शिक्षा दर्शन एवं शिक्षा चिंतक
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली, वैदिक काल के गुरुकुल और उत्तर प्रदेश में स्थित प्रमुख प्राचीन शिक्षा केंद्रों व आश्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उत्तर प्रदेश के वर्तमान 'बलिया' जिले के समीप स्थित प्राचीन काल में महर्षि भृगु का 'भृगु क्षेत्र' और 'नैमिषारण्य' (वर्तमान सीतापुर जिला) वैदिक काल से ही तपस्या, पुराण कथाओं और शिक्षा के प्रमुख केंद्र रहे हैं, जहाँ महर्षि शौनकादि ऋषियों ने हजारों शिष्यों को शिक्षा प्रदान की थी।
- 2. वाराणसी (ऋषिपत्तनम/काशी) प्राचीन काल से ही उपनिषद कालीन दर्शन, व्याकरण और बौद्ध शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र रहा है, जहाँ काशी के राजा अजातशत्रु और उपनिषद काल के प्रसिद्ध दार्शनिक गार्गी व याज्ञवल्क्य के संवादों का उल्लेख मिलता है।
- 3. प्राचीन काल में 'सारनाथ' केवल बौद्ध धर्म का ही नहीं, बल्कि वज्रयान और महायान संप्रदायों से जुड़े शिक्षण का भी एक प्रतिष्ठित केंद्र था, जिसका उल्लेख चीनी यात्री ह्वेनसांग (Hiuen Tsang) के यात्रा वृत्तांतों में भी विस्तार से मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि नैमिषारण्य (वर्तमान सीतापुर) और भृगु क्षेत्र (बलिया) प्राचीन भारतीय ऋषियों, पुराणों के श्रवण और वैदिक शिक्षा के महान केंद्र रहे हैं। नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषियों द्वारा शौनकता के नेतृत्व में शिक्षा और ज्ञान सत्र चलाए जाने का उल्लेख मिलता है। कथन 2 गलत है क्योंकि काशी के राजा 'अजातशत्रु' नहीं बल्कि काशी के राजा 'ब्रह्मदत्त' या दार्शनिक राजाओं (जैसे उपनिषद कालीन अश्वपति आदि) का संबंध वेदों और उपनिषदों से है; इसके अलावा गार्गी और याज्ञवल्क्य का संवाद जनक (विदेह) की सभा में हुआ था, जो उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा प्राचीन मिथिला क्षेत्र था, न कि सीधे काशी के राजा अजातशत्रु (जो मगध के हर्यक वंश के शासक थे)। कथन 3 बिल्कुल सही है क्योंकि सारनाथ (मृगदाव) बौद्ध धर्म के साथ-साथ महायान और वज्रयान दर्शन का भी प्रमुख शिक्षा केंद्र था, और ह्वेनसांग ने अपने विवरण में यहाँ हजारों बौद्ध भिक्षुओं के अध्ययनरत होने का उल्लेख किया है। अतः सही उत्तर विकल्प (a) है।
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बिहार के छात्र आंदोलन और जयप्रकाश नारायण (जेपी) की संपूर्ण क्रांति के संदर्भ…
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उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक, राजनीतिक ढांचे तथा स्थानीय…
Related Questions
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19वीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) और 'ब्रह्म समाज' (1828) ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, जातिगत कठोरताओं और सती प्रथा का कड़ा विरोध किया, तथा पाश्चात्य शिक्षा एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रचार-प्रसार पर बल दिया।
2. वर्ष 1867 में मुंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा स्थापित 'प्रार्थना समाज' का मुख्य उद्देश्य जाति व्यवस्था का उन्मूलन, विधवा पुनर्विवाह को बढ़ावा देना और महिला शिक्षा का प्रसार था, जिसमें महादेव गोविंद रानाडे और आर. जी. भंडारकर जैसे विद्वानों का सक्रिय योगदान रहा।
3. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को अपौरुषेय एवं अचूक माना, तथा इन्होंने शुद्धि आंदोलन के माध्यम से उन हिंदुओं को पुनः हिंदू धर्म में वापस लाने का प्रयास किया जिन्होंने किसी अन्य धर्म को अपना लिया था।
4. यंग बंगाल आंदोलन का नेतृत्व करने वाले हेनरी विवियन डेरोज़ियो ने सामाजिक सुधारों के साथ-साथ रूढ़िवादी हिंदू परंपराओं की खुलकर आलोचना की, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें कलकत्ता के हिंदू कॉलेज के प्राध्यापक पद से बर्खास्त कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के इतिहास में 'जयप्रकाश नारायण (जेपी आंदोलन)' और 'छात्र आंदोलन' (1974) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1974 में छात्र आंदोलन की शुरुआत मुख्य रूप से बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, खाद्यान्नों की कमी और शैक्षणिक संस्थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ पटना विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा 'बिहार छात्र संघर्ष समिति' के गठन के साथ हुई थी।
2. जयप्रकाश नारायण ने इस आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए दो शर्तें रखी थीं—पहला यह कि आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक रहेगा और दूसरा यह कि इसका प्रभाव केवल बिहार तक सीमित न रहकर पूरे देश में 'संपूर्ण क्रांति' (Total Revolution) का रूप लेगा।
3. 5 जून 1974 को पटना के गांधी मैदान में आयोजित ऐतिहासिक रैली में जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा गांधी की सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए 'समग्र क्रांति' या 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वाहन किया था, जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन का लक्ष्य रखा गया था।
