राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF)
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) की अवधारणा और बाल-केन्द्रित शिक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य सामान्य विद्यालयों में सभी बच्चों (चाहे वे शारीरिक, मानसिक, सामाजिक या आर्थिक रूप से किसी भी वर्ग के हों) को एक साथ समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है, जिसमें किसी भी प्रकार के अलगाव या भेदभाव का कोई स्थान नहीं होता है।
- 2. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21-A छह से चौदह वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को एक मौलिक अधिकार बनाता है, जो समावेशी शिक्षा के विधिक आधार को मजबूत करता है।
- 3. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-2005) के अनुसार, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए पृथक विशेष विद्यालयों की स्थापना करना ही समावेशी शिक्षा का एकमात्र और सर्वोत्तम मार्ग है, ताकि वे सामान्य बच्चों के दबाव से बच सकें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि समावेशी शिक्षा का मूल उद्देश्य सभी बच्चों को एक ही छत के नीचे बिना किसी भेदभाव के समान अवसर देना है। कथन 2 सही है क्योंकि 86वें संविधान संशोधन 2002 द्वारा अनुच्छेद 21-A के तहत 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का मौलिक अधिकार दिया गया है, जो समावेशी शिक्षा का आधार है। कथन 3 गलत है क्योंकि NCF-2005 विशेष विद्यालयों में अलगाव (Segregation) का समर्थन नहीं करता, बल्कि 'मुख्यधारा' (Mainstreaming) और सामान्य विद्यालयों में ही सभी बच्चों के साथ एक साथ शिक्षा देने (समावेश) की वकालत करता है।
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राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) के मूल सिद्धांतों तथा निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) की वैधानिक व्यवस्थाओं का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई विद्यालय प्राथमिक स्तर पर बच्चों को 'रटकर सीखने' (Rote Learning) से मुक्त करते हुए ज्ञान को बाहरी जीवन से जोड़ने, बाल-केंद्रित शिक्षा प्रदान करने और समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के तहत प्रत्येक बालक को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास करता है, तो इन दोनों दस्तावेजों के अंतर्संबंधों और उनके तात्विक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं सत्य है?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-2005) और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE-2009) के प्रावधानों के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त और सही है?
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राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) के मुख्य दर्शन और 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम' (RTE Act 2009) की धारा 29 के प्रावधानों के अंतर्गत, सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) और बाल-केन्द्रित शिक्षाशास्त्र के वास्तविक क्रियान्वयन का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन दोनों नीतिगत दस्तावेजों के अंतर्निहित लोकतांत्रिक और समावेशी स्वरूप को सर्वाधिक सटीक रूप से स्पष्ट करता है?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के मूल दर्शन और विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों (Children with Special Needs) के शिक्षण-अधिगम परिप्रेक्ष्य का गहन विश्लेषण करने पर, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) तथा 'निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009' (RTE Act) के आलोक में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन समावेशी संस्कृति की वास्तविक तात्विक और शैक्षणिक प्रकृति को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है?
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राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) और निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा प्रावधान दोनों दस्तावेजों के मुख्य दार्शनिक और बाल-केन्द्रित दृष्टिकोण को सबसे सटीक रूप से समेकित करता है?
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राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) और निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) के संयुक्त परिप्रेक्ष्य में, निम्नलिखित में से कौन सा प्रावधान प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर मूल्यांकन प्रणाली (Evaluation System) के संबंध में सबसे अधिक वैचारिक और सैद्धांतिक रूप से मेल खाता है?
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और बौद्ध-वैदिक कालीन शिक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध कालीन शिक्षा प्रणाली में उच्च शिक्षा के केंद्र 'विहार' और 'संघ' होते थे, जहाँ शिक्षा प्राप्त करने वाले भिक्षुओं को 'सामणेर' कहा जाता था, तथा नालंदा, वल्लभी और विक्रमशिला जैसे महाविहार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के प्रसिद्ध केंद्र थे जहाँ प्रवेश के लिए कठोर द्वार-पंडित (Gatekeeper Scholars) मौखिक परीक्षा लेते थे।
2. वैदिक कालीन शिक्षा प्रणाली में गुरुकुल आधारित शिक्षा में 'ब्रह्मचर्य आश्रम' का पालन करना अनिवार्य था, और यहाँ छात्रों के चरित्र निर्माण, आत्म-संयम तथा आध्यात्मिक चेतना के विकास पर बल दिया जाता था, जहाँ शिक्षा का माध्यम पूरी तरह से संस्कृत भाषा थी।
3. मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली में प्राथमिक शिक्षा के लिए 'मक्तब' (Maktab) और उच्च शिक्षा के लिए 'मदरसा' (Madarsa) की व्यवस्था थी, तथा मक्तब में केवल धार्मिक शिक्षा दी जाती थी और किसी भी प्रकार की पठन-पाठन या लेखन की व्यावहारिक शिक्षा का पूर्ण अभाव था, क्योंकि राज्य का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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बुद्ध कालीन शिक्षा प्रणाली और उसकी प्रमुख विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध कालीन शिक्षा प्रणाली में मठों (Monasteries) और विहारों में प्रवेश के लिए 'प्रव्रज्या' (Pravrajya) संस्कार कराया जाता था, जो लगभग 8 वर्ष की आयु में होता था, जिसके बाद छात्र 'सामणेर' (Novice) कहलाता था।
2. बौद्ध काल में उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद लगभग 20 वर्ष की आयु में 'उपनपसंदा' (Upasampada) संस्कार संपन्न होता था, जिसके उपरांत छात्र पूर्ण भिक्षु (Bhikkhu) बनता था और संघ की सदस्यता प्राप्त करता था।
3. बौद्ध शिक्षा का माध्यम पूरी तरह से पाली और अन्य लोक भाषाएं थीं, और इस प्रणाली में वर्ण व्यवस्था या जातिगत भेदभाव को पूर्ण स्थान दिया गया था, जिसके कारण शूद्रों और महिलाओं का प्रवेश वर्जित था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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