के निस्तारण हेतु लखनऊ में 'राज्य लोक सेवा अधिकरण' कार्य करता है।
3. देश के सबसे बड़े उच्च न्यायालयों में से एक, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की स्थापना 17 मार्च 1866 को आगरा में हुई थी और 1869 में इसे इलाहाबाद (प्रयागराज) स्थानांतरित किया गया था। इसकी एक खंडपीठ लखनऊ में कार्यरत है। अतः विकल्प (d) सही है।
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प्राचीन भारतीय इतिहास और उत्तर प्रदेश के महाजनपदों से संबंधित निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. मल्ल महाजनपद - आधुनिक कुशीनगर और देवरिया का क्षेत्र, जिसकी राजधानी कुइना या कुशीनारा थी और जहाँ बौद्ध धर्म से जुड़े महत्वपूर्ण अवशेष प्राप्त हुए हैं।
2. चेदि महाजनपद - आधुनिक बुंदेलखंड क्षेत्र (बांदा और हमीरपुर के आसपास), जिसकी राजधानी 'शक्तिमती' (सुक्तिमती) थी।
3. काशी महाजनपद - आधुनिक वाराणसी और उसके आस-पास का क्षेत्र, जिसकी राजधानी वाराणसी थी और जो अपने सूती एवं रेशमी वस्त्रों के व्यापार के लिए अत्यधिक प्रसिद्ध था।
4. अंग महाजनपद - आधुनिक उत्तर प्रदेश के पूर्वी छोर पर बलिया और गाजीपुर जिलों में विस्तृत था, जिसकी राजधानी चंपा थी।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में, 'कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत' की किस अवस्था में व्यक्ति यह मानता है कि नियमों और कानूनों का पालन करना समाज में व्यवस्था बनाए रखने और सामाजिक अनुबंध (Social Contract) के प्रति अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए आवश्यक है, भले ही वे नियम व्यक्तिगत हित के विरुद्ध क्यों न हों?
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हिंदी भाषा और व्याकरण के अंतर्गत 'शब्द विचार' और 'विकारी-अविकारी शब्दों' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विकारी शब्द वे शब्द होते हैं जिनमें लिंग, वचन, कारक या काल के आधार पर परिवर्तन (विकार) आ जाता है, और इसके अंतर्गत संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया शब्दों को शामिल किया जाता है।
2. अविकारी शब्द (अव्यय) वे शब्द होते हैं जिनके रूप में लिंग, वचन या कारक के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता है, तथा इसके प्रमुख भेदों में क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक शामिल हैं।
3. 'समुच्चयबोधक अव्यय' वे शब्द होते हैं जो किसी संज्ञा या सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध वाक्य के दूसरे पदों के साथ जोड़ते हैं, जबकि 'संबंधबोधक अव्यय' दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को आपस में जोड़ने का कार्य करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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