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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक स्वरूप, मृदा प्रकार और जलवायुिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश के दक्षिण का पठारी क्षेत्र प्रायद्वीपीय पठार का उत्तर-पूर्वी विस्तार है, जिसके अंतर्गत ललितपुर, झाँसी, महोबा, बाँदा और सोनभद्र जिले आते हैं। इस क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' और 'काबर' मृदाएँ चिकनी और काली प्रकृति की होती हैं, जिनमें नमी धारण करने की अत्यधिक क्षमता होती है। 2. 'भावर' क्षेत्र कंकड़, पत्थरों और मोटे बालू से निर्मित एक ऐसा संकीर्ण पेटी क्षेत्र है जहाँ नदियाँ सतह पर बहने के बजाय अक्सर विलुप्त (अदृश्य) हो जाती हैं और केवल दलदली व वनाच्छादित तराई क्षेत्र में पुनः प्रकट होती हैं। 3. उत्तर प्रदेश में होने वाली कुल वार्षिक वर्षा का लगभग 75% से 80% भाग दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी की शाखा से प्राप्त होता है, जबकि शीतकाल में होने वाली कुछ वर्षा 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbances) के कारण होती है जिसे रबी की फसल के लिए अत्यंत लाभदायक माना जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। 1. उत्तर प्रदेश का दक्षिणी पठारी क्षेत्र प्रायद्वीपीय पठार का उत्तर-पूर्वी विस्तार है जहाँ ललितपुर, झाँसी आदि जिलों में 'मार', 'काबर', 'परुवा' और 'राढ़' मृदाएँ पाई जाती हैं। मार और काबर चिकनी और काली होती हैं जिनमें नमी धारण करने की तीव्र क्षमता होती है। 2. भावर क्षेत्र शिवालिक की तलहटी में स्थित कंकड़-पत्थरों से निर्मित पेटी है जहाँ नदियाँ विलوب हो जाती हैं और आगे तराई क्षेत्र में पुनः प्रकट होती हैं। 3. यूपी में मानसूनी वर्षा का अधिकांश भाग (लगभग 75-80%) बंगाल की खाड़ी की शाखा से प्राप्त होता है, और सर्दियों की वर्षा पश्चिमी विक्षोभ (मावट) से होती है जो रबी फसलों (विशेषकर गेहूँ) के लिए वरदान है।
Related Questions
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हिंदी भाषा और व्याकरण के अंतर्गत 'संधि' और 'समास' के नियमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दीर्घ स्वर संधि के अंतर्गत जब ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ, ऋ के पश्चात क्रमशः समान ह्रस्व या दीर्घ स्वर आते हैं, तो दोनों मिलकर क्रमशः आ, ई, ऊ, ऋ हो जाते हैं, जैसे— 'विद्या + आलय' में दीर्घ 'आ' का निर्माण होता है।
2. 'द्विगु समास' और 'कर्मधारय समास' दोनों में समानता यह है कि दोनों का उत्तर पद प्रधान होता है, परंतु द्विगु समास का पूर्व पद सदैव 'संख्यावाचक' होता है जो किसी समूह या समाहार का बोध कराता है, जबकि कर्मधारय समास में पूर्व और उत्तर पद के बीच 'विशेषण-विशेष्य' या 'उपमान-उपमेय' का संबंध होता है।
3. 'बहुव्रीहि समास' में दोनों पद प्रधान होते हैं और सामासिक पद अपने सामान्य अर्थ को छोड़कर किसी अन्य तीसरे पद या अर्थ का विशेष रूप से बोध कराता है, जैसे— 'चक्रपाणि' (चक्र है पाणि में जिसके अर्थात् विष्णु)।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, बालकों में 'संरक्षण' (Conservation) की अवधारणा यानी यह समझ कि किसी वस्तु के आकार या रूप में परिवर्तन होने पर भी उसकी मात्रा या द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है, किस विकासात्मक अवस्था की मुख्य विशेषता है?
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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में, लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत में 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) और 'चान्त्वना या ढांचागत सहयोग' (Scaffolding) की अवधारणाओं के बीच निम्नलिखित में से कौन सा संबंध सबसे अधिक सटीक और तार्किक रूप से सही है?
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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के अंतर्गत अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) और 'अवलोकनयात्मक अधिगम' (Observational Learning) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंडूरा के अनुसार अधिगम केवल प्रत्यक्ष रूप से पुरस्कार या दंड प्राप्त करने (क्रियाप्रसूत अनुबंधन) से ही नहीं होता, बल्कि बालक दूसरों के व्यवहार, उनके परिणामों और सामाजिक परिवेश का अवलोकन (Observation) करके भी सीखता है।
2. अवलोकनयात्मक अधिगम की प्रक्रिया में चार प्रमुख अंतर-संबंधित चरण होते हैं - ध्यान देना (Attention), स्मरण रखना (Retention), पुनरुत्पादन (Reproduction), और अभिप्रेरण या पुनर्बलन (Motivation/Reinforcement)।
3. 'बॉबो डॉल प्रयोग' (Bobo Doll Experiment) में बंडूरा ने यह सिद्ध किया कि बच्चे आक्रामक व्यवहार को आनुवंशिक रूप से स्वतः जन्मजात रूप से ही सीखते हैं और उन पर वयस्कों या मॉडलों के आक्रामक व्यवहार का कोई अवलोकनयात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश की कृषि-जलवायु प्रदेशों (Agro-Climatic Zones) और वहाँ की प्रमुख फसलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को कृषि योजना आयोग द्वारा कुल 9 विशिष्ट कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जो राज्य की मृदा प्रकार, वर्षा और तापमान की भिन्नता को दर्शाते हैं।
2. 'भाबर एवं तराई क्षेत्र' में उच्च आर्द्रता और उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी के कारण धान और गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है, जबकि 'बुंदेलखंड क्षेत्र' (दक्षिण का पठारी भाग) मुख्य रूप से कम वर्षा और लाल/काली मृदा के कारण ज्वार, चना और तिलहन की खेती के लिए जाना जाता है।
3. पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में गहन कृषि और अत्यधिक नलकूप सिंचाई के कारण गेहूँ और गन्ने का उत्पादन सर्वाधिक होता है, तथा इस क्षेत्र में केले की व्यावसायिक कृषि के लिए प्रसिद्ध जिला कौशाम्बी है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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