4. जेपी आंदोलन के दौरान ही आपातकाल (Emergency) की पृष्ठभूमि तैयार हुई थी, और इसी आंदोलन की प्रतिक्रिया स्वरूप केंद्र सरकार ने वर्ष 1977 के आम चुनावों में भारी बहुमत प्राप्त किया था जिससे जनता पार्टी की पहली गैर-कांग्रेस सरकार केंद्र में बनी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक, राजनीतिक ढांचे तथा पंचायती राज व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश राज्य में 'क्षेत्र पंचायतों' (Khetriya Panchayats) के प्रमुख (ब्लॉक प्रमुख) का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा किया जाता है, जबकि जिला पंचायत के अध्यक्ष का निर्वाचन संबंधित जिला पंचायत के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से ही अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है।
2. उत्तर प्रदेश में 'नगर निगमों' के महापौर (Mayor) का चुनाव प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली के माध्यम से सीधे शहर के पंजीकृत मतदाताओं द्वारा किया जाता है, और महापौर नगर निगम की 'कार्रवाई समिति' (Executive Committee) का पदेन अध्यक्ष होता है।
3. उत्तर प्रदेश राज्य विधानमंडल में 'विधान परिषद' (Legislative Council) एक स्थायी सदन है, जिसके सदस्यों की कुल संख्या 100 है, और इसका गठन सर्वप्रथम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171 के अंतर्गत किया गया था जिसके सदस्यों का निर्वाचन विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों (जैसे स्नातक, शिक्षक, स्थानीय निकाय और विधानसभा) के माध्यम से होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक, राजनीतिक ढांचे तथा स्थानीय स्वशासन (Local Self-Government) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश राज्य में 'क्षेत्र पंचायतों' (Khetriya Panchayats) के प्रमुख (ब्लॉक प्रमुख) का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा किया जाता है, जबकि जिला पंचायत के अध्यक्ष का निर्वाचन संबंधित जिला पंचायत के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से ही अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है।
2. उत्तर प्रदेश में 'नगर निगमों' के महापौर (Mayor) का चुनाव प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली के माध्यम से सीधे शहर के पंजीकृत मतदाताओं द्वारा किया जाता है, और महापौर नगर निगम की 'कार्रवाई परिषद' (Executive Committee) का पदेन अध्यक्ष होता है।
3. उत्तर प्रदेश राज्य विधानमंडल में 'विधान परिषद' (Legislative Council) एक स्थायी सदन है, जिसके सदस्यों की कुल संख्या 100 है, और इसका गठन सर्वप्रथम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171 के अंतर्गत किया गया था जिसके सदस्यों का निर्वाचन विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों (जैसे स्नातक, शिक्षक, स्थानीय निकाय और विधानसभा) के माध्यम से होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर महात्मा गांधी चंपारण आए थे, जहाँ 'तीनकथा पद्धति' के अंतर्गत यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों से उनकी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करने का अनुबंध कराया जाता था, जिसके विरुद्ध यह सत्याग्रह भारत में गांधीजी का पहला सफल सविनय प्रयोग बना।
2. चंपारण जाँच समिति (Champarana Agrarian Committee) के एक सदस्य के रूप में ब्रिटिश सरकार द्वारा महात्मा गांधी को भी इस आयोग का सदस्य मनोनीत किया गया था, तथा इस समिति की संस्तुतियों के आधार पर 'चंपारण कृषि अधिनियम, 1917' पारित किया गया, जिसके तहत तीनकथा प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया और अवैध रूप से वसूले गए धन का एक हिस्सा किसानों को वापस लौटाया गया।
3. चंपारण सत्याग्रह की सफलता के दौरान महात्मा गांधी के साथ बराज किशोर प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, आचार्य कृपलानी और मधुलि जैसे स्थानीय प्रबुद्ध वकीलों और नेताओं ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया, जिससे बिहार में राष्ट्रीय राजनीति की एक मजबूत नींव पड़ी।
4. वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन के आगमन के समय बिहार में विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के वैकल्पिक संस्थानों के रूप में 'बिहार नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई, जिसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कार्य किया, और इसी काल में सदाकत आश्रम से मजहरुल हक के संपादन में 'द मदरलैंड' अखबार निकाला गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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इनमें से किसने अपनी रिपोर्ट में 'शिक्षा के चार स्तंभों' की बात की है?
